उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश

0
image_search_1790150754243

उद्योगों से लेकर रेलवे तक में उपयोग की होगी पड़ताल, 15 दिनों में निकाय देंगे जानकारी

6 शहरों में बन रहे कुल 338 एमएलडी के एसटीपी

सूडा ने निकायों को परिपत्र जारी कर संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और आवश्यक कार्यवाही के दिए निर्देश

NTPC World Environment Day

रायपुर । सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग गंभीरता से पहल कर रही है। विभाग ने उपचारित जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने नगरीय निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और उनकी जल आवश्यकता के आकलन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा गया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के जिन 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन है, वहां के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इन निकायों को एसटीपी के उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा गया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित जल की आवश्यकता होगी, इसका भी आकलन करने को कहा गया है।

50 किमी के दायरे में तलाशेंगे उपयोगकर्ता

उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसके उपयोग के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से की जा सकेगी।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है।

केंद्र सरकार और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन की पहल

सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरोदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगाव के निगम आयुक्तों को परिपत्र जारी कर बताया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी एसटीपी के उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए निर्देशित किया है। सूडा ने संबंधित निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता के संबंध में जानकारी 15 दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel
error: Content is protected !!