सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी: डबरी ने सिंचाई की चिंता की कम, मछली पालन से जोशमनि के परिवार को मिली अतिरिक्त आमदनी की राह
बकिरमा में 2.99 लाख रुपये की लागत से बनी आजीविका डबरी में सहेजा जा रहा बरसाती पानी

खेती की सिंचाई के साथ मछली पालन की शुरुआत, बिक्री से होने वाली आय को इसी काम में लगाकर आगे बढ़ने की तैयारी

जल संरक्षण से खेती को सहारा, आजीविका का नया जरिया मिलने से परिवार में उत्साह
रायपुर । खेत में बनी छोटी सी डबरी सरगुजा जिले की श्रीमती जोशमनि एक्का के परिवार के लिए दोहरी उम्मीद लेकर आई है। बरसात का जो पानी पहले बहकर निकल जाता था, वह अब खेत में बनी डबरी में सहेजा जा रहा है। इस पानी का उपयोग खेती की सिंचाई में होने के साथ परिवार ने डबरी में मछली पालन भी शुरू कर दिया है। इस तरह जल संरक्षण की यह संरचना खेती को सहारा देने के साथ अतिरिक्त आमदनी की नई राह भी तैयार कर रही है।
अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत बकिरमा निवासी श्रीमती जोशमनि एक्का के खेत में उनके पति के नाम से ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 2 लाख 99 हजार रुपये की लागत से आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए जोशमनि बताती हैं कि डबरी बनने से परिवार को खेती और मछली पालन, दोनों में लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
बरसात का पानी अब खेत में ही सहेजा जा रहा
पहले खेत में बरसाती पानी को संग्रहित करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। डबरी बनने के बाद बारिश का पानी इसमें एकत्र हो रहा है, जिसका आवश्यकता के समय खेती की सिंचाई में उपयोग किया जा सकता है। खेत में ही जल संग्रहण की सुविधा मिलने से परिवार को सिंचाई में सहूलियत मिली है और आगे खेती का दायरा बढ़ाने की उम्मीद भी जगी है।
जोशमनि बताती हैं कि योजना से मिली सहायता का उपयोग करते हुए परिवार डबरी को बहुउपयोगी बना रहा है। एक ओर इसका पानी खेती के काम आ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी जलस्रोत में मछली पालन शुरू कर आजीविका का नया विकल्प तैयार किया गया है।
मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद
डबरी में मछली पालन शुरू होने से परिवार के लिए अतिरिक्त आय की संभावना बनी है। मछलियां तैयार होने के बाद परिवार अपनी जरूरत के लिए उनका उपयोग करने के साथ बिक्री भी करेगा। मछली बिक्री से मिलने वाली राशि को दोबारा इसी गतिविधि में लगाकर मछली पालन को आगे बढ़ाने की योजना है।
पहले परिवार के पास मछली पालन के लिए आवश्यक जलस्रोत उपलब्ध नहीं था। डबरी बनने के बाद पहली बार उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया है। खेती के साथ आय का एक और माध्यम जुड़ने से परिवार में उत्साह है।
माता-पिता से लेकर बच्चों तक, पूरे परिवार में उत्साह
जोशमनि बताती हैं कि डबरी बनने और उसमें मछली पालन शुरू होने से पूरे परिवार में खुशी है। परिवार के सदस्य भी मछली पालन में रुचि ले रहे हैं और बच्चे भी मछलियां लाकर डबरी में छोड़ते हैं। शासन से मिली सहायता के साथ परिवार अपने स्तर पर भी इस गतिविधि को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
जोशमनि ने कहा कि डबरी से उन्हें सिंचाई की सुविधा मिलने के साथ आमदनी बढ़ाने का एक नया जरिया मिला है। उन्होंने इस सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
बकिरमा की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि खेत में जल संरक्षण के लिए तैयार छोटी संरचना भी ग्रामीण परिवार की आजीविका में बड़ा सहारा बन सकती है। डबरी में सहेजा गया बरसाती पानी खेती की जरूरत पूरी करने में मदद कर रहा है, वहीं उसी जलस्रोत में मछली पालन से परिवार अतिरिक्त आमदनी की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

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