तिरंगे के रंगों में सजा दुर्गा पूजा पंडाल, नक्सल हिंसा के बलिदानियों को समर्पित 44वां दुर्गोत्सव

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मारो के मंदिर चौक में विशेष थीम के जरिए वीर जवानों और हिंसा से प्रभावित परिवारों को श्रद्धांजलि, शांति, एकता और राष्ट्रप्रेम का दिया संदेश

रिपोर्टर विनय सिंह | ब्यूरो बेमेतरा

मारो। नगर के राधा-कृष्ण मंदिर चौक में मंदिर चौक दुर्गोत्सव समिति द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा के 44वें वर्ष में इस बार देशभक्ति और संवेदना से जुड़ी विशेष थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया गया है। तिरंगे के केसरिया, सफेद और हरे रंगों से सजे इस पंडाल के माध्यम से छत्तीसगढ़ में दशकों तक चली नक्सल हिंसा में बलिदान देने वाले वीर जवानों तथा हिंसा से प्रभावित आम नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। समिति ने इस आयोजन को केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित न रखते हुए शांति, राष्ट्रीय एकता, मानवता और राष्ट्रप्रेम का संदेश देने का प्रयास किया है।

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समिति के सदस्य राम चौबे से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष दुर्गोत्सव की थीम छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा के दौरान प्रभावित हुए परिवारों के संघर्ष, पीड़ा और स्मृतियों को समर्पित है। पंडाल की सजावट के माध्यम से उन वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को याद किया जा रहा है, जिन्होंने देश की सुरक्षा और शांति के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसके साथ ही हिंसा में अपने प्रियजनों को खोने वाले आम नागरिकों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जा रही है।

चार दशकों की पीड़ा और बलिदान को किया नमन

छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा की गंभीर चुनौती का सामना किया है। इस दौरान अनेक जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। वहीं, कई आम नागरिक भी हिंसा की चपेट में आए और अनेक परिवारों को अपनों से बिछड़ने का असहनीय दुख झेलना पड़ा। किसी ने अपना बेटा खोया, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए बदल गईं।

इन घटनाओं के पीछे केवल आंकड़े नहीं, बल्कि अनगिनत परिवारों की पीड़ा, अधूरी इच्छाएं और जीवनभर साथ रहने वाली यादें जुड़ी हैं। मंदिर चौक दुर्गोत्सव समिति ने इसी मानवीय पक्ष को केंद्र में रखते हुए इस वर्ष के आयोजन को बलिदानियों और पीड़ित परिवारों की स्मृति को समर्पित किया है।

समिति का उद्देश्य है कि दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से समाज को यह याद दिलाया जाए कि शांति और सुरक्षा का महत्व कितना बड़ा है। देश की रक्षा में अपने प्राण देने वाले जवानों के प्रति सम्मान और हिंसा से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना ही इस आयोजन की मुख्य भावना है।

तिरंगे के रंगों से दिया शांति और एकता का संदेश

पंडाल को तिरंगे के तीनों रंगों के अनुरूप सजाया गया है। केसरिया रंग साहस और त्याग, सफेद रंग शांति तथा हरा रंग समृद्धि और आशा का प्रतीक है। इन रंगों के माध्यम से समिति ने ऐसे समाज की कल्पना प्रस्तुत की है, जहां हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे और प्रत्येक परिवार भयमुक्त वातावरण में जीवन व्यतीत कर सके।

समिति के अनुसार, देशभक्ति केवल राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें देश की रक्षा करने वालों के बलिदान को याद रखना और हिंसा से प्रभावित लोगों के दुख को समझना भी शामिल है। पंडाल की थीम इसी भावना को सामने लाती है। आयोजन के जरिए आने वाली पीढ़ियों तक शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मां दुर्गा से अमन-चैन और खुशहाली की प्रार्थना

मां दुर्गा की आराधना के अवसर पर समिति ने देश में शांति, सुरक्षा और सद्भाव बनाए रखने की कामना की है। समिति की भावना है कि किसी भी परिवार को हिंसा के कारण अपने प्रियजनों से बिछड़ने का दुख न सहना पड़े। किसी मां की गोद सूनी न हो, किसी बच्चे के सिर से पिता का साया न उठे और किसी परिवार की खुशियां हिंसा की भेंट न चढ़ें।

नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए समिति ने बलिदान देने वाले जवानों को सम्मानपूर्वक याद करने और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया है। यह आयोजन उन सभी परिवारों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने हिंसा के कारण अपूरणीय क्षति झेली है।

धार्मिक आस्था के साथ मानवता और राष्ट्रप्रेम का संगम

मंदिर चौक दुर्गोत्सव समिति का 44वां दुर्गोत्सव इस वर्ष अपनी विशेष थीम के कारण अलग पहचान बना रहा है। मां दुर्गा की आराधना के साथ वीर जवानों के बलिदान, पीड़ित परिवारों की संवेदना और समाज में शांति की आवश्यकता को प्रमुखता दी गई है।

समिति का मानना है कि सच्चा उत्सव वही है, जिसमें अपनी खुशियों के साथ दूसरों के दर्द को भी समझा जाए और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा एकता को मजबूत किया जाए। तिरंगे के रंगों में सजा यह पंडाल इसी भावना का प्रतीक है, जो लोगों को देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद करने और शांतिपूर्ण भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

आयोजन स्थल: राधा-कृष्ण मंदिर चौक, मारो, जिला बेमेतरा, छत्तीसगढ़।

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