सफलता की कहानी : उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से बदली परदेशी की किस्मत अब सालाना कमाई 10 लाख रुपए पार

रायपुर । सेवा, संकल्प और समर्पण जब शासकीय योजनाओं से जुड़ते हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी जाती है। कुछ वर्ष पहले तक केवल 8 से 10 देशी गायों के सहारे प्रतिदिन महज 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन करने वाले सारंगढ़ तहसील के ग्राम खुड़डेना निवासी किसान परदेशी लाल चंद्रा आज एक सफल और समृद्ध डेयरी उद्यमी बनकर उभरे हैं। शुरुआती दिनों में कम दूध उत्पादन और पशुओं की अचानक होने वाली बीमारियों या मृत्यु से परिवार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जिसके कारण उनकी आमदनी भी बेहद सीमित थी। ऐसे मुश्किल समय में राज्य सरकार का राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम उनके लिए वरदान साबित हुआ। पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने अपनी गायों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए नस्ल सुधार की शुरुआत की, जिसके सुखद परिणामस्वरूप आज उनके पास उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली एचएफ (Holstein Friesian) क्रॉसब्रीड गायें तैयार हो चुकी हैं।

वर्तमान में परदेशी लाल चंद्रा के पास 6 उन्नत एचएफ क्रॉसब्रीड गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 65 से 70 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को वे स्थानीय निजी होटलों और उपभोक्ताओं को 40 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं, जिससे उन्हें रोजाना लगभग 2,600 से 2,800 रुपए की आमदनी होती है। इस तरह दूध बिक्री से उनकी मासिक आय 78,000 से 84,000 रुपए और वार्षिक आय बढ़कर 9.36 लाख से 10.08 लाख रुपए तक पहुँच चुकी है। जो पशुपालन कभी परिवार के लिए केवल एक पूरक आय का जरिया था, आज वही उनकी मुख्य आजीविका और आर्थिक मजबूती का ठोस आधार बन गया है।
भविष्य की आय को सुरक्षित करने के लिए उनके पास वर्तमान में 2 एचएफ क्रॉस, 2 जर्सी क्रॉस और 2 साहीवाल क्रॉस की कुल 6 उन्नत बछिया तैयार हो रही हैं, जो आने वाले दिनों में दूध उत्पादन और आय को और बढ़ाने का आधार बनेंगी। इसके साथ ही, पशुपालन के जोखिमों से सुरक्षा के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अपने पशुओं का 60,000 रुपए प्रति पशु की दर से तीन वर्षों का बीमा कराया है, जिसके लिए मात्र 585 रुपए प्रति पशु का प्रीमियम निर्धारित है। उन्नत मादा वत्स पालन योजना के अंतर्गत भी उनका चयन किया गया है, जिसके तहत बछियों के बेहतर पोषण के लिए उन्हें 19,500 रुपए मूल्य का संतुलित पशु आहार मिल रहा है, जिसमें हितग्राही अंशदान केवल 4,500 रुपए है।
परदेशी लाल ने अपनी आय को केवल दूध बिक्री तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पशुओं से प्राप्त गोबर से जैविक खाद बनाकर स्थानीय किसानों को बेच रहे हैं। इससे उन्हें न केवल अतिरिक्त कमाई हो रही है, बल्कि कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम करने में भी मदद मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई परदेशी लाल चंद्रा की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ सही हितग्राही तक पहुँचता है, तो पारंपरिक व्यवसाय भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन सकता है।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
