फर्जी जाति प्रमाण पत्र से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का आरोप, दो के खिलाफ एफआईआर
कूटरचित दस्तावेजों से प्रमाण पत्र बनवाने और अंत्यावसायी विभाग में कथित तौर पर गलत शपथ पत्र देने का मामला, जांजगीर पुलिस ने शुरू की जांच
जांजगीर-चांपा। फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर शासन की योजनाओं का अनुचित लाभ लेने के कथित मामले में जांजगीर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों की पहचान जितेंद्र बघेल और बैजनाथ बघेल, दोनों निवासी जांजगीर, के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, मामले में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तहसील जांजगीर से जाति और आय प्रमाण पत्र प्राप्त करने तथा जिला अंत्यावसायी विभाग में कथित रूप से गलत शपथ पत्र प्रस्तुत करने के आरोप हैं। पुलिस ने भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।

पहचान छिपाकर प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप
जांजगीर-चांपा पुलिस की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जितेंद्र बघेल पर अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर स्वयं को ग्राम मसान निवासी फूल सिंह कंवर का पुत्र दर्शाने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि उसने कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तहसील जांजगीर से जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र प्राप्त किए।

मामले की शिकायत के अनुसार, इन प्रमाण पत्रों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ लेने की बात सामने आई है। पुलिस अब दस्तावेजों की सत्यता और प्रमाण पत्र प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
बैंक ऋण और शपथ पत्र को लेकर भी सवाल
शिकायत में जिला अंत्यावसायी विभाग में प्रस्तुत शपथ पत्र का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि जितेंद्र बघेल ने शपथ पत्र में यह बताया था कि उसने बैंक से किसी प्रकार का ऋण नहीं लिया है, जबकि शिकायत के मुताबिक उसने पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लिया था।
इसके अलावा, अंत्यावसायी सहकारी समिति से ऋण लेने के दौरान बैजनाथ बघेल को जमानतदार बनाए जाने की जानकारी भी शिