सरकार की संवेदनशील पहल

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बैटरी चलित ट्रायसायकल से बदला 75% अस्थिबाधित सोमारू का जीवन, मिली आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

रायपुर । समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांगजन हितैषी योजनाएं प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद का नया उजाला भर रही हैं। नारायणपुर जिले के नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गुडरीपारा निवासी 47 वर्षीय सोमारू नेताम की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे एक शासकीय योजना ने न सिर्फ एक व्यक्ति की शारीरिक बाधाओं को दूर किया, बल्कि उन्हें समाज में स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के साथ जीने का संबल भी दिया।

ग्राम गुडरीपारा निवासी सोमारू नेताम, पिता चैतराम, 75 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांगता से ग्रस्त हैं। इस गंभीर दिव्यांगता के कारण उनका जीवन लंबे समय तक काफी कठिनाइयों से भरा रहा। चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ होने की वजह से उनकी दिनचर्या बेहद सीमित होकर रह गई थी। घर से बाहर निकलने से लेकर दैनिक आवश्यकताओं के सामान के लिए बाजार जाने या स्वास्थ्य जांच हेतु अस्पताल पहुंचने तक, हर छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें अपने परिवार के सदस्यों या ग्रामीणों की मदद पर निर्भर रहना पड़ता था।

दूसरों पर इस लगातार निर्भरता ने न केवल उनके आवागमन को बाधित किया था, बल्कि उनके भीतर के आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर रखा था। दैनिक जीवन की सामान्य गतिविधियों के लिए भी दूसरों की सहायता की आवश्यकता होने के कारण उनके लिए सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में सहज रूप से भागीदारी करना चुनौतीपूर्ण था।

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शासकीय योजना बनी सहारा

सोमारू के इस कठिन जीवन संघर्ष को आसान बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग की ‘बैटरी चलित (मोटराइज्ड) ट्रायसायकल प्रदाय योजना’ एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आई। विभाग द्वारा संवेदनशीलता से पहल करते हुए सोमारू नेताम को एक आधुनिक बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई।

ट्रायसायकल मिलने के बाद सोमारू के दैनिक जीवन में बड़ा बदलाव आया। जिस आवागमन के लिए पहले उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब वही काम वे स्वयं करने में सक्षम हो गए हैं। सहायक उपकरण ने उनके लिए घर से बाहर निकलने और जरूरी कार्यों को स्वयं पूरा करने का रास्ता आसान कर दिया।

अब खुद बाजार और अस्पताल तक कर रहे आवागमन

अब सोमारू को अपनी छोटी से छोटी जरूरतों के लिए किसी दूसरे का इंतजार नहीं करना पड़ता। वे बिना किसी सहायता के अपने घर से खुद ट्रायसायकल चलाकर बाजार, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों तक आसानी से आवागमन कर रहे हैं। इस सुविधा ने उनकी गतिशीलता को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे न केवल उनके समय और श्रम की बचत हो रही है, बल्कि परिवार के सदस्यों पर से भी उनकी निर्भरता काफी कम हो गई है।

स्वतंत्र रूप से आवागमन करने की इस आजादी ने सोमारू के आत्मबल को एक नई ऊंचाई दी है। वे अब न केवल अपने व्यक्तिगत कार्य स्वयं निपटा रहे हैं, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में भी अधिक सहजता और उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।

“ट्रायसायकल मेरे लिए महज वाहन नहीं”

अपनी खुशी व्यक्त करते हुए सोमारू बताते हैं कि बैटरी चालित ट्रायसायकल उनके लिए महज एक वाहन नहीं, बल्कि स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीने का सबसे बड़ा सहारा है। इस सुविधा ने उनकी जिंदगी को सुगम बनाकर भविष्य के प्रति उनका नजरिया पूरी तरह बदल दिया है। अब वे अपने जरूरी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आवागमन कर पा रहे हैं।

आत्मनिर्भरता और सम्मान की ओर बढ़ता कदम

दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की यह योजनाएं जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकतानुसार सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें अधिक स्वतंत्र और सामाजिक रूप से सक्रिय बनाने में सहयोग करना है।

सोमारू नेताम की यह प्रेरणादायक कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब शासकीय योजनाएं सही समय पर सही हितग्राही तक पहुंचती हैं, तो वे जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक सहभागिता के नए दरवाजे खोल देती हैं। बैटरी चालित ट्रायसायकल उनके लिए आवागमन का साधन बनने के साथ-साथ आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई राह भी बनी है।

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