50 लाख के विकास कार्य पर सवाल, एसएनजी कॉलेज में निर्माण अधूरा

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महीनों से बंद पड़ा मरम्मत और नवनिर्माण कार्य, मौके से सूचना बोर्ड भी गायब; कक्ष खाली कराने के बाद भी काम शुरू नहीं, पढ़ाई और कार्यालयीन गतिविधियां प्रभावित

मुंगेली/रायपुर। मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। शहर के एसएनजी कॉलेज में करीब 50 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत मरम्मत एवं नवनिर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा होने की बात सामने आई है। निर्माण कार्य की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और छात्रों में नाराजगी है। खास बात यह है कि निर्माण स्थल पर कार्य की लागत, एजेंसी, स्वीकृति, समय-सीमा और अन्य आवश्यक जानकारी वाला सूचना बोर्ड भी मौके पर दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे कार्य की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलेज में मरम्मत एवं निर्माण से जुड़े कार्य कुछ दिनों तक चलते हैं और उसके बाद लंबे समय के लिए बंद हो जाते हैं। उनका आरोप है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि नगर क्षेत्र में स्वीकृत कई विकास कार्यों की स्थिति भी ऐसी ही बताई जा रही है। एसएनजी कॉलेज का मामला इसलिए अधिक गंभीर माना जा रहा है क्योंकि निर्माण कार्य के कारण कॉलेज की नियमित शैक्षणिक एवं कार्यालयीन गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

50 लाख के काम की धीमी रफ्तार से छात्रों में नाराजगी

जानकारी के अनुसार एसएनजी कॉलेज परिसर में मरम्मत और नवनिर्माण के लिए लगभग 50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। कार्य का उद्देश्य कॉलेज की आवश्यक सुविधाओं में सुधार और भवन संबंधी विकास से जुड़ा बताया जा रहा है।

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लेकिन वर्तमान में कार्य की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और छात्रों का कहना है कि निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। कुछ समय के लिए कार्य प्रारंभ होने के बाद मजदूर और निर्माण गतिविधियां बंद हो जाती हैं। इससे कॉलेज परिसर में निर्माण के लिए खाली कराए गए स्थान लंबे समय तक अनुपयोगी पड़े रहते हैं।

ग्रामीणों और छात्रों का कहना है कि यदि शासन स्तर से राशि स्वीकृत होने के बाद भी काम समय पर पूरा नहीं होता है तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

कार्यालय खाली कराया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ

निर्माण कार्य के कारण कॉलेज में कार्यालयीन कार्य के लिए उपयोग किए जा रहे एक कक्ष/हाल को खाली कराया गया है। बताया जा रहा है कि संबंधित स्थान को मरम्मत एवं नवनिर्माण के लिए खाली कराने के बाद वहां निर्माण कार्य किया जाना था।

लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार कई दिन बीत जाने के बाद भी अपेक्षित गति से काम शुरू नहीं हो पाया। इसके चलते कार्यालयीन गतिविधियों को दूसरे स्थान, यहां तक कि कक्षा कक्ष में स्थानांतरित करना पड़ा है।

इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने की बात सामने आ रही है। एक ओर कक्षा कक्षों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर कार्यालयीन कार्यों के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है।

शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा असर

कॉलेज में निर्माण कार्य का उद्देश्य सुविधाओं का विस्तार और भवन की स्थिति में सुधार करना है, लेकिन काम की धीमी गति के कारण फिलहाल विद्यार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय छात्रों का कहना है कि कॉलेज में नियमित कक्षाओं के अलावा अन्य अकादमिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं। निर्माण कार्य के लिए कमरों को खाली कराने और कार्यालय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने से व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

छात्रों का कहना है कि यदि कार्य निर्धारित समय में पूरा कर दिया जाता तो अस्थायी असुविधा को आसानी से सहन किया जा सकता था, लेकिन लंबे समय तक निर्माण कार्य अधूरा रहने से समस्या लगातार बढ़ रही है।

सूचना बोर्ड गायब, पारदर्शिता पर सवाल

निर्माण कार्य के दौरान सामान्य तौर पर कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड के माध्यम से स्वीकृत राशि, कार्य का नाम, कार्य एजेंसी/ठेकेदार, कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता की निर्धारित अवधि सहित आवश्यक जानकारी प्रदर्शित की जाती है। इससे आम नागरिकों को यह जानने में सुविधा होती है कि सार्वजनिक धन से कौन सा कार्य, कितनी लागत और किस समय-सीमा में किया जा रहा है।

लेकिन एसएनजी कॉलेज में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बताए जा रहे कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने की बात सामने आई है।

इसी को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब इतनी बड़ी राशि से सार्वजनिक भवन में निर्माण कार्य कराया जा रहा है तो आम लोगों को कार्य की पूरी जानकारी क्यों नहीं मिल रही है?

