स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत 49.66 करोड़ के 50 कार्यों को मंजूरी

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राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने 42 आकांक्षी शौचालयों सहित स्वच्छता व अपशिष्ट प्रबंधन की परियोजनाओं को दी स्वीकृति

जीरो वेस्ट मॉडल को बढ़ावा देने पर विशेष जोर

रायपुर । शहरों को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने की दिशा में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 49 करोड़ 66 लाख रुपए के 50 कार्यों को मंजूरी दी गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) की 13वीं बैठक में इन विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्रालय में आयोजित बैठक में 42 आकांक्षी शौचालयों सहित सतत स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अनुपचारित जल प्रबंधन से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन कार्यों के पूरा होने से नगरीय क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होने के साथ स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को मिलेगी मजबूती

बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष चर्चा हुई। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

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इसी क्रम में परियोजना पर्यवेक्षण सलाहकार (PMC) की नियुक्ति को भी स्वीकृति दी गई। PMC के माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन की निगरानी की जाएगी, जिससे स्वीकृत कार्यों को निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पूरा करने में मदद मिलेगी।

अनुपचारित जल प्रबंधन के कार्यों को भी मंजूरी

बैठक में अनुपचारित जल प्रबंधन के अंतर्गत 5 नगरीय निकायों से प्राप्त निविदा दरों से संबंधित प्रस्तावों पर भी आवश्यक स्वीकृतियां जारी की गईं। इससे संबंधित नगरीय निकायों में जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी।

शहरी क्षेत्रों में जल के उचित प्रबंधन और अनुपचारित जल से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में इन कार्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वच्छता व्यवस्था के साथ जल प्रबंधन को जोड़कर शहरों में बेहतर और टिकाऊ स्वच्छता प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया गया।

स्रोत पर कचरा पृथक्करण से वैज्ञानिक प्रसंस्करण तक

राज्य स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक में नगरीय क्षेत्रों में शून्य अपशिष्ट यानी जीरो वेस्ट मॉडल को बढ़ावा देने और स्वच्छता प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न नवाचारों पर चर्चा की गई।

बैठक में कचरे के स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही प्रत्येक शहर की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप नवाचार आधारित मॉडल विकसित करने तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

कचरे के स्रोत पर पृथक्करण से लेकर उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण तक पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने से अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग को बढ़ावा देकर कचरे की मात्रा को कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।

समय-सीमा में पूरा हों स्वीकृत कार्य

समिति ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने पर विशेष बल दिया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजनाओं का लाभ जल्द से जल्द आम नागरिकों तक पहुंचे और शहरों में सतत स्वच्छता व्यवस्था स्थापित हो।

शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को केवल सफाई अभियान तक सीमित रखने के बजाय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल प्रबंधन, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण जैसी व्यवस्थाओं को स्थायी रूप से मजबूत करने की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया।

ऑनलाइन और भौतिक रूप से शामिल हुए अधिकारी

बैठक में राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल, वित्त विभाग एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि, भारत सरकार के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बैठक में ऑनलाइन एवं भौतिक रूप से भाग लेकर स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत प्रस्तावित एवं स्वीकृत कार्यों पर चर्चा की।

49.66 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत 50 कार्यों में 42 आकांक्षी शौचालयों सहित स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों के माध्यम से नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार के साथ ठोस अपशिष्ट और जल प्रबंधन की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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