धान खरीदी से पहले नक्शा-खसरा दुरुस्त करने में जुटा प्रशासन, 31 अक्टूबर तक पंजीयन पूरा कराने का लक्ष्य

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मुंगेली । धान खरीदी की तैयारी के बीच किसानों के नक्शा-अंकन, बंटांकन और एग्रीस्टैक पंजीयन को लेकर प्रशासन ने प्रक्रिया तेज कर दी है। जिन किसानों के खेतों का नक्शा-अंकन या बंटांकन अब तक नहीं हुआ है, उनके खेतों का पॉलीगॉन जनरेशन के माध्यम से चिन्हांकन कर पंजीयन पूरा कराने की तैयारी की जा रही है। एसडीएम माया नंद चंद्रा ने किसानों से अपील की है कि वे अपने गांव में नियुक्त सर्वेयर और कोटवार से संपर्क कर खेतों का चिन्हांकन कराएं, ताकि धान बेचने के समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

24 अक्टूबर 2026 की विभागीय प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले की छह तहसीलों में कुल 72,080 धान खसरे दर्ज हैं। इनमें से अब तक 6,336 खसरों का पॉलीगॉन जनरेशन किया गया है, जबकि 65,744 खसरों का कार्य शेष है। इस तरह जिले में कुल प्रगति 8.79 प्रतिशत दर्ज की गई है। निर्धारित समयसीमा में शेष कार्य पूरा करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।

सरगांव तहसील में सबसे अधिक प्रगति, मुंगेली में काम धीमा

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उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सरगांव तहसील में पॉलीगॉन जनरेशन का काम सबसे अधिक 66.20 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यहां कुल 6,094 धान खसरों में से 4,034 का चिन्हांकन किया गया है और 2,060 खसरे शेष हैं।

वहीं, मुंगेली तहसील में कुल 19,707 खसरों में से केवल 155 का पॉलीगॉन जनरेशन हुआ है। यहां 19,552 खसरे शेष हैं और प्रगति 0.79 प्रतिशत दर्ज की गई है। लोरमी तहसील में 18,912 खसरों में से 433 का कार्य पूरा हुआ है, जबकि 18,479 खसरे शेष हैं। इसी तरह जरहागांव में 7,198 में से 318, लालपुर थाना तहसील में 9,001 में से 820 तथा पथरिया तहसील में 11,168 में से 576 खसरों का पॉलीगॉन जनरेशन किया गया है।

आंकड़े बताते हैं कि तहसीलों के बीच प्रगति में काफी अंतर है। ऐसे में शेष कार्य को गति देने और समय पर किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करने के लिए मैदानी स्तर पर समन्वय जरूरी है।

खेत का चिन्हांकन कराएं, पंजीयन में मिलेगी मदद

एसडीएम माया नंद चंद्रा ने कहा कि जिन किसानों के खेतों का नक्शा-अंकन या बंटांकन नहीं हुआ है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। गांवों में सर्वेयर नियुक्त किए गए हैं। किसान कोटवार और सर्वेयर से संपर्क कर अपने खेत की पहचान कराएं, ताकि पॉलीगॉन जनरेशन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

उन्होंने बताया कि जिन किसानों के खेतों का चिन्हांकन अब तक नहीं हुआ है, उनके लिए मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। सर्वेयर खेत की वास्तविक स्थिति देखकर आवश्यक जानकारी दर्ज करेंगे। किसानों से आग्रह किया गया है कि वे अपने खेत की सही पहचान बताकर इस कार्य में सहयोग करें।

एक बार पंजीयन होने पर बार-बार पंजीयन की जरूरत नहीं

एसडीएम ने बताया कि जिन किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वे धान विक्रय के लिए सक्षम हैं। जिन किसानों का पंजीयन अभी अधूरा है, उनके लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि किसान अपने खेत का चिन्हांकन कराएं, जिससे उनका पंजीयन पूरा हो सके। पंजीयन पूरा होने के बाद सामान्यतः बार-बार नए सिरे से पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होती। किसानों को अपनी पंजीयन स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग से कर लेनी चाहिए।

31 अक्टूबर तक पंजीयन पूरा कराने का लक्ष्य

प्रशासन ने शेष किसानों का धान पंजीयन 31 अक्टूबर तक पूरा कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सर्वेयरों, कोटवारों और किसानों के बीच समन्वय स्थापित कर काम किया जा रहा है। एसडीएम ने सभी किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपने खेतों का चिन्हांकन कराएं और सर्वेक्षण दल को आवश्यक सहयोग दें।

धान खरीदी के पहले भूमि अभिलेखों का सही मिलान और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे नक्शा-अंकन या बंटांकन की स्थिति लंबित होने पर अपने गांव के संबंधित सर्वेयर से संपर्क करें, ताकि समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी की जा सके और धान विक्रय में अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।

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