अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के नाम पर तीन साल से नोटिसों का खेल!

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दो कलेक्टर बदले, कई अधिकारियों के तबादले, फिर भी ठोस कार्रवाई पर सवाल; स्वर्ण वाटिका समेत कई कॉलोनियों को लेकर शिकायतें, एफआईआर के निर्देश भी फाइलों में उलझे

मुंगेली। जिले में अवैध प्लाटिंग का कारोबार लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। नगर पालिका परिषद मुंगेली के शहरी क्षेत्र से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक बिना आवश्यक अनुमति कॉलोनी विकसित करने और प्लॉट काटकर बेचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन शिकायतों पर कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी करने, जांच कराने और संबंधित विभागों से पत्राचार की प्रक्रिया तो लगातार चलती रही, लेकिन मौके पर प्रभावी कार्रवाई कितनी हुई, इसे लेकर अब भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

बीते करीब तीन वर्षों के दौरान जिले में प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव हुए। दो कलेक्टरों का कार्यकाल पूरा हुआ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के तबादले भी हुए, लेकिन अवैध प्लाटिंग से जुड़े कई मामलों में अंतिम कार्रवाई की स्थिति को लेकर सवाल बने हुए हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद नोटिस जारी कर प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बावजूद यदि अवैध विकास कार्यों पर रोक नहीं लगती है, तो इसका सीधा असर उन आम लोगों पर पड़ता है जो अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदते हैं।

इन मामलों में पंडरिया रोड स्थित स्वर्ण वाटिका लंबे समय से चर्चा में रही है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इस कॉलोनी को लेकर नगर पालिका परिषद से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायतें पहुंचीं। परिषद स्तर पर भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए गए और नगर पालिका की ओर से संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किए गए। बावजूद इसके, नोटिस के बाद मौके पर वास्तविक स्थिति क्या रही और प्रशासन ने आगे कौन-कौन से कदम उठाए, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होना अभी भी जरूरी है।

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स्वर्ण वाटिका को लेकर 2024 में हुई थी शिकायत

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 16 जनवरी 2024 को पार्षद मोहित बंजारा सहित नगरवासियों की ओर से नगर पालिका प्रशासन को शिकायत सौंपी गई थी। शिकायत में स्वर्ण वाटिका सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में हो रही कथित अवैध प्लाटिंग की जांच की मांग की गई थी।

शिकायत में पंडरिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे नाले के पास विकसित की जा रही स्वर्ण वाटिका का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया था कि संबंधित भूमि पर आवश्यक अनुमति के बिना प्लॉट काटे जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कॉलोनी में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली, गार्डन सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जा रही थी, लेकिन नियमानुसार सुविधाओं के विकास को लेकर सवाल उठ रहे थे।

शिकायत में यह भी आशंका जताई गई थी कि यदि बिना आवश्यक स्वीकृति के कॉलोनी विकसित की जाती है तो भविष्य में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को बैंक ऋण, भवन निर्माण की अनुमति तथा सड़क, नाली, बिजली और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित भूमि की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की थी।

15 फरवरी को पहला नोटिस, 27 फरवरी को अंतिम सूचना

नगर पालिका परिषद से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार स्वर्ण वाटिका मामले में 15 फरवरी 2024 को पहला नोटिस जारी किया गया था। यह नोटिस निहारिका, पुत्री राजेंद्र कुमार, निवासी मुंगेली के नाम से जारी होना बताया गया है।

नोटिस में वार्ड क्रमांक 13, अंबेडकर वार्ड, पंडरिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे नाले के पास खसरा नंबर 773/1, रकबा 2.314 हेक्टेयर भूमि पर स्वर्ण वाटिका के नाम से बिना शासन की अनुमति के कथित अवैध प्लाटिंग किए जाने की शिकायत का उल्लेख किया गया था।

नगर पालिका ने संबंधित पक्ष को सात दिनों के भीतर प्लाटिंग का कार्य बंद करने तथा कॉलोनाइजर लाइसेंस सहित भूमि से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। नोटिस में यह भी कहा गया था कि निर्धारित समय में निर्देशों का पालन नहीं होने की स्थिति में अवैध प्लाटिंग हटाने तथा नगर पालिका अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसके बाद 27 फरवरी 2024 को अंतिम सूचना जारी की गई। इसमें पूर्व में जारी नोटिस का हवाला देते हुए पटवारी के प्रतिवेदन के आधार पर स्थल पर अवैध प्लाटिंग से संबंधित संरचनाएं निर्मित होने की बात कही गई थी। संबंधित पक्ष को सात दिनों के भीतर प्लाटिंग बंद कर भूमि को मूल स्वरूप में लाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही निर्देशों का पालन नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई और कार्रवाई में होने वाले खर्च की वसूली संबंधित पक्ष से किए जाने की चेतावनी दी गई थी।

हालांकि, इन नोटिसों के बाद मौके पर वास्तविक रूप से क्या कार्रवाई हुई, भूमि को मूल स्वरूप में लाने के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं और संबंधित मामले में अंतिम निर्णय क्या हुआ, यह महत्वपूर्ण जानकारी अब भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

पुलिस बल के साथ कार्रवाई की तैयारी भी हुई

अवैध प्लाटिंग को लेकर नगर पालिका परिषद के दस्तावेजों में 15 मई 2026 को सिटी कोतवाली थाना प्रभारी को भेजा गया पत्र भी सामने आता है। इसमें नगर के शहरी क्षेत्र में हो रही अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

