सामूहिक भागीदारी से विकसित भारत का संकल्प होगा पूरा, बनेगा स्वर्णिम भारत लेखक – ओम प्रकाश डहरिया सहायक जनसंपर्क अधिकारी

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सेवा जब संकल्प बनती है, संकल्प जब समर्पण में बदलता है और समर्पण जब राष्ट्र निर्माण का आधार बनता है, तब एक ऐसी यात्रा प्रारंभ होती है, जो केवल किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे देश की आकांक्षाओं और भविष्य की यात्रा बन जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने का अवसर इसी भाव को अभिव्यक्त करता है। जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए तय की गई इस यात्रा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा विकसित भारत के संकल्प को जन-जन से जोड़ने के उद्देश्य से देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान की एक प्रेरक पहल ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ है, जो गांव, जिला और राज्य स्तर पर सेवा, समर्पण, निष्ठा और राष्ट्र संकल्प की भावना को आगे बढ़ा रही है।

7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने शासन की जिम्मेदारी संभाली थी। वहां से प्रारंभ हुई उनकी शासन और जनसेवा की यात्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को 25 वर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया है। इन ढाई दशकों में शासन के केंद्र में गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को रखते हुए विकास को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास प्रमुखता से सामने आया है। प्रधानमंत्री के रूप में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र इसी सोच को व्यापक स्वरूप देता है। आज विकसित भारत-2047 का संकल्प इसी जनभागीदारी को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति मानकर आगे बढ़ने का आह्वान करता है।

‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ अपने आप में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना का सुंदर संगम है। ज्योति हमारी परंपरा में प्रकाश, ज्ञान, आशा और सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक है, जबकि कलश मंगल, पवित्रता और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। जब यही ज्योति और कलश सेवा के भाव से जुड़ते हैं, तब वे राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का संदेश देते हैं। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा काल के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ प्रत्येक नागरिक को यह स्मरण कराने का अवसर भी है कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का साझा संकल्प है।

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भारत जब वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा, तब हमारा देश कैसा होगा, इसका निर्धारण आज लिए जा रहे संकल्पों और किए जा रहे प्रयासों से होगा। विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी अर्थव्यवस्था, आधुनिक शहर, बेहतर सड़कें, उद्योग अथवा अत्याधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं है। विकसित भारत वह होगा, जहां किसान समृद्ध हो, महिलाएं आत्मनिर्भर हों, युवाओं के सपनों को अवसर मिले, गरीबों को आगे बढ़ने की शक्ति मिले, बच्चों को बेहतर शिक्षा और पोषण मिले तथा समाज का अंतिम व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा में सम्मान के साथ सहभागी बने।

यही कारण है कि सेवा संकल्प अभियान का वास्तविक महत्व जनभागीदारी में निहित है। गांव से शहर तक जब नागरिक सेवा के किसी छोटे से कार्य को भी अपने कर्तव्य से जोड़ते हैं, तो वही छोटा प्रयास राष्ट्र निर्माण की बड़ी शक्ति बन जाता है। स्वच्छता के लिए श्रमदान, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण, जरूरतमंदों की सहायता, रक्तदान, जल संरक्षण, बेटियों की शिक्षा, माताओं और बच्चों के सुपोषण के लिए जागरूकता अथवा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना—ऐसे अनेक कार्य विकसित भारत की बुनियाद को मजबूत कर सकते हैं। राष्ट्र की प्रगति केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदार भागीदारी से गति प्राप्त करती है।

‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ इसी चेतना को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है। यह यात्रा हमें बताती है कि सेवा किसी पद की मोहताज नहीं होती। समाज का प्रत्येक नागरिक अपनी क्षमता के अनुरूप सेवा कर सकता है। किसान खेत में उत्पादन बढ़ाकर, शिक्षक बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर, युवा नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से, महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर और आम नागरिक अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा काल के प्रति आभार व्यक्त करने का सबसे सार्थक माध्यम यही हो सकता है कि सेवा के भाव को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे जीवन का संस्कार बनाया जाए। सेवा संकल्प अभियान हमें अतीत की यात्रा का स्मरण कराने के साथ भविष्य की जिम्मेदारी भी सौंपता है। यह कृतज्ञता के साथ कर्तव्य का, उपलब्धियों के साथ आकांक्षाओं का और सेवा के साथ राष्ट्र संकल्प का अभियान है। आज जब भारत आत्मविश्वास के साथ वर्ष 2047 की ओर आगे बढ़ रहा है, तब सेवा की यह ज्योति हर गांव, हर घर और हर मन में प्रज्ज्वलित होना आवश्यक है। करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास जब एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य से जुड़ेंगे, तभी विकसित भारत का विराट संकल्प साकार होगा। आइए, सेवा को संस्कार, समर्पण को शक्ति और राष्ट्रहित को सर्वोच्च कर्तव्य मानकर आगे बढ़ें। सेवा की ज्योति से संकल्प का प्रकाश फैलाएं और जनभागीदारी की शक्ति से विकसित भारत-2047 के स्वप्न को सिद्धि तक पहुंचाएं। तभी विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा तभी वास्तव में भारत स्वर्णिम भारत बनेगा।

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