अपूर्ण एवं अपंजीकृत परियोजना पर CG-RERA की सख्त कार्रवाई, प्रमोटर को आबंटी को 6.87 लाख रुपये ब्याज भुगतान करने का आदेश

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पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक आबंटी को प्रतिमाह 7,314 रुपये का भी करना होगा भुगतान

बिना रेरा पंजीयन परियोजना विकसित करने पर प्रमोटर के विरुद्ध धारा 59 के तहत पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश

भूखंड विक्रय के बाद भी विकास कार्य और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रमोटर की जिम्मेदारी : CG-RERA

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रायपुर । छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने भू-संपदा परियोजनाओं में आबंटियों के हितों की सुरक्षा और रेरा अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने रायपुर जिले के सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना के विकास कार्य अपूर्ण रहने तथा पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने के मामले में प्रमोटर को आबंटी के पक्ष में 6 लाख 87 हजार 496 रुपये ब्याज राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक प्रतिमाह 7 हजार 314 रुपये ब्याज भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।

प्राधिकरण द्वारा प्रकरण की सुनवाई के दौरान पाया गया कि संबंधित परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप विकास कार्य पूर्ण नहीं किए गए हैं। साथ ही सक्षम प्राधिकारी से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया है। इन तथ्यों के आधार पर प्राधिकरण ने परियोजना को अपूर्ण एवं चालू परियोजना की श्रेणी में मानते हुए भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के अंतर्गत विलंब के लिए ब्याज भुगतान का आदेश पारित किया है।

वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए ब्याज भुगतान का आदेश

प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, प्रमोटर को आबंटी द्वारा भुगतान की गई 8 लाख 12 हजार 643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के आधार पर कुल 6 लाख 87 हजार 496 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही 1 नवंबर 2026 से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक आबंटी को प्रतिमाह 7 हजार 314 रुपये की राशि का भुगतान करना होगा।

बिना पंजीयन परियोजना विकसित करने पर पृथक कार्रवाई के निर्देश

प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले को भी गंभीरता से लिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भू-संपदा अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत पात्र परियोजनाओं का पंजीयन अनिवार्य है। इसके बावजूद संबंधित परियोजना का पंजीयन नहीं कराए जाने पर प्रमोटर के विरुद्ध अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

भूखंड बेचने मात्र से समाप्त नहीं होती प्रमोटर की जिम्मेदारी

प्राधिकरण के इस आदेश से स्पष्ट है कि किसी परियोजना में भूखंडों का विक्रय कर देने मात्र से प्रमोटर की वैधानिक जिम्मेदारियां समाप्त नहीं हो जाती हैं। स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप सड़क, नाली, विद्युत, पेयजल सहित निर्धारित विकास कार्यों और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना प्रमोटर का दायित्व है।

CG-RERA द्वारा पारित यह आदेश भू-संपदा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और आबंटियों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश भी मिलता है कि परियोजनाओं के विकास में अनावश्यक विलंब तथा रेरा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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