सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, कल्याण और गरिमा हेतु ठोस सुधार
भारत के लोगों से एक वादा : डॉ. वीरेंद्र कुमार

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एक साफ-सुथरे एवं स्वस्थ देश की जिम्मेदारी हजारों सफाई कर्मचारियों के कंधों पर है। ये सफाई कर्मचारी अक्सर कठिन एवं जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हुए हमें हर दिन आवश्यक सेवाएं प्रदान करते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और हमारे शहरों व समुदायों के कामकाज में उनका योगदान अमूल्य है।

इसलिए उनकी सुरक्षा, कल्याण और गरिमा सुनिश्चित करना महज एक सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि एक समावेशी और मानवीय समाज के निर्माण का एक जरूरी हिस्सा भी है।

इस जिम्मेदारी को समझते हुए, केन्द्र सरकार ने ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते)’ और ‘राष्ट्रीय नेशनल सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) के वित्तीय सहायता कार्यक्रमों के जरिए सफाई कर्मचारियों के जीवन एवं उनकी आजीविका की सुरक्षा के लिए कई व्यापक उपाय किए हैं।

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ये उपाय जोखिम भरे शारीरिक तरीकों से हटकर, स्वच्छता के एक ऐसे सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण इकोसिस्टम की दिशा में निर्णायक बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मशीनीकरण, पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास और टिकाऊ आजीविका पर आधारित है।
एक सुरक्षित स्वच्छता इकोसिस्टम का निर्माण

‘नमस्ते’ का मुख्य लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है: सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिम भरी सफाई को खत्म करना और सफाई कार्यों के दौरान होने वाली मौतों को शून्य तक ले आना। इस योजना का उद्देश्य स्वच्छता से जुड़ी श्रमशक्ति को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ना और सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरण, पेशेगत प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाएं एवं आजीविका के अवसर सुनिश्चित करना है। यह मशीनों एवं सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को भी बढ़ावा देती है ताकि किसी भी कर्मचारी को अनावश्यक रूप से जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

इस योजना के तहत 91,000 से अधिक सीवर एवं सेप्टिक टैंक से जुड़े श्रमिकों की जानकारी जुटाई गई है। इनमें से 90,000 से अधिक श्रमिकों की जानकारियों का सत्यापन किया जा चुका है। जहां 87,000 से अधिक श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट प्रदान की गई हैं, वहीं लगभग 77,000 श्रमिकों को स्वास्थ्य-बीमा योजना के दायरे में लाया गया है।

जानकारी जुटाने एवं उनके सत्यापन की यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे श्रमिकों को औपचारिक मान्यता मिलती है और एक ऐसा रास्ता तैयार होता है जिसके माध्यम से वे सरकारी कल्याणकारी व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। साथ ही, इससे कार्यान्वयन एजेंसियों को उनकी जरूरतों को समझने और पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, प्रशिक्षण एवं आजीविका के मामले में उचित कदम उठाने में मदद मिलती है।

संस्थागत तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बड़ी नगर पालिकाओं और जिलों में स्थापित स्वच्छता से संबंधित आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयों (ईआरएसयू) को 750 से अधिक सुरक्षा उपकरण भेजे गए हैं। ये इकाइयां आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करती हैं और सीवर व सेप्टिक-टैंक की सफाई के काम को सुरक्षित एवं मशीनों के जरिए करने में मदद करती हैं।

जागरूकता और व्यवहारगत बदलाव भी एक अहम पहलू है। देश भर में सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिम भरी सफाई को रोकने हेतु 1,600 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। इन कार्यशालाओं में सफाई के असुरक्षित तरीकों से जुड़े खतरों के बारे में बताने और मशीनों से सुरक्षित सफाई के महत्व पर जोर देने के उद्देश्य से कर्मचारियों, अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों को एकजुट किया गया है।

मशीनीकरण: जोखिम भरे श्रम से सुरक्षित उद्यम तक

स्वच्छता संबंधी कार्यों के रूपांतरण में मशीनीकरण की अहम भूमिका है। जब तकनीक़ से इन कार्यों को सुरक्षित रूप से किया जा सकता है, तो किसी भी कर्मचारी को सीवर या सेप्टिक टैंक में स्वयं उतरने की जरूरत क्यों हो।

इसलिए, केन्द्र सरकार सफाई कर्मचारियों को सफाई से जुड़ी मशीनों एवं वाहनों का मालिक तथा संचालक बनने में मदद करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। लगभग 1,000 सफाई कर्मचारियों को 370 से अधिक सफाई के वाहन खरीदने हेतु लगभग 35 करोड़ रुपये की अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी जारी की गई है।

