चिरायु ने बदली बच्चों की जिंदगी, गंभीर बीमारियों को मिला मुफ्त इलाज
समय पर पहचान, निःशुल्क उपचार से बच्चों को मिला स्वस्थ जीवन; तीन साल में 60 बच्चों के हृदय रोग का उपचार, कटे-फटे होंठ-तालु समेत 90 बच्चों को मिली मदद
रिपोर्टर 🖋️ कमलेश सिंह, ब्यूरो कवर्धा
कवर्धा। बीमारी गंभीर थी, लेकिन इलाज के रास्ते में आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बनी। जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के माध्यम से जन्मजात एवं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में जिले के 60 बच्चों के हृदय रोग का उपचार कराया गया है। इसके अलावा 21 बच्चों के कटे-फटे होंठ एवं तालु, 5 बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पैर तथा 4 बच्चों की नवजात बधिरता का भी उपचार कराया गया।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से बीमारी की पहचान से लेकर उपचार तक की प्रक्रिया में बच्चों और उनके परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर एवं जन्मजात बीमारियों के महंगे उपचार के लिए आर्थिक बोझ उठाने से राहत मिल रही है।

स्कूलों, छात्रावासों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रहे चिरायु दल
स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों के तहत चिरायु दल जिले के स्कूलों, छात्रावासों, आश्रमों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। जांच के दौरान किसी बच्चे में गंभीर बीमारी अथवा जन्मजात विकृति के लक्षण पाए जाने पर उसे आगे की जांच और उपचार के लिए भेजा जाता है।
आवश्यकता के अनुसार चिरायु वाहन के माध्यम से बच्चों को शासन से अनुबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। जरूरत पड़ने पर राज्य के बाहर स्थित अनुबंधित अस्पतालों में भी बच्चों का निःशुल्क उपचार कराया जाता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक या भौगोलिक कारणों से किसी बच्चे का उपचार प्रभावित न हो।
साल में तीन बार तक होती है बच्चों की स्वास्थ्य जांच
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, अनुदान प्राप्त विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों, आश्रम एवं छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है।
इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी इस कार्यक्रम के दायरे में शामिल किया गया है।
चिरायु दल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन एवं एएनएम शामिल होते हैं। दल द्वारा विद्यालयों में वर्ष में एक बार तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में वर्ष में दो बार पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच, आवश्यक परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इस तरह बच्चों की नियमित जांच के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान करने का प्रयास किया जाता है।
बीमारी की पहचान से उपचार तक पूरी व्यवस्था
चिरायु दल की जांच में किसी बच्चे में गंभीर बीमारी अथवा जन्मजात विकृति के लक्षण सामने आने पर उसे आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए विशेषज्ञ अस्पताल भेजा जाता है। बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए चिरायु वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
उपचार के लिए शासन द्वारा अनुबंधित शासकीय एवं निजी अस्पतालों का लाभ दिलाया जाता है। आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। इससे उन परिवारों को विशेष राहत मिलती है, जो निजी स्तर पर महंगे उपचार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं होते।
दूध पीते समय हांफना भी हो सकता है हृदय रोग का संकेत
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा ने बताया कि छोटे बच्चों में हृदय रोग के कुछ संकेत शुरुआती अवस्था में दिखाई दे सकते हैं। अभिभावकों को इन लक्षणों को लेकर सजग रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि दूध पीने में परेशानी, स्तनपान या फीडिंग के दौरान जल्दी थक जाना या हांफने लगना, दूध पीते अथवा रोते समय अधिक पसीना आना, होंठ, जीभ या नाखूनों का नीला अथवा बैंगनी पड़ना, पर्याप्त भोजन के बावजूद वजन एवं शारीरिक विकास में अपेक्षित वृद्धि नहीं होना तथा आराम या नींद के दौरान भी तेज सांस चलना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर अभिभावकों को बच्चे की चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी गई है।
लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में असामान्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देने पर उसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर चिकित्सकीय परामर्श और जांच से बीमारी की पहचान जल्द हो सकती है और आवश्यकता के अनुसार उपचार कराया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए। इसके लिए चिरायु दलों के माध्यम से बच्चों की नियमित जांच और जरूरतमंद बच्चों को विशेषज्ञ उपचार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
सेवा संकल्प अभियान से भी मिल रही गति
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से भी स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों को गति मिल रही है। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की पहुंच ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
चिरायु कार्यक्रम के माध्यम से समय पर जांच, बीमारी की शीघ्र पहचान और निःशुल्क उपचार की व्यवस्था बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जन्मजात एवं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए यह पहल उपचार का माध्यम बनने के साथ उनके परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत देने में भी सहायक हो रही है।
समय पर जांच और सही उपचार से बच्चों को स्वस्थ जीवन की ओर ले जाने की दिशा में चिरायु कार्यक्रम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत कर रहा है।

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