लंबित पेंशन-ग्रेच्युटी के भुगतान में देरी पर गेवा का ऐलान, 15 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना
मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी की जांच और कार्रवाई पर संगठन ने उठाए सवाल, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवार को न्याय दिलाने की मांग
मुंगेली। लंबित पेंशन, सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) और ग्रेच्युटी के भुगतान में कथित लापरवाही तथा कार्रवाई में भेदभाव के आरोपों को लेकर गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ (गेवा) ने आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने घोषणा की है कि मामले में निष्पक्ष एवं पूर्ण कार्रवाई नहीं होने पर 15 अक्टूबर 2026 से जिला कलेक्टोरेट परिसर, मुंगेली में डॉ. भीमराव अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

संगठन ने जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली की जांच और कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मामले में कुछ कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, लेकिन कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। गेवा ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।


दिवंगत व्याख्याता के परिवार के देयक लंबित होने का आरोप
प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भालापुर में पदस्थ रहे दिवंगत व्याख्याता टीकाराम खांडे की मृत्यु के बाद उनके परिवार के पेंशन, जीपीएफ और ग्रेच्युटी संबंधी देयकों के भुगतान में विलंब का मामला सामने आया है। संगठन का आरोप है कि संबंधित विद्यालय के प्राचार्य एवं लिपिक के साथ ही शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कंतेली के प्राचार्य, जो आहरण एवं संवितरण अधिकारी भी हैं, ने प्रकरण में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई।
संगठन के मुताबिक, सेवानिवृत्ति से जुड़े इन महत्वपूर्ण लाभों का भुगतान लंबित रहने से आश्रित परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गेवा ने कहा कि पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति देयक कर्मचारियों के अधिकार हैं। इनके भुगतान में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।
उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी का आरोप
गेवा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि मामले से संबंधित उच्च न्यायालय, बिलासपुर के निर्णय और अवमानना नोटिस से जुड़े प्रकरण में अनावश्यक विलंब किया गया। संगठन ने सामान्य प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के आदेशों और निर्देशों की अनदेखी किए जाने का भी आरोप लगाया है।
प्रदेशाध्यक्ष नवरंग ने बताया कि संगठन ने इस संबंध में जिला कलेक्टर मुंगेली को ज्ञापन सौंपकर शिकायत की थी। ज्ञापन के माध्यम से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
लिपिक के निलंबन को बताया अधूरी कार्रवाई
संगठन का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई जांच के बाद डीडीओ कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 लिपिक देवेंद्र केशरवानी को निलंबित किया गया, लेकिन प्रकरण में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। गेवा ने इस कार्रवाई को अधूरा बताते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
संगठन की मांग है कि पूरे मामले की दोबारा निष्पक्षता से समीक्षा की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि भुगतान में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही प्रभावित परिवार के लंबित पेंशन, जीपीएफ और ग्रेच्युटी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन
प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष एवं पूर्ण कार्रवाई नहीं होती है, तो संगठन 15 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेगा। धरने के माध्यम से लंबित देयकों का भुगतान, जिम्मेदारी का निर्धारण, निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि संगठन कर्मचारियों के अधिकार, सम्मान और न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन को शिकायतों पर गंभीरता से विचार करते हुए समयबद्ध जांच करानी चाहिए, ताकि प्रभावित परिवार को राहत मिल सके और भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।

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