यह सहायता महज उपकरण प्रदान करने से कहीं बढ़कर है। यह कर्मचारियों को जोखिम भरे काम से हटाकर मशीनीकृत सफाई सेवाओं, उद्यमिता और टिकाऊ आय अर्जित करने की दिशा में बढ़ने में मदद कर रही है।

इसका व्यापक उद्देश्य सफाई कर्मचारियों को महज कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि कुशल पेशेवरों, सेवा प्रदाताओं और उद्यमियों के रूप में मान्यता दिलाना है। सफाई के वाहनों एवं उपकरणों के मालिक बनने से जहां कार्यस्थल पर सुरक्षा बेहतर हो सकती है, वहीं व्यापक वित्तीय आजादी और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के अवसर भी सृजित हो सकते हैं।

मात्र सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्तियों और परिवारों के लिए सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण आजीविका बनाने के साधन तैयार करना: यही सशक्तिकरण का मूलमंत्र है।

कचरा बीनने वालों तक कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार

स्वच्छता और साफ-सफाई के कार्यों का दायरा सिर्फ सीवरों एवं सेप्टिक टैंकों की सफाई तक ही सीमित नहीं है। कचरे को एकत्रित करके, उसे छांटकर और उसकी पुनर्प्राप्ति व पुनर्चक्रण में मदद करके, कचरा बीनने वाले भी एक बेहद जरूरी जन-सेवा करते हैं। फिर भी, उनमें से कई लोगों ने लंबे समय से बिना किसी उचित पहचान, पेशेगत सुरक्षा या सामाजिक सुरक्षा के ही काम किया है।

उनके योगदानों को देखते हुए, सरकार ने 2024 में ‘नमस्ते’ योजना का विस्तार किया और इसमें ठोस कचरा प्रबंधन में संलग्न कचरा बीनने वालों को भी शामिल किया। इस कदम का उद्देश्य जानकारी जुटाने (प्रोफाइलिंग), पेशेगत सुरक्षा के उपायों, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास और आजीविका में मदद के जरिए कचरा बीनने वालों को सुरक्षित, गरिमापूर्ण और टिकाऊ आजीविका उपलब्ध कराना है।

इस विस्तारित घटक के तहत, 3.80 लाख से अधिक कचरा बीनने वालों के बारे में जानकारियां जुटाई गई हैं। इनमें से लगभग 2.60 लाख लोगों का सत्यापन ई-केवाईसी के जरिए किया गया है। जहां 1.30 लाख से अधिक कचरा बीनने वालों को पीपीई किट प्राप्त हुई हैं, वहीं 1.20 लाख से अधिक लोगों के डेटा को आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए प्रोसेस किया गया है।

‘नमस्ते’ योजना के तहत कचरा बीनने वालों को शामिल करना, चक्रीय अर्थव्यवस्था और ठोस कचरे के प्रबंधन में उनके योगदानों को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन्हें पहचान से संबंधित दस्तावेज, पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने में मदद मिल रही है। साथ ही, उनके लिए टिकाऊ आजीविका के रास्ते भी खुल रहे हैं।

एनएसकेएफडीसी के जरिए आर्थिक सशक्तिकरण

सुरक्षा और गरिमा के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण भी जरूरी है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। यह संस्था आय सृजन वाली गतिविधियों, उद्यमिता, कौशल विकास और सफाई से जुड़े वाहनों व उपकरणों को खरीदने के लिए रियायती दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। एनएसकेएफडीसी, भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत कार्यरत एक उपक्रम है।

वर्ष 2014-15 और 2025-26 के बीच, एनएसकेएफडीसी ने 2,383 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता जारी की, जिससे देश भर में 3.42 लाख से अधिक लोगों को लाभ हुआ।

इस सहायता के दायरे के बारे में पता वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर होने वाले इसके विस्तार से चलता है। वर्ष 2014–15 में 19,000 से अधिक लाभार्थियों को 134 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी, जो 2025–26 में बढ़कर 223 करोड़ रुपये से अधिक हो गई और इससे लगभग 29,000 लोगों को लाभ हुआ।

इन आंकड़ों की तह में ऐसे लोग और परिवार हैं जो बेहतर आर्थिक सुरक्षा की दिशा में बढ़ना चाहते हैं। रियायती दरों पर ऋण, पूंजीगत सब्सिडी और आजीविका में मदद देकर, एनएसकेएफडीसी लाभार्थियों को उत्पादक परिसंपत्तियां हासिल करने, अपना उद्यम स्थापित करने और आय के स्थायी स्रोत बनाने में मदद कर रहा है।

आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा का एक ज़रूरी पूरक है। यह परिवारों को भविष्य की योजना बनाने, शिक्षा में निवेश करने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की बेहतर क्षमता विकसित करने में समर्थ बनाता है।

