नियमों की धज्जियां: महिला सरपंच की जगह पति ने ली शपथ

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

केवटाडीह में शपथ ग्रहण समारोह का वीडियो वायरल, बिजली विभाग के नियमित कर्मचारी अरुण जगत ने पढ़ी सरपंच पद की शपथ; प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

बिलासपुर/मस्तूरी। ग्राम पंचायत केवटाडीह (भूतहा), विकासखंड मस्तूरी में पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां नवनिर्वाचित महिला सरपंच श्रीमती जयंती जगत की जगह उनके पति अरुण जगत द्वारा सरपंच पद की शपथ लिए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में कथित तौर पर अरुण जगत शपथ पत्र पढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि निर्वाचित महिला सरपंच जयंती जगत उनके पास ही मौजूद बैठी दिखाई देती हैं।

मामला सामने आने के बाद पंचायत चुनाव, निर्वाचित जनप्रतिनिधि की संवैधानिक भूमिका और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह भी बताई जा रही है कि शपथ लेने वाले अरुण जगत बिजली विभाग में नियमित कर्मचारी हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है।

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शपथ ग्रहण का वीडियो बना चर्चा का विषय

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कार्यालय केवटाडीह के सामने शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति द्वारा सरपंच पद की शपथ पढ़ते हुए देखा और सुना जा सकता है।

वीडियो में शपथ लेने वाले व्यक्ति की पहचान सरपंच पति अरुण जगत के रूप में बताई जा रही है। वे शपथ पत्र में छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत निर्वाचन नियमों का उल्लेख करते हुए अपने दायित्व का निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।

वहीं, निर्वाचित महिला सरपंच जयंती जगत कार्यक्रम स्थल पर मौजूद बताई जा रही हैं। यही दृश्य अब पूरे मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल बन गया है कि आखिर निर्वाचित सरपंच की जगह किसी अन्य व्यक्ति ने किस हैसियत से शपथ ली?

निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की जगह पति ने क्यों ली शपथ?

पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत के निर्वाचित सरपंच को ही अपने पद एवं दायित्व की शपथ लेना होती है। ऐसे में यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम सही है और वास्तव में निर्वाचित सरपंच की जगह उनके पति ने औपचारिक रूप से सरपंच पद की शपथ ली है, तो यह गंभीर जांच का विषय है।

इस मामले में प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि शपथ ग्रहण कार्यक्रम में अधिकृत अधिकारी कौन था, शपथ किसे दिलाई गई, शपथ पत्र में किसका नाम दर्ज था और संबंधित दस्तावेजों में किस व्यक्ति के हस्ताक्षर लिए गए।

महिला आरक्षण की भावना पर भी सवाल

पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू है। इसके माध्यम से महिलाओं को स्थानीय शासन में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जाती है।

ऐसे में निर्वाचित महिला सरपंच की जगह उनके पति द्वारा पद की शपथ लेने का मामला सामने आना महिला प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े करता है। यदि किसी निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति औपचारिक रूप से पद की शपथ लेता है तो यह केवल एक कार्यक्रम की प्रक्रिया का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पंचायत व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधि की भूमिका और अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।

शासकीय कर्मचारी होने की बात भी जांच का विषय

मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि शपथ लेने वाले अरुण जगत बिजली विभाग में नियमित कर्मचारी हैं। यदि यह जानकारी सही है तो प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि सरकारी कर्मचारी द्वारा निर्वाचित सरपंच के पद की शपथ लेने की स्थिति कैसे बनी और क्या वह पंचायत के किसी निर्वाचित पद पर विधिवत अधिकृत हैं?

यह पूरा मामला दस्तावेजों और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए पंचायत एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जांच की अपेक्षा की जा रही है।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम तो जिम्मेदारी किसकी?

सबसे बड़ा सवाल शपथ ग्रहण समारोह की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर है। यदि कार्यक्रम आधिकारिक रूप से आयोजित किया गया था और वहां संबंधित अधिकारी या पंचायत प्रशासन के जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद थे, तो निर्वाचित महिला सरपंच के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शपथ पढ़े जाने की स्थिति उत्पन्न कैसे हुई?

यदि अधिकारी की जानकारी में यह घटनाक्रम हुआ तो शपथ प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं यदि अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी तो कार्यक्रम की निगरानी और व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

वीडियो की जांच के बाद सामने आएगी वास्तविकता

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में चर्चा तेज है। हालांकि किसी भी वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय प्रशासन द्वारा वीडियो की सत्यता, कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग, शपथ पत्र, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच किया जाना जरूरी है।

प्रशासन यदि पूरे मामले की जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि वास्तव में शपथ किस व्यक्ति ने ली, किस पद के लिए ली, किस अधिकारी ने शपथ दिलाई और सरकारी रिकॉर्ड में इस प्रक्रिया को किस प्रकार दर्ज किया गया है।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

मामला सामने आने के बाद अब ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए। यदि जांच में यह साबित होता है कि निर्वाचित महिला सरपंच की जगह उनके पति ने आधिकारिक रूप से सरपंच पद की शपथ ली है, तो नियमों के तहत जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

साथ ही शपथ ग्रहण प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर

केवटाडीह पंचायत का यह मामला सामने आने के बाद अब नजर जिला प्रशासन और पंचायत विभाग की कार्रवाई पर है। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वास्तविकता और शपथ ग्रहण की आधिकारिक प्रक्रिया की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरपंच पद के लिए निर्वाचित महिला प्रतिनिधि जयंती जगत हैं, तो उनकी जगह उनके पति अरुण जगत ने किस आधार पर शपथ ली? यदि ऐसा हुआ है तो इस पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या थी—इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच से ही सामने आएगा।

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