गुणवत्ता और समय-सीमा की जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य अधूरा होने के साथ-साथ कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने से कई सवाल पैदा होते हैं। उनका कहना है कि संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्य कब स्वीकृत हुआ, किस एजेंसी को दिया गया, इसकी निर्धारित समय-सीमा क्या है, अब तक कितना काम पूरा हुआ और कितनी राशि खर्च की जा चुकी है।

इसके साथ ही कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग उठ रही है। नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री और निर्धारित मापदंडों की जांच स्वतंत्र रूप से कराई जानी चाहिए।

डिप्टी सीएम के गृह जिले में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

एसएनजी कॉलेज का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव का गृह जिला मुंगेली है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि एसएनजी कॉलेज से उनका पुराना शैक्षणिक जुड़ाव रहा है।

ऐसे में नगर पालिका से जुड़े विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब राज्य सरकार विकास कार्यों और समयबद्ध निर्माण पर जोर दे रही है, तो स्थानीय स्तर पर स्वीकृत कार्य लंबे समय तक अधूरे क्यों पड़े हैं?

हालांकि, किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि पर व्यक्तिगत रूप से अनियमितता या भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं हुआ है। ऐसे आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के बाद ही हो सकती है।

अधिकारियों की लापरवाही या ठेकेदार की मनमानी?

50 लाख रुपये की लागत से होने वाले कार्य का लंबे समय तक अधूरा रहना अब जिम्मेदारी तय करने की मांग को जन्म दे रहा है। सवाल यह है कि निर्माण कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है—नगर पालिका का संबंधित अमला, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार या कोई अन्य पक्ष?

यदि कार्य में देरी ठेकेदार की वजह से है तो क्या नगर पालिका ने उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की? यदि तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से कार्य रुका है तो उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए? और यदि राशि का भुगतान कार्य की प्रगति के अनुपात से अधिक किया गया है तो इसकी जांच किस स्तर पर हुई?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।

क्या कार्य की जांच होगी?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्य में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे में कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होना, निर्माण की धीमी गति और कार्य के लंबे समय तक बंद रहने की शिकायतों की जांच की जानी चाहिए।

लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका एवं संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और कार्य की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करें। साथ ही स्वीकृत राशि, अब तक हुए व्यय और कार्य की प्रगति का भी सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाए।

नगर पालिका इंजीनियर से संपर्क का प्रयास

इस संबंध में नगर पालिका के संबंधित अधिकारी का पक्ष जानने के लिए इंजीनियर नेमीचंद वर्मा से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन खबर लिखे जाने तक उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

आंदोलन की चेतावनी

निर्माण कार्य की धीमी गति और कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने से नाराज स्थानीय नागरिकों और छात्र संगठनों ने जल्द काम शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

उनका कहना है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और कॉलेज की नियमित गतिविधियों को प्रभावित करते हुए निर्माण कार्य को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू कर समय-सीमा में पूरा नहीं किया गया तो संबंधित विभाग के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

कॉलेज की जमीन और अवैध निर्माण का मामला भी चर्चा में

एसएनजी कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार कॉलेज परिसर की जमीन, सीमांकन और कथित कब्जे से जुड़े कुछ अन्य मामले भी चर्चा में हैं। कॉलेज की भूमि के आसपास कथित रूप से हो रहे निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

इन मामलों की वास्तविक स्थिति संबंधित राजस्व अभिलेख, सीमांकन रिपोर्ट और प्रशासनिक दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि कॉलेज की भूमि से संबंधित कोई शिकायत या दस्तावेज सामने आते हैं तो उसका भी नियमानुसार परीक्षण जरूरी होगा।

अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर

एसएनजी कॉलेज में 50 लाख रुपये के बताए जा रहे मरम्मत एवं नवनिर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण कार्य की वास्तविक लागत, स्वीकृति, एजेंसी, समय-सीमा, अब तक हुए खर्च और कार्य की भौतिक प्रगति की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

अब देखना होगा कि नगर पालिका, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में मौके का निरीक्षण कर कार्य में देरी के कारणों की जांच करते हैं या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा के भीतर कब तक पूरा होता है।

एसएनजी कॉलेज की जमीन पर कथित कब्जे, सीमांकन विवाद और आसपास हो रहे निर्माण को लेकर भी दस्तावेजों के आधार पर आगे विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

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