पचपेड़ी से बड़ी खबर: परीक्षा के बीच बच्चों से गणेश विसर्जन में कराया गया नाच

0
Screenshot_20260923_161208

रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

बसंतपुर–मुकुंदपुर में पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को कार्यक्रम में ले जाने का आरोप, अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग की

पचपेड़ी/बसंतपुर-मुकुंदपुर। पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम पंचायत बसंतपुर और मुकुंदपुर से बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं और अभिभावकों के अनुसार, पांचवीं और आठवीं कक्षा में अध्ययनरत छोटे बच्चों को स्कूल से जुड़े कर्मचारियों द्वारा गणेश विसर्जन कार्यक्रम के दौरान नृत्य के लिए ले जाया गया, जबकि इसी अवधि में विद्यार्थियों की परीक्षाएं चल रही थीं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।

अभिभावकों का आरोप है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण समय में बच्चों को शैक्षणिक गतिविधियों से हटाकर धार्मिक आयोजन में शामिल कराया जाना उचित नहीं था। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग शिक्षा विभाग से की है।

NTPC World Environment Day

परीक्षा के दौरान बच्चों को कार्यक्रम में ले जाने का आरोप

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, गणेश विसर्जन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूल के छोटे बच्चों को भी शामिल कराया गया। आरोप है कि इनमें पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थी भी शामिल थे और उनसे कार्यक्रम के दौरान नृत्य कराया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के लिए परीक्षा का समय पढ़ाई, तैयारी और मानसिक एकाग्रता की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में उन्हें स्कूल से बाहर किसी आयोजन में शामिल कराने से उनकी परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने की आशंका है।

अभिभावकों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि विद्यार्थियों को स्कूल से किसी आयोजन में ले जाया गया था तो इसके लिए किस स्तर से अनुमति दी गई थी और क्या अभिभावकों की सहमति ली गई थी?

स्कूल परिसर और आयोजन को लेकर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम को स्कूल परिसर से जोड़कर देखा जा रहा है तथा स्कूल के कुछ कर्मचारियों की भूमिका और मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि बच्चों को कार्यक्रम में शामिल करने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया था।

हालांकि, इस संबंध में स्कूल प्रबंधन अथवा संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए मामले में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अभिभावकों में नाराजगी

मामले को लेकर कई अभिभावकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन परीक्षा के दौरान बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अभिभावकों का कहना है कि पांचवीं और आठवीं कक्षा के बच्चे अभी छोटी उम्र के हैं। परीक्षा के बीच यदि उनका ध्यान पढ़ाई से हटाकर किसी अन्य गतिविधि में लगाया जाता है तो इसका असर उनकी तैयारी और परीक्षा प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाया जाए कि विद्यार्थियों को कार्यक्रम में किस परिस्थिति में शामिल किया गया और इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

धार्मिक आयोजन का सम्मान, लेकिन पढ़ाई भी जरूरी

ग्रामीणों और स्थानीय स्तर पर शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि गणेश उत्सव और विसर्जन जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों का अपना महत्व है। बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना भी शिक्षा का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके लिए समय, सुरक्षा, पढ़ाई और परीक्षा कार्यक्रम का ध्यान रखा जाना जरूरी है।

लोगों ने सुझाव दिया कि स्कूलों में विद्यार्थियों को किसी भी बाहरी कार्यक्रम में शामिल करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए तथा जहां आवश्यक हो, अभिभावकों की पूर्व सहमति ली जाए।

शिक्षा विभाग से जांच की मांग

अभिभावक समुदाय ने शिक्षा विभाग से मामले में तत्काल जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि—

  • परीक्षा के दौरान बच्चों को कार्यक्रम में क्यों ले जाया गया?
  • विद्यार्थियों को स्कूल से बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी?
  • क्या अभिभावकों की सहमति ली गई थी?
  • क्या इससे परीक्षा अथवा पढ़ाई प्रभावित हुई?
  • कार्यक्रम में स्कूल कर्मचारियों की क्या भूमिका थी?
  • भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे?

अभिभावकों का कहना है कि यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदर्शन की चेतावनी

अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि यदि शिकायत पर समय रहते संज्ञान नहीं लिया गया तो वे शिक्षा अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने के साथ प्रदर्शन करने जैसे कदम उठाने पर मजबूर होंगे।

अब पूरे मामले में शिक्षा विभाग की जांच और संबंधित स्कूल प्रबंधन का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों को गणेश विसर्जन कार्यक्रम में किस प्रक्रिया के तहत शामिल कराया गया था और क्या इसमें किसी नियम या निर्देश का उल्लंघन हुआ है।

फिलहाल अभिभावकों की मांग है कि परीक्षा अवधि में विद्यार्थियों की पढ़ाई, अनुशासन और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसी भी गैर-शैक्षणिक गतिविधि के कारण बच्चों की परीक्षा प्रभावित न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel
error: Content is protected !!