एनटीपीसी ने परमाणु बिजली परियोजनाओं के लिए तीन स्थलों को किया चिह्नित, 12 हजार मेगावाट तक क्षमता की तैयारी

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नई दिल्ली | भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी (NTPC) देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी ने मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा में परमाणु बिजली परियोजनाओं के लिए तीन संभावित स्थलों की पहचान की है। इन स्थलों पर 2,000 से 4,000 मेगावाट तक की क्षमता वाली परियोजनाएं स्थापित करने की संभावना है। सभी परियोजनाओं को मिलाकर प्रस्तावित क्षमता 6,000 से 12,000 मेगावाट यानी 6 से 12 गीगावाट तक हो सकती है।

मध्य प्रदेश के बसई सहित तीन स्थानों पर नजर

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित स्थलों में मध्य प्रदेश का बसई, बिहार का बांका और ओडिशा का नबरंगपुर शामिल हैं। इन स्थलों पर परियोजनाओं की स्थापना से पहले तकनीकी व्यवहार्यता, आवश्यक संसाधनों और संबंधित मंजूरियों का आकलन किया जा रहा है। परमाणु ऊर्जा आयोग के समक्ष स्थलों से जुड़ी विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट भी प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है।

विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग की तैयारी

एनटीपीसी परमाणु रिएक्टर तकनीक के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है। इनमें फ्रांस की ईडीएफ, रूस की रोसाटॉम तथा अमेरिका की वेस्टिंगहाउस और होल्टेक जैसी कंपनियां शामिल हैं। तकनीक हस्तांतरण, भारत में उपकरणों और तकनीक का स्थानीयकरण तथा परमाणु ईंधन की उपलब्धता जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

NTPC World Environment Day

वर्ष 2047 तक 30 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य

एनटीपीसी ने वर्ष 2047 तक लगभग 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। यह केंद्र सरकार के वर्ष 2047 तक देश की कुल परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता 100 गीगावाट तक पहुंचाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। इसके लिए कंपनी ने एनटीपीसी परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड नाम से अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भी स्थापित की है।

इसके अलावा, राजस्थान के माही बांसवाड़ा में 2,800 मेगावाट की परमाणु बिजली परियोजना पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। यह परियोजना एनटीपीसी और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित की जा रही है।

महत्वपूर्ण बात: तीनों नए स्थलों पर परियोजनाओं की अंतिम स्थापना को अभी स्वीकृत परियोजना मानना उचित नहीं होगा। क्षमता और निर्माण संबंधी योजनाएं संबंधित अनुमतियों, तकनीकी आकलन और अंतिम निर्णयों पर निर्भर करेंगी।

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