एसईसीएल का हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम अब कोल इंडिया में भी होगा लागू
विजिलेंस विभाग के मार्गदर्शन में विकसित एचएमआईएस को कोल इंडिया स्तर पर विस्तार देने की तैयारी, 2.2 लाख से अधिक कर्मियों को मिलेगा लाभ
बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में विकसित हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) को अब कोल इंडिया स्तर पर भी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। एसईसीएल द्वारा विकसित डिजिटल अस्पताल प्रबंधन प्रणाली को आधार बनाकर कोल इंडिया के लिए एकीकृत अस्पताल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके लागू होने से कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को साझा डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।
प्रस्तावित व्यवस्था से कोल इंडिया के 2.2 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सा अभिलेखों के डिजिटलीकरण, उपचार संबंधी जानकारी के व्यवस्थित संधारण तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

27 मई 2026 को एसईसीएल में हुई थी शुरुआत
एसईसीएल में एचएमआईएस की शुरुआत 27 मई 2026 को केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा की गई थी। प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य कर्मचारियों और मरीजों से संबंधित चिकित्सा अभिलेखों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना तथा अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं और प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

एसईसीएल में इसके उपयोग से अस्पतालों में होने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से दर्ज और प्रबंधित करने की व्यवस्था विकसित की गई है। अब इसी मॉडल को व्यापक स्तर पर कोल इंडिया की अन्य अनुषंगी कंपनियों के अस्पतालों तक ले जाने की तैयारी है।

पंजीयन से उपचार तक जानकारी एक जगह
एचएमआईएस के माध्यम से मरीज के पंजीयन, चिकित्सकीय परामर्श, उपचार और दवा से संबंधित जानकारी को डिजिटल रूप में दर्ज किया जा सकता है। इससे मरीज की चिकित्सा संबंधी जानकारी एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध रहती है और आवश्यकता पड़ने पर पूर्व चिकित्सा अभिलेखों को देखना आसान होता है।
प्रणाली में चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों की ऑनलाइन प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा अमृत औषधि केंद्र और दवा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी डिजिटल प्रणाली से जोड़ा गया है।
इससे कागजी कार्यवाही को कम करने, रिकॉर्ड के बेहतर संधारण और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की निगरानी में सहायता मिलने की उम्मीद है।
विजिलेंस विभाग की रही महत्वपूर्ण भूमिका
एसईसीएल में एचएमआईएस के विकास और इसे आगे बढ़ाने में विजिलेंस विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभाग के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाने की दिशा में काम किया गया।
डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से प्रक्रियाओं की निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करने के साथ-साथ चिकित्सा अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। एसईसीएल में विकसित प्रणाली की उपयोगिता को देखते हुए अब इसे कोल इंडिया स्तर पर विस्तार देने की दिशा में पहल की जा रही है।
सीवीओ हिमांशु जैन ने बताया महत्वपूर्ण कदम
एसईसीएल के मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन ने कहा कि एचएमआईएस के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा, “एचएमआईएस के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। इससे चिकित्सा अभिलेखों का बेहतर प्रबंधन, प्रक्रियाओं की निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। एसईसीएल में विकसित इस व्यवस्था का कोल इंडिया स्तर पर विस्तार इस पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”
अस्पताल प्रबंधन में बढ़ेगा डिजिटल समन्वय
कोल इंडिया स्तर पर एचएमआईएस के विस्तार से विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। चिकित्सा अभिलेखों के डिजिटलीकरण के साथ अस्पताल प्रबंधन में डिजिटल समन्वय को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा मरीजों की चिकित्सा संबंधी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध रखने, प्रक्रियाओं की निगरानी करने और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े रिकॉर्ड के बेहतर प्रबंधन में भी डिजिटल प्रणाली उपयोगी साबित हो सकती है।
एसईसीएल में विकसित एचएमआईएस का कोल इंडिया स्तर पर विस्तार डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के अस्पतालों को एक साझा डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को इससे लाभ मिलने की संभावना है।

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