कचना-सड्डू नगर विकास योजना में सभी किसानों के लिए समान नीति

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विपक्ष के आरोपों को भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी गोविंद गुप्ता ने बताया भ्रामक, कहा- टाउन प्लानिंग के मानकों का किया गया पालन

रायपुर। कचना-लाभांडी-सड्डू नगर विकास योजना में भूखंड आवंटन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया सह प्रभारी गोविंद गुप्ता ने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि नगर विकास योजना में किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भूखंडों का निर्धारण नहीं किया गया है, बल्कि सभी प्रभावित भूमि स्वामियों और किसानों के लिए समान नीति एवं टाउन प्लानिंग के निर्धारित मानकों का पालन किया गया है।

गोविंद गुप्ता ने कहा कि योजना को लेकर जिस तरह से कुछ भूखंडों को अलग-अलग करके सवाल उठाए जा रहे हैं, उससे पूरी योजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि योजना में समान प्रकृति के सभी मामलों को एक समान मापदंड के आधार पर देखा गया है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भूखंडों का प्रस्ताव एवं आवंटन किया गया है।

कचना की जमीन के बदले सड्डू में भूखंड देने का दावा गलत : गुप्ता

भाजपा नेता ने कचना की मूल भूमि के बदले सड्डू में भूखंड दिए जाने के आरोप को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि नगर विकास योजना का प्रारंभिक नोटिफिकेशन 5 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था, जबकि 11 सितंबर 2026 को प्रारूप नक्शा प्रकाशित किया गया।

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उनके मुताबिक प्रारूप नक्शे में ग्राम कचना की मूल भूमि के बदले प्रस्तावित भूखंड कचना में ही रखा गया है। किसी भी भूमि स्वामी की मूल जमीन को दूसरे ग्राम में स्थानांतरित किए जाने का दावा सही नहीं है।

45 मीटर सड़क पर केवल एक भूखंड नहीं, 37 भूखंड

45 मीटर चौड़ी सड़क से जुड़े आरोपों पर भी गोविंद गुप्ता ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रमुख मार्ग पर केवल प्लॉट नंबर 25 ही नहीं है, बल्कि कुल 37 भूखंड प्रस्तावित एवं आवंटित हैं। टाउन प्लानिंग के निर्धारित मानकों के अनुसार बड़े भूखंडों को चौड़े मार्गों से जोड़े जाने का प्रावधान है। इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित भूखंडों का निर्धारण किया गया है।

उन्होंने कहा कि किसी एक भूखंड को अलग करके यह बताना कि उसे विशेष लाभ दिया गया है, पूरी योजना की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता।

दूरी का मामला केवल एक खसरे तक सीमित नहीं

मूल भूमि और प्रस्तावित भूखंड के बीच दूरी को लेकर उठ रहे सवालों पर भाजपा नेता ने कहा कि खसरा नंबर 658/2 का मामला अकेला उदाहरण नहीं है। उन्होंने खसरा नंबर 684/1, 684/5 और 681/1 का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मूल भूमियों के बदले प्रस्तावित प्लॉट नंबर 26 और 37 की दूरी भी मूल स्थल से अधिक है।

उनका कहना है कि इसलिए केवल एक मामले को आधार बनाकर योजना में पक्षपात या किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाना उचित नहीं है। योजना के अंतर्गत भूमि पुनर्गठन की प्रक्रिया व्यापक टाउन प्लान के अनुरूप की गई है।

सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया गया भूमि का पुनर्गठन

गोविंद गुप्ता ने कहा कि नगर विकास योजना में मूल भूमि के पुनर्गठन का एक प्रमुख कारण सार्वजनिक सुविधाओं के लिए स्थान उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्लॉट नंबर 26 की मूल भूमि पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) प्रस्तावित है। इसी तरह प्लॉट नंबर 30 की मूल भूमि पर सड़क एवं अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए अमेनिटीज प्रस्तावित की गई हैं।

उन्होंने कहा कि नगर विकास योजना में सड़क, जल निकासी, एसटीपी और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए भूमि का नियोजन आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया के तहत भूमि का पुनर्गठन किया गया है।

पूरी योजना का अध्ययन कर आरोप लगाए विपक्ष : गुप्ता

भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह पूरे टाउन प्लान और समान प्रकृति के मामलों का अध्ययन किए बिना चुनिंदा भूखंडों को आधार बनाकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि योजना के सभी प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों पर समान मापदंड लागू किए गए हैं।

गोविंद गुप्ता ने कहा कि नगर विकास योजना जैसे व्यापक नियोजन में अलग-अलग भूखंडों की स्थिति को पूरे नक्शे, सड़क व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और भूमि पुनर्गठन के संदर्भ में देखना आवश्यक है। उनका दावा है कि कचना-लाभांडी-सड्डू नगर विकास योजना में निर्धारित टाउन प्लानिंग नियमों और प्रक्रिया का पालन करते हुए भूखंडों का निर्धारण किया गया है।

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