सफाई कर्मचारियों के योगदानों को मान्यता
सम्मान और मान्यता उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी कि वित्तीय और संस्थागत सहायता।

अपनी तरह के एक अहम आयोजन में, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) ने 23 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अपना 33वां स्थापना दिवस मनाया। इस कार्यक्रम में 900 से अधिक सफाई कर्मचारियों के साथ-साथ केन्द्र तथा राज्य सरकारों व केन्द्र-शासित प्रदेशों के प्रशासन, शहरी स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों, नागरिक समाज के संगठनों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस अवसर पर, 250 सफाई कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। एनसीएसके का 2026 का वार्षिक कैलेंडर भी जारी किया गया। साथ ही, एनसीएसके की मिस्ड-कॉल सुविधा (80 4735 9520) भी शुरू की गई ताकि संबंधित लोग अपनी शिकायतों और बातों को दर्ज करा सकें।

ऐसी पहलें इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि गरिमा को सिर्फ वित्तीय सहायता से नहीं मापा जा सकता। यह इस बात से भी झलकता है कि समाज जरूरी सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने वाले लोगों को कितनी मान्यता देता है, उनका कितना सम्मान करता है और उनकी बातें कितनी सुनता है।

सफाईमित्र सुरक्षा एवं सम्मान

हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हाइब्रिड मोड में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के ‘सफाईमित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ में देश भर से 3,800 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी), ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) और संबंधित विभागों की भागीदारी, हमारे सफाईमित्रों के सम्मान, गरिमा और महत्व को बनाए रखने की हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

इस राष्ट्रीय शिविर के दौरान, लाभार्थियों ने कुल 2,24,521 ‘नमस्ते’ कार्ड डाउनलोड किए। जबकि, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुंच आसान बनाने हेतु 57,967 आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए।

इस शिविर में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 1,53,253 पंजीकरण भी किए गए ताकि लाभार्थियों को कल्याणकारी एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके। पेशेगत सुरक्षा को बेहतर बनाने की कोशिश के तहत, इसमें शामिल जगहों पर सफ़ाई मित्रों को 1.28 लाख से अधिक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट वितरित किए गए।

सुरक्षा से अवसर की ओर

इसलिए, सफाई कर्मचारियों के कल्याण के प्रति सरकार का दृष्टिकोण व्यापक है।

प्रोफाइलिंग से मान्यता हासिल होती है और लक्षित उपायों के लिए आधार बनता है। पीपीई और सुरक्षा उपकरण काम से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करते हैं। स्वास्थ्य सेवा संबंधी कवरेज सामाजिक सुरक्षा का एक अहम जरिया है। मशीनीकरण से जोखिम भरे शारीरिक तरीकों पर निर्भरता कम होती है। कौशल विकास और वित्तीय सहायता से स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर सृजित होते हैं।

ये सभी उपाय मिलकर सफाई के काम के स्वरूप को ही बदलने का प्रयास कर रहे हैं।

लक्ष्य महज जोखिम भरे कार्य को थोड़ा सुरक्षित बनाना भर नहीं है। लक्ष्य जोखिम भरे तरीकों को खत्म करना, मशीनी एवं कुशल सफाई सेवाओं को बढ़ावा देना और गरिमापूर्ण आजीविका के रास्ते बनाना है।

सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण भविष्य का संकल्प

सफाई के काम में आमूल बदलाव का अंतिम उद्देश्य लोगों का कल्याण है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे समाज को साफ-सुथरा रखने के क्रम में किसी भी सफाई कर्मचारी को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुरक्षा, कामकाज की सुरक्षित परिस्थितियों और आर्थिक अवसरों को सुलभ कराना भी है। सबसे बढ़कर, इसका उद्देश्य उन सभी लोगों की गरिमा को मान्यता देना है जो हमारे देश की सफाई और भलाई में योगदान देते हैं।

‘नमस्ते’ और एनएसकेएफडीसी के वित्त-पोषण एवं आजीविका संबंधी कार्यक्रम इस बदलाव में महत्वपूर्ण साधन हैं। ये साधन सुरक्षा को सामाजिक सुरक्षा के साथ, मशीनीकरण को उद्यमिता के साथ और कल्याण को सशक्तिकरण के साथ जोड़ते हैं।

अब जबकि भारत एक साफ-सुथरे, स्वस्थ और समावेशी भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हमारा संकल्प अटूट रहना चाहिए: जो लोग हमारे देश को साफ रखते हैं, वे खुद भी सुरक्षा, गरिमा, संरक्षा और अवसरों से परिपूर्ण हों और अपना दायित्व सहजता से निभा पाएं।


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