नौकरी का झांसा देकर 1.40 लाख की ठगी का आरोप, दो के खिलाफ एफआईआर

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शराब दुकानों में सुरक्षा गार्ड लगाने का दिया भरोसा, फोन-पे और नगद से रकम लेने का आरोप; सिटी कोतवाली मुंगेली में धारा 318(4) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज

मुंगेली। देशी-विदेशी मदिरा दुकानों में सुरक्षा गार्ड की नौकरी लगाने के नाम पर बेरोजगार युवक से 1 लाख 40 हजार रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ग्राम रामगढ़ निवासी मिथलेश कुमार जांगड़े की शिकायत पर सिटी कोतवाली मुंगेली पुलिस ने दुर्गेश जांगड़े निवासी करही (देवरी) और सुरेन्द्र साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर क्रमांक 0318/2026 6 अक्टूबर 2026 को शाम 7:30 बजे दर्ज की गई।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) ऐसे मामले में लागू होती है, जिसमें कथित धोखाधड़ी के जरिए किसी व्यक्ति को संपत्ति देने के लिए बेईमानी से प्रेरित किया गया हो; इस धारा में सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

जान-पहचान के जरिए नौकरी का दिया भरोसा

पुलिस को दिए आवेदन के अनुसार ग्राम रामगढ़ निवासी मिथलेश कुमार जांगड़े, उम्र 27 वर्ष, की करही निवासी दुर्गेश जांगड़े से जान-पहचान थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी परिचय के आधार पर दुर्गेश ने उसे देशी-विदेशी मदिरा दुकान में सुरक्षा गार्ड की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया।

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शिकायत में कहा गया है कि दुर्गेश जांगड़े ने मिथलेश की मुलाकात सुरेन्द्र साहू से सतनाम भवन दाऊपारा में कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार सुरेन्द्र साहू को देशी-विदेशी मदिरा दुकानों में फील्ड ऑफिसर बताया गया और दोनों ने सुरक्षा गार्ड की नौकरी लगाने के लिए रकम की मांग की।

नौकरी के नाम पर रकम देने का आरोप

मिथलेश के आवेदन में आरोप लगाया गया है कि नौकरी लगवाने के भरोसे पर उससे अलग-अलग किश्तों में रकम ली गई। शिकायत में नगद और फोन-पे के माध्यम से भुगतान किए जाने का उल्लेख है।

आवेदन के अनुसार 24 अप्रैल 2026 को कलेक्टर कार्यालय स्थित जनदर्शन सभा कक्ष के सामने 13 हजार रुपये नगद दिए गए। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस दौरान कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे।

इसके बाद फोन-पे के माध्यम से भी रकम भेजे जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। आवेदन में 8 मई को 40 हजार, 9 मई को 15 हजार और 16 मई को 2 हजार रुपये सहित अलग-अलग लेन-देन का विवरण दिया गया है।

कुल 1.40 लाख रुपये लेने का दावा

मामले में रकम को लेकर एफआईआर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग विवरण दर्ज है। एफआईआर के संपत्ति विवरण में 1 लाख 40 हजार रुपये की धोखाधड़ी का उल्लेख है। वहीं शिकायत के विस्तृत कथन में मिथलेश ने अपने तथा अपने दोस्त प्रहलाद बंजारे से संबंधित रकम का भी उल्लेख किया है।

एक अन्य प्रकाशित रिपोर्ट में शिकायत के आधार पर 1.40 लाख रुपये लिए जाने और कथित नियुक्ति पत्र दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

इसलिए वास्तविक रूप से कितनी रकम किस व्यक्ति से, किस तारीख को और किस माध्यम से ली गई, यह पुलिस जांच में लेन-देन के दस्तावेजों और बैंक/फोन-पे रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद स्पष्ट होगा।

एक सप्ताह में नौकरी लगाने का भरोसा

शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद उसे आश्वासन दिया गया कि एक सप्ताह के भीतर नौकरी लग जाएगी। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं लगी।

मिथलेश का आरोप है कि उसने नौकरी नहीं लगने के बाद अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन कथित रूप से रकम वापस नहीं की गई। इसी के बाद उसने पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।

कथित नियुक्ति पत्र की भी जांच होगी

मामले में कथित नियुक्ति पत्र का भी उल्लेख सामने आया है। शिकायतकर्ता ने नियुक्ति पत्र को कथित रूप से फर्जी बताया है। पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण बिंदु होगा कि नियुक्ति पत्र वास्तव में किसने तैयार किया, उसमें किस संस्था अथवा विभाग का नाम इस्तेमाल किया गया और उसे शिकायतकर्ता को किस परिस्थिति में दिया गया।

साथ ही फोन-पे से किए गए भुगतान के स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर, लेन-देन की तारीख और रकम की जांच भी पुलिस द्वारा की जा सकती है।

कलेक्टर कार्यालय के जनदर्शन कक्ष के सामने लेन-देन का दावा

शिकायत में कलेक्टर कार्यालय के जनदर्शन सभा कक्ष के सामने रकम दिए जाने का भी उल्लेख है। यदि पुलिस जांच में यह लेन-देन का स्थान और समय प्रमाणित होता है, तो वहां मौजूद लोगों अथवा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से भी मामले की पुष्टि की जा सकती है।

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में कुछ लोगों की मौजूदगी का उल्लेख किया है। पुलिस अब उनके बयान लेकर यह पता लगा सकती है कि रकम दिए जाने की घटना वास्तव में हुई थी या नहीं।

पुलिस ने शुरू की विवेचना

शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली मुंगेली पुलिस ने प्रथम दृष्टया धारा 318(4) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। एफआईआर में जांच अधिकारी के रूप में निरीक्षक कार्तिकेश्वर जांगड़े का उल्लेख है।

अब पुलिस द्वारा शिकायतकर्ता के बयान, आरोपियों से संबंधित जानकारी, फोन-पे लेन-देन, बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, कथित नियुक्ति पत्र तथा शिकायत में बताए गए प्रत्यक्षदर्शियों से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।

आरोपियों का पक्ष सामने आना बाकी

फिलहाल मामले में आरोप शिकायतकर्ता की रिपोर्ट और दर्ज एफआईआर के आधार पर हैं। दुर्गेश जांगड़े और सुरेन्द्र साहू की ओर से इस मामले में कोई पक्ष या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों को पुलिस जांच के निष्कर्ष से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नौकरी लगाने के नाम पर कितनी रकम ली गई, रकम किसे मिली, कथित नियुक्ति पत्र किसने तैयार किया और पूरे मामले में दोनों नामजद आरोपियों की भूमिका क्या रही।

जांच के बाद खुलेगा पूरा मामला

नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से पैसे लेने के आरोप को पुलिस गंभीरता से जांच रही है। खासतौर पर 1.40 लाख रुपये की कथित रकम, फोन-पे लेन-देन, नगद भुगतान और नियुक्ति पत्र इस जांच के प्रमुख बिंदु रहेंगे। दस्तावेजी साक्ष्य और संबंधित लोगों के बयान सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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