जमीन की रजिस्ट्री में ज्योति साहू को 11,400 रुपये की बचत, ऑटोम्यूटेशन से नामांतरण की परेशानी भी हुई दूर

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महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट से मिली आर्थिक राहत, बचत की राशि आई निजी जरूरतों के काम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सुधारों से महिलाओं को मिल रहा दोहरा लाभ

रायपुर । जमीन की रजिस्ट्री में 11 हजार 400 रुपये की बचत और नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिलने पर जांजगीर-चांपा की ज्योति साहू बेहद खुश हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट से उन्हें सीधा आर्थिक लाभ मिला है। वहीं, ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी आसान हो गई है। साहू के लिए यह बदलाव दोहरी राहत लेकर आया है। पंजीयन शुल्क में बची राशि उनकी निजी जरूरतों में काम आ रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए इन सुविधाओं के लिए राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश की पंजीयन व्यवस्था को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार लागू किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में रियायत और रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने जैसी पहल से नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ समय की भी बचत हो रही है।

पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से बचाए 11,400 रुपये

ज्योति साहू ने बताया कि महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50 प्रतिशत की रियायत का उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इस सुविधा से उनके 11 हजार 400 रुपये बचे हैं।

राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इससे महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर लगने वाला शुल्क आधा हो गया है।

साहू ने बताया कि पंजीयन शुल्क में बची राशि उनकी निजी जरूरतों को पूरा करने में काम आ रही है। उन्होंने इस आर्थिक राहत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शुल्क में कमी से महिलाओं के लिए अपने नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना अधिक किफायती हुआ है।

पहले नामांतरण के लिए लगाने पड़ते थे तहसील के चक्कर, अब प्रक्रिया हुई आसान

ज्योति साहू को पंजीयन शुल्क में बचत के साथ ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था का लाभ भी मिला है। उन्होंने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय लगता था और बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे।

अब ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है। साहू ने इस बदलाव को संपत्ति संबंधी कार्यों में नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताया।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से रजिस्ट्री का आर्थिक भार कम हो रहा है। यह व्यवस्था महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और उसका विधिवत पंजीयन कराने को प्रोत्साहित कर रही है।

संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पंजीयन शुल्क में कमी से महिलाओं और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिल रही है।

जांजगीर-चांपा की ज्योति साहू को मिली 11 हजार 400 रुपये की बचत इसका उदाहरण है। उनके लिए यह राशि केवल पंजीयन शुल्क में मिली छूट नहीं, बल्कि परिवार और स्वयं की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी आर्थिक सहायता साबित हुई है।

ज्योति साहू की कहानी—आर्थिक राहत के साथ सरकारी कामकाज भी हुआ आसान

ज्योति साहू ने पंजीयन शुल्क में मिली आर्थिक राहत और ऑटोम्यूटेशन की सुविधाजनक व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से महिलाओं को आर्थिक लाभ मिलने के साथ संपत्ति से जुड़े कार्यों को पूरा करने में भी सुविधा हो रही है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

ज्योति साहू की कहानी बताती है कि पंजीयन व्यवस्था में शुल्क संबंधी रियायत और तकनीकी सुधार नागरिकों के लिए किस तरह उपयोगी साबित हो रहे हैं। एक ओर पंजीयन शुल्क में 11 हजार 400 रुपये की बचत हुई, तो दूसरी ओर ऑटोम्यूटेशन से नामांतरण की प्रक्रिया आसान हुई। उनके लिए यह बदलाव आर्थिक राहत, समय की बचत और सरकारी सेवाओं तक सुविधाजनक पहुंच का अनुभव है।

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