वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण की रणनीतियों पर राज्यों ने साझा किए अनुभव

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GFATM राज्यों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में मलेरिया उन्मूलन, निगरानी और प्रभावी कार्यप्रणालियों पर मंथन

रायपुर । राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत GFATM राज्यों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक (IMEP-3) का आयोजन 28 से 30 सितंबर 2026 तक छत्तीसगढ़ में किया जा रहा है। बैठक में GFATM के अंतर्गत शामिल विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर के विशेषज्ञ, WHO के प्रतिनिधि तथा कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य राज्यों में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण गतिविधियों की समीक्षा के साथ विभिन्न राज्यों की प्रभावी कार्यप्रणालियों, मैदानी अनुभवों और नवाचारों को साझा करना है, ताकि मलेरिया सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

स्वास्थ्य सेवाओं के आयुक्त-सह-संचालक श्री संजीव कुमार झा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में मलेरिया के मामलों में वृद्धि स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है और पिछले दस वर्षों में राज्य में मलेरिया के मामलों में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह देश ने पोलियो उन्मूलन की उपलब्धि हासिल की और कोविड-19 जैसी चुनौती का स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने मिलकर सामना किया, उसी भावना के साथ अब मलेरिया उन्मूलन के लिए भी सभी को साथ खड़े होकर काम करना होगा।

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श्री झा ने कहा कि GFATM राज्यों की यह बैठक एक-दूसरे से सीखने और बेहतर कार्यप्रणालियों को समझने का महत्वपूर्ण मंच है। विभिन्न राज्यों में मलेरिया उन्मूलन के लिए क्या बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं, उन्हें जानने और अपने अनुभव साझा करने का यह अच्छा अवसर है। बैठक में शामिल विशेषज्ञों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों और मैदानी कार्यकर्ताओं के अनुभवों से भी सीखने का अवसर मिलेगा, जो मलेरिया उन्मूलन की आगामी रणनीति को और मजबूत करने में उपयोगी होगा।

बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र, नई दिल्ली के अपर संचालक डॉ. प्रणब ज्योति भुइयां ने कहा कि वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दिशा में राज्यों के सतत प्रयास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले वर्ष की तुलना में मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जो राज्य में किए जा रहे प्रभावी प्रयासों को दर्शाता है।

उत्कृष्ट मैदानी कार्य करने वाले स्वास्थ्यकर्मी हुए सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान मलेरिया एवं वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण के लिए मैदानी स्तर पर निरंतर कार्य कर रहे फील्ड वर्कर्स, मितानिन प्रशिक्षकों, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इन स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समुदाय के बीच जागरूकता, समय पर जांच एवं उपचार, सर्विलांस तथा मलेरिया नियंत्रण की विभिन्न गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के विशेषज्ञों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में इन कर्मियों का सम्मान मैदानी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को पहचान देने के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को भी बेहतर कार्य के लिए प्रोत्साहित करने वाला रहा।

बैठक में क्षेत्रीय कुष्ठ प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RLTRI), रायपुर के क्षेत्रीय संचालक डॉ. संदीप जोगदंड, आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च फॉर ट्राइबल हेल्थ (ICMR-NIRTH), जबलपुर के संचालक डॉ. प्रवीण कुमार भारती तथा राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. घनाराम रावटे सहित संबंधित अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

तीन दिवसीय बैठक में राज्यों द्वारा मलेरिया सहित वेक्टर जनित रोगों की निगरानी, सर्विलांस, समय पर जांच एवं उपचार, वेक्टर नियंत्रण, मैदानी गतिविधियों तथा समुदाय की भागीदारी से संबंधित अनुभव साझा किए जा रहे हैं। साथ ही, विभिन्न राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों को समझते हुए उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने और वर्ष 2030 के मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देने पर जोर दिया जा रहा है।

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