हाईकोर्ट में समय पर जवाबदावा पेश नहीं करने पर कांकेर CMHO डॉ. रामचंद्र ठाकुर निलंबित

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WPS No. 3865/2025 में निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं करने का मामला, बस्तर संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय रहेगा निलंबन अवधि का मुख्यालय

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कांकेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. रामचंद्र ठाकुर के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। विभागीय आदेश के अनुसार, बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय में लंबित एक याचिका में निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाबदावा प्रस्तुत नहीं किए जाने और विभागीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के मामले में यह कार्रवाई की गई है।

हाईकोर्ट में लंबित याचिका से जुड़ा मामला

मिली जानकारी के अनुसार, उच्च न्यायालय बिलासपुर में WPS No. 3865/2025, डॉ. लखन जुरी विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन प्रकरण लंबित है। इस मामले में शासन की ओर से जवाबदावा प्रस्तुत करने के लिए डॉ. रामचंद्र ठाकुर को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था।

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विभागीय जानकारी के मुताबिक, उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर तथा 25 सितंबर 2026 से पूर्व जवाबदावा प्रस्तुत करना था। लेकिन तय समय सीमा में जवाबदावा प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण मामला न्यायालय के समक्ष लंबित रहा। इसके बाद सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को उच्च न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा। साथ ही न्यायालय के निर्देशानुसार 3,000 रुपये की राशि जमा करने की स्थिति भी बनी।

विभागीय कर्तव्य में लापरवाही का उल्लेख

विभाग द्वारा जारी आदेश में निर्धारित समय-सीमा के भीतर न्यायालयीन प्रकरण में जवाब प्रस्तुत नहीं करने की कार्रवाई को गंभीरता से लिया गया है। आदेश में डॉ. ठाकुर के उक्त कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के उल्लंघन के रूप में उल्लेखित किया गया है।

इसी आधार पर उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन आदेश के प्रभावी होने के साथ ही डॉ. रामचंद्र ठाकुर को उनके वर्तमान पद के दायित्वों से अलग कर दिया गया है।

बस्तर संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय होगा मुख्यालय

निलंबन अवधि के दौरान डॉ. रामचंद्र ठाकुर का मुख्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, संभाग-बस्तर निर्धारित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में वे सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना निर्धारित मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त करने की पात्रता रहेगी। यह व्यवस्था सेवा नियमों के अनुरूप लागू होगी।

राज्यपाल के नाम से जारी हुआ आदेश

डॉ. रामचंद्र ठाकुर के निलंबन से संबंधित आदेश राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है। आदेश पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अवर सचिव दिव्या वैष्णव के हस्ताक्षर हैं।

न्यायालयीन मामलों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाबदावा और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना संबंधित विभागीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। इसी प्रक्रिया में हुई कथित देरी को विभाग ने गंभीरता से लेते हुए यह प्रशासनिक कार्रवाई की है।

नोट: निलंबन विभागीय कार्रवाई है; इसे किसी आपराधिक दोषसिद्धि के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। आगे की विभागीय प्रक्रिया में संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर नियमों के अनुसार प्राप्त हो सकता है।

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