बस्तर और सरगुजा सहित जनजातीय एवं दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक पहुंचे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में करेंगे स्थापित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक

छत्तीसगढ़ को वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, तकनीकी नवाचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श

प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर तथा विज्ञान एवं गणित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और आधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर

आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और किफायती स्वास्थ्य तकनीकों के विकास में भी आईआईएससी की विशेषज्ञता का लाभ लेने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रस्तावित परियोजनाओं की व्यवहार्यता का परीक्षण कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश

रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का प्रमुख संकल्प है। हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और प्रतिभाशाली मानव संसाधन को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर विकास का एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखा जा सकता है। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन एवं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर संभावित सहयोग, आवश्यक वैज्ञानिक अधोसंरचना, संस्थागत व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की प्रारंभिक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश ही नहीं, बल्कि विश्व के अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों में शुमार है। इसकी विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमताओं और शैक्षणिक अनुभवों का पूरा लाभ छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से यहां के युवाओं को मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व में भारत आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नित-नई वैश्विक उपलब्धियां हासिल कर रहा है। ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी उत्कृष्टता और उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की सबसे निर्णायक भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ भी इसी राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण की दिशा में पूरी गति से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक और शैक्षणिक अधोसंरचनाएं विकसित करना चाहती है, जिनका लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाली अनेक पीढ़ियों को प्राप्त हो। विज्ञान और अनुसंधान में किया गया निवेश प्रदेश के दीर्घकालिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और हमारे युवाओं के उज्ज्वल भविष्य में सबसे बड़ा निवेश है।

मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन छिपी हुई प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, उच्च स्तरीय वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है।

मुख्यमंत्री साय ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ आपसी सहयोग की सभी संभावनाओं का पूरी गंभीरता से परीक्षण किया जाए। प्रस्तावित परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत व्यवहार्यता का गहराई से अध्ययन कर एक ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इन सभी लोकहितकारी पहलों को जल्द से जल्द व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित इन महत्वपूर्ण प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से तैयार होगा वैज्ञानिक और तकनीकी विकास का नया आधार

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच सहयोग की संभावनाओं वाली तीन प्रमुख परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें प्रदेश में विश्वस्तरीय ‘मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी’ की स्थापना, विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान का विकास तथा आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ तक पहुंचाना प्रमुख रूप से शामिल है।

इन प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा एवं तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, अनुसंधान आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।

विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर से उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों को मिलेगी नई शक्ति

बैठक में छत्तीसगढ़ में एक विश्वस्तरीय ‘मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी’ की स्थापना के प्रस्ताव पर विशेष रूप से चर्चा हुई। यह प्रस्तावित अत्याधुनिक केंद्र प्रदेश के खनिज, इस्पात, धातु, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी और मददगार सिद्ध होगा।

छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में शुमार है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोग बढ़ाने, नई औद्योगिक तकनीकों के विकास और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान सुविधाओं की बेहद आवश्यकता है। यह प्रस्तावित केंद्र इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

इस केंद्र में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

इन उन्नत सुविधाओं के माध्यम से धातु एवं मिश्रधातुओं के गुणों का सटीक अध्ययन, उन्नत पदार्थों का परीक्षण, नई विनिर्माण तकनीकों का विकास और औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा। इससे रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और अन्य अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं नवाचार की असीम संभावनाएं बढ़ेंगी।

प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसके माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 1,800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।

इस केंद्र के विकसित होने से छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप्स और औद्योगिक इकाइयों को उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान की विश्वस्तरीय सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। इससे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए अन्य राज्यों या विदेशी संस्थानों पर हमारी निर्भरता कम होगी, अनुसंधान की लागत और समय में भारी कमी आएगी तथा उद्योगों की तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में बहुत सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विशाल खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमताओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ना प्रदेश के आर्थिक विकास को पूरी तरह एक नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम होगा। इससे राज्य में अनुसंधान आधारित उद्योगों, तकनीकी नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के अनगिनत नए अवसर सृजित हो सकेंगे।

विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव

बैठक में प्रदेश में विज्ञान और गणित की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार लाने के उद्देश्य से भारतीय विज्ञान संस्थान के उच्च अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले एक विशेष संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप प्रस्तावित इस विशिष्ट संस्थान का मुख्य उद्देश्य विज्ञान एवं गणित विषयों में उच्च प्रशिक्षित, अत्यंत दक्ष और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से पूरी तरह परिचित शिक्षकों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है।

प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख विषयों के साथ-साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, संवाद कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास पर विशेष बल दिया जाएगा।

इस संस्थान में 14 आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता, एक समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष, खेलकूद की बेहतरीन सुविधाएं तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय अधोसंरचना विकसित करने की परिकल्पना है। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।

भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा पाठ्यक्रम के निर्माण, उन्नत प्रयोगशालाओं के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने में अपना अमूल्य अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने की संभावनाओं पर भी बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक मजबूत और गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा ही वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। विज्ञान और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों में विद्यार्थियों की गहरी रुचि जगाने तथा उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए उत्कृष्ट और ज्ञानी शिक्षकों का होना सबसे ज्यादा जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इस अनूठी पहल से प्रदेश में विज्ञान एवं गणित के उच्च प्रशिक्षित शिक्षकों की एक बेहतरीन फौज तैयार करने में बहुत मदद मिलेगी। इसका बेहद सकारात्मक प्रभाव शासकीय विद्यालयों सहित प्रदेश की संपूर्ण स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। विशेष रूप से हमारे ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों के नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी प्रयास होगा।

चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में भी सहयोग की अपार संभावनाएं

बैठक में तीसरी सबसे महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की उच्च शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं का पूरा लाभ छत्तीसगढ़ की जनता को उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

इस प्रस्ताव में किफायती चिकित्सा जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

प्रारंभिक चरण में एक पूर्ण मेडिकल स्कूल की स्थापना करने के स्थान पर ‘हब एंड नेटवर्क मॉडल’ अपनाने की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। इस प्रभावी मॉडल के माध्यम से भारतीय विज्ञान संस्थान को छत्तीसगढ़ के प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शासकीय संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी विकास की दिशा में तेजी से कार्य किया जा सकेगा।

इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्थापना, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के परीक्षण एवं सत्यापन केंद्रों का विकास, फेलोशिप, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा उन्नत चिकित्सा तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया गया।

बैठक में यह जानकारी साझा की गई कि बेंगलुरु स्थित टाटा आईआईएससी मेडिकल स्कूल विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के अनूठे समन्वय पर आधारित एक बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है। इसमें कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी जैसे अति-विशेषज्ञता वाले चिकित्सा क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

इस संस्थान के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुभवों का भरपूर लाभ छत्तीसगढ़ में चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक उपचार तकनीकों के विकास में लिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेश के दूरदराज इलाकों में बैठे प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान का सही उपयोग हमारी स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी व संवेदनशील बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में समय पर चिकित्सा जांच, गंभीर रोगों की शीघ्र पहचान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुगम उपलब्धता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के तकनीकी नवाचार बेहद उपयोगी साबित होंगे।

बस्तर और सरगुजा के युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाशाली युवाओं और मेधावी बच्चों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि उन्हें देश के राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सुनहरे अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान की उच्च विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों तक पहुंचाने, उन्हें वरिष्ठ वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन दिलाने, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अनुसंधान इंटर्नशिप (Research Internship) के अवसर देने, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का प्रशिक्षण दिलाने तथा विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के विशेष व्याख्यान आयोजित कराने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

इसके अलावा, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी), बुनियादी विज्ञान और अन्य उभरती हुई आधुनिक तकनीकों में विशेष और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने पर भी गहन विचार किया गया।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन सभी सुनहरे अवसरों से हमारे शासकीय शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के युवाओं को प्राथमिकता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा के हमारे प्रतिभाशाली युवा भी देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्थानों में जाकर उच्च कोटि का अनुसंधान करें, नई-नई तकनीकों का स्वदेशी विकास करें और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदेश का नाम रोशन करें, यही राज्य सरकार की प्रबल आकांक्षा है।

बस्तर और सुकमा में जल संरक्षण तथा स्थानीय तकनीकी नवाचारों की संभावनाओं पर चर्चा

बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित की गई विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर भी बहुत सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।

भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रख्यात वैज्ञानिकों ने बस्तर और सुकमा सहित प्रदेश के विभिन्न वनांचलों में बिना बिजली के केवल जल प्रवाह की प्राकृतिक ऊर्जा से संचालित होने वाली अनूठी पंपिंग तकनीकों के उपयोग संबंधी कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।

हाइड्रोलिक रैम एवं टरबाइन पंपों पर आधारित ये आधुनिक तकनीकें विशेष रूप से हमारे दूरस्थ और दुर्गम वनांचलों के लिए अत्यंत उपयोगी हो सकती हैं, जहां पारंपरिक विद्युत आधारित जलापूर्ति व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन में अक्सर भौगोलिक कठिनाइयां आती हैं। स्थानीय प्राकृतिक जलस्रोतों और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप यदि इन उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाए, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने और स्थानीय समुदायों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में बहुत मददगार साबित हो सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, शोधित जल के सुरक्षित पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग), जलाशयों के पुनर्भरण और भूजल स्तर को ऊपर उठाने के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के सफल अनुभवों पर भी बैठक में खुलकर चर्चा की गई।

इस दौरान कर्नाटक के कोलार जिले का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया गया, जहां प्रतिदिन 440 मिलियन लीटर शोधित जल को लगभग 137 से अधिक जलाशयों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया है। इसी प्रकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचारों की व्यावहारिक उपयोगिता का गहन अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, उन्नत जल प्रबंधन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुकूल प्रभावी समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी वैज्ञानिक अनुसंधान की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब उसका प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। विज्ञान और तकनीक का उपयोग हमारे ग्रामीण जीवन को और अधिक सुगम बनाने, अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समस्याओं के स्थायी समाधान खोजने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाना चाहिए।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत समन्वय आवश्यक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के समग्र, संतुलित और तीव्र विकास के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, उद्योग, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे के साथ मजबूती से जोड़कर आगे बढ़ाना सबसे अधिक जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे देश के सर्वोच्च और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ इस ऐतिहासिक सहयोग से प्रदेश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अधोसंरचना विकसित करने, उच्चस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्थानीय उद्योगों की तकनीकी आवश्यकताओं को समय पर पूरा करने और हमारे युवाओं के लिए भविष्य के नए व बेहतर रोजगार अवसर सृजित करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि हमारी सरकार की यह पुरजोर कोशिश है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज संपदा और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध एक राज्य के रूप में ही सीमित न रहे, बल्कि यह प्रदेश ज्ञान, उच्च वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उत्कृष्ट मानव संसाधन के एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी अपनी एक विशिष्ट वैश्विक पहचान बनाए।

उन्होंने अंत में कहा कि ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के हमारे पावन संकल्प को साकार करने में विज्ञान, तकनीक और नवाचार की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ होने वाला यह प्रस्तावित सहयोग हमारी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को एक नई और विराट ऊंचाई देने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण, दूरगामी और ऐतिहासिक पहल साबित होगा।

इस उच्चस्तरीय और अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, प्रशासन एवं वित्त संकाय के डीन प्रोफेसर पी.एस. अनिल कुमार, मैकेनिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सत्यम सुवास तथा बायोलॉजिकल साइंसेज डिवीजन के डीन प्रोफेसर सतीश राघवन विशेष रूप से शामिल हुए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन की नई दिल्ली में पदस्थ निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू सहित संबंधित विभागों के अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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