बच्चे की देखभाल के लिए CCL नहीं मिलने पर महिला पुलिस आरक्षक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, न्यायालय ने अवकाश देने का आदेश दिया
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
बिलासपुर । बच्चे की देखभाल के लिए संतान पालन अवकाश (Child Care Leave—CCL) की मांग करने वाली जिला बिलासपुर में पदस्थ महिला पुलिस आरक्षक क्रांति को पुलिस विभाग द्वारा अवकाश प्रदान नहीं किए जाने के बाद न्याय के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर की शरण लेनी पड़ी।

महिला पुलिस आरक्षक क्रांति ने अपने बच्चे की देखभाल के लिए नियमानुसार CCL अवकाश हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था। पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर द्वारा अवकाश स्वीकृत नहीं किए जाने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में WPS No. 6951/2026 अधिवक्ता रवि भगत के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की।

याचिका में बच्चे की देखभाल की आवश्यकता तथा संतान पालन अवकाश के उद्देश्य को न्यायालय के समक्ष रखा गया। प्रकरण की सुनवाई के पश्चात माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए याचिकाकर्ता को संतान पालन अवकाश (CCL) प्रदान करने का आदेश दिया।
महिला कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण आदेश
यह मामला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि संतान पालन अवकाश का मूल उद्देश्य कर्मचारी को अपने बच्चे की देखभाल के लिए आवश्यक समय उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से छोटे बच्चों की देखभाल की परिस्थितियों में CCL के आवेदन पर केवल विभागीय आवश्यकता के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कर्मचारी की परिस्थितियों और अवकाश के उद्देश्य पर भी विचार किया जाना आवश्यक है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी पक्ष रखा गया कि संतान पालन अवकाश कर्मचारी को दिया जाने वाला वैधानिक सेवा लाभ है, जिसका उद्देश्य बच्चे की देखभाल एवं पालन-पोषण में कर्मचारी को आवश्यक सहयोग प्रदान करना है।
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद महिला पुलिस आरक्षक क्रांति को बच्चे की देखभाल के लिए राहत मिली है। यह आदेश समान परिस्थितियों में कार्यरत महिला कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना जा रहा है।

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