पत्र में छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 (ग) का उल्लेख करते हुए कॉलोनी स्थापित करने के उद्देश्य से भूमि को भूखंडों में विभाजित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। नगर पालिका की ओर से 16 मई 2026 को सुबह 7 बजे से कार्रवाई प्रस्तावित होने की जानकारी देते हुए आवश्यक पुलिस बल और महिला कांस्टेबल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

अब इस पूरे मामले में यह जानना महत्वपूर्ण है कि पुलिस बल की मांग के बाद प्रस्तावित कार्रवाई वास्तव में हुई या नहीं। यदि कार्रवाई हुई तो कितने स्थलों पर हुई, कितनी भूमि पर अवैध विकास हटाया गया और कितने मामलों में एफआईआर अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई की गई। वहीं यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसके पीछे क्या कारण रहे, यह भी संबंधित विभागों से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

जनवरी 2026 में चार लोगों को फिर नोटिस

अवैध प्लाटिंग के मामलों में नगर पालिका परिषद की ओर से 5 जनवरी 2026 को जारी एक अन्य नोटिस भी सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार यह नोटिस राधेश्याम राजपूत, वीरेंद्र कुमार सोनी, प्रदीप सिंह और अरविंद कुमार देवांगन को जारी किया गया था।

नोटिस में मुंगेली-पंडरिया मार्ग पर विकसित की जा रही एक कॉलोनी को बिना स्वीकृत लेआउट और आवश्यक अनुमति के विकसित किए जाने का उल्लेख किया गया था। नगर पालिका ने इसे छत्तीसगढ़ नगर पालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निबंधन तथा शर्तें) नियम 2013 और छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की संबंधित धाराओं का उल्लंघन बताया था।

संबंधित लोगों को 15 दिनों के भीतर निर्माण एवं विकास कार्य बंद करने और निर्मित संरचनाओं को हटाने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में निर्देशों का पालन नहीं होने पर निर्माण सामग्री जब्त करने, विधिसम्मत कार्रवाई करने और आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चेतावनी भी दी गई थी।

नोटिस की प्रतिलिपि कलेक्टर, संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश बिलासपुर, विद्युत विभाग, एसडीएम, तहसीलदार, नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष और पंजीयन कार्यालय को भेजे जाने का उल्लेख है। इससे यह संकेत मिलता है कि अवैध प्लाटिंग के मामलों को लेकर विभिन्न स्तरों पर पत्राचार और प्रशासनिक प्रक्रिया चलती रही है।

उपमुख्यमंत्री की सख्ती के बीच स्थानीय कार्रवाई पर सवाल

प्रदेश में अवैध प्लाटिंग और अवैध कॉलोनियों को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा विभिन्न अवसरों पर अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आती रही है। ऐसे में मुंगेली जिले में लगातार शिकायतों और नोटिसों के बावजूद कार्रवाई की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं होने से स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

यह सवाल अब प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है कि शिकायत मिलने के बाद नोटिस जारी करने के आगे की प्रक्रिया कहां तक पहुंचती है। क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कार्रवाई लंबित रहती है, क्या कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन आती है अथवा अन्य कोई प्रशासनिक कारण है—इसकी स्थिति संबंधित विभागों द्वारा स्पष्ट की जानी चाहिए।

तीन साल की प्रक्रिया के बाद अब जवाबदेही का सवाल

अवैध प्लाटिंग के मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि कोई भूमि बिना अनुमति कॉलोनी के रूप में विकसित की जा रही है, तो शुरुआती स्तर पर ही उस पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लगती। शिकायत के बाद नोटिस जारी होने और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद यदि निर्माण एवं प्लाटिंग गतिविधियां जारी रहती हैं, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि पिछले करीब तीन वर्षों में कई शिकायतें सामने आईं, नोटिस जारी हुए, अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण और जांच की, पुलिस बल की मांग तक की गई, लेकिन इसके बाद कार्रवाई की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। ऐसे में अब केवल नोटिस जारी करने की प्रक्रिया के बजाय मामलों के अंतिम निराकरण और की गई कार्रवाई का सार्वजनिक रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।

प्लॉट खरीदने वालों पर सबसे बड़ा असर

अवैध प्लाटिंग का सबसे बड़ा असर उन आम नागरिकों पर पड़ता है जो अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर जमीन खरीदते हैं। कॉलोनी विकसित करते समय सड़क, नाली, बिजली, पेयजल, जल निकासी और अन्य सुविधाओं का भरोसा दिया जाता है, लेकिन यदि कॉलोनी का विकास निर्धारित स्वीकृतियों और नियमों के अनुरूप नहीं हुआ हो तो बाद में इन्हीं सुविधाओं को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है।

ऐसे मामलों में प्लॉट खरीदने से पहले नागरिकों के लिए भूमि की स्थिति, स्वीकृत लेआउट, कॉलोनाइजर की वैधता और संबंधित विभागों की अनुमति की जानकारी लेना महत्वपूर्ण है। वहीं प्रशासन के स्तर पर भी यह अपेक्षा रहती है कि अवैध प्लाटिंग की शिकायतों पर समयबद्ध जांच के साथ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि आम नागरिकों को बाद में परेशानी का सामना न करना पड़े।

अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से चल रही नोटिस और जांच की प्रक्रिया के बाद प्रशासन अवैध प्लाटिंग से जुड़े मामलों में अंतिम कार्रवाई का रिकॉर्ड कब सार्वजनिक करता है और जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति क्या रहती है।

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