अनुज्ञा रद्द, फिर भी 6000 वर्गफीट में निर्माण जारी!
एसएनजी कॉलेज के पास नियमों को ताक पर रखकर निर्माण का आरोप, नगर पालिका की भूमिका पर उठे सवाल; तत्कालीन कलेक्टर कुंदन कुमार के कार्यकाल में नहीं हुई निर्णायक कार्रवाई, अब नए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो से कड़े एक्शन की उम्मीद
मुंगेली। शहर में नियम विरुद्ध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के मामलों पर नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रायपुर रोड स्थित शासकीय एसएनजी कॉलेज के समीप लगभग 6000 वर्गफीट क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध निर्माण को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संबंधित निर्माण के लिए नगर पालिका द्वारा पहले भवन निर्माण अनुज्ञा जारी किए जाने और बाद में शिकायत के बाद उक्त अनुज्ञा को निरस्त किए जाने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ और मौके पर निर्माण जारी रहने से नगर पालिका की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस भूमि पर निर्माण किया जा रहा है, वह कथित तौर पर अवैध प्लॉटिंग से संबंधित है। ऐसे में यहां भवन निर्माण की अनुमति जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जागरूक नागरिकों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने निर्माण अनुज्ञा निरस्त कर दी, लेकिन अनुज्ञा निरस्त होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहने से पूरा मामला और गंभीर हो गया है।


पहले अनुमति, शिकायत के बाद कैंसिल हुई अनुज्ञा
प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर रोड पर एसएनजी कॉलेज के बगल में जीवन मंगलानी सहित अन्य लोगों के नाम से भवन निर्माण की अनुमति नगर पालिका द्वारा जारी की गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित क्षेत्र में प्लॉटिंग की वैधता और निर्माण की अनुमति को लेकर पहले से ही सवाल मौजूद थे।

मामले की शिकायत नगर पालिका सहित संबंधित अधिकारियों से किए जाने के बाद निर्माण अनुज्ञा की प्रक्रिया की जांच की गई। शिकायत के बाद नगर पालिका प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर भवन निर्माण अनुज्ञा निरस्त कर दी।
नियमानुसार एक बार भवन निर्माण अनुज्ञा निरस्त होने के बाद संबंधित निर्माण को तत्काल रोकना और यदि कोई निर्माण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करना नगर पालिका प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार जमीन पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।

कागजों में अनुमति खत्म, जमीन पर निर्माण जारी
मामले का सबसे गंभीर पहलू यही है कि जिस निर्माण की अनुमति नगर पालिका द्वारा निरस्त किए जाने की बात कही जा रही है, उसी स्थल पर निर्माण कार्य जारी रहने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक निर्माण स्थल पर लगातार गतिविधियां दिखाई दे रही हैं और निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि भवन निर्माण अनुज्ञा वास्तव में निरस्त हो चुकी है तो नगर पालिका का अमला मौके पर जाकर निर्माण कार्य को पूरी तरह बंद क्यों नहीं करा पा रहा है? क्या संबंधित स्थल का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? यदि निरीक्षण किया गया तो निर्माण जारी पाए जाने के बाद क्या कार्रवाई की गई? और यदि कार्रवाई की गई तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा?

नगर पालिका की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि नगर पालिका की ओर से इस संबंध में आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
यदि अनुज्ञा निरस्त होने के बावजूद निर्माण जारी है तो यह नगर पालिका के भवन अनुज्ञा और निर्माण शाखा की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। क्योंकि किसी भी निर्माण की अनुमति रद्द होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा मौके की स्थिति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करना अपेक्षित है।

जेडी के निर्देश के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
मामले को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर स्तर पर भी जानकारी पहुंचने की बात सामने आई थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार वहां से भी आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन मिला था। इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य अब तक जारी है तो यह सवाल स्वाभाविक है कि उच्च अधिकारियों के निर्देश और आश्वासन के बाद भी स्थानीय स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या नगर पालिका के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया या फिर कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह गई? यह जांच का विषय है।

सरकार को राजस्व नुकसान की आशंका
अवैध प्लॉटिंग और नियम विरुद्ध निर्माण के मामलों का असर केवल शहर की नियोजन व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे शासन को मिलने वाले राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। यदि किसी भूमि पर नियमों का पालन किए बिना निर्माण किया जाता है तो भवन अनुज्ञा, विकास शुल्क, नियमितीकरण तथा अन्य मदों में मिलने वाले राजस्व की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाना जरूरी है कि संबंधित भूमि की स्थिति क्या है, भवन निर्माण अनुज्ञा किस आधार पर जारी की गई थी, बाद में उसे किन कारणों से निरस्त किया गया और अनुज्ञा निरस्त होने के बाद भी निर्माण कार्य कैसे जारी रहा।

तत्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल में नहीं हुई निर्णायक कार्रवाई
मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों की नजर तत्कालीन कलेक्टर कुंदन कुमार के कार्यकाल में जिला प्रशासन पर भी टिकी रही। नागरिकों को उम्मीद थी कि शिकायत का संज्ञान लेकर प्रशासन संबंधित निर्माण स्थल की जांच कराएगा और यदि निर्माण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के साथ नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अपेक्षित स्तर पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी। इस बीच तत्कालीन कलेक्टर कुंदन कुमार का स्थानांतरण हो गया और अब जिले की कमान नए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के हाथों में है।

नए कलेक्टर से कार्रवाई की उम्मीद
अब इस पूरे मामले में स्थानीय नागरिकों की निगाहें नए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो पर टिक गई हैं। नागरिकों की मांग है कि एसएनजी कॉलेज के पास चल रहे निर्माण की मौके पर जांच कराई जाए और संबंधित भूमि के दस्तावेज, प्लॉटिंग की वैधता, भवन निर्माण अनुज्ञा जारी करने की प्रक्रिया तथा अनुज्ञा निरस्त किए जाने के कारणों की जांच कराई जाए।
यदि जांच में निर्माण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार तत्काल निर्माण बंद कराने, आवश्यक होने पर सीलिंग अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने और अनुमति जारी करने से लेकर निर्माण नहीं रोकने तक की पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका निर्धारित करने की मांग की जा रही है।

अब देखना यह है कि प्रशासन कब लेता है संज्ञान
करीब 6000 वर्गफीट के इस निर्माण को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अब नगर पालिका और जिला प्रशासन को देना होगा। आखिर जब भवन निर्माण अनुज्ञा निरस्त की जा चुकी है तो निर्माण कार्य किस आधार पर जारी है? मौके पर नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था कहां है? शिकायत के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल शहरवासियों की नजर नए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो की कार्रवाई पर है। अब देखना यह होगा कि एसएनजी कॉलेज के पास कथित अवैध निर्माण पर प्रशासन की ओर से कब ठोस कदम उठाया जाता है और नगर पालिका की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कब सामने आता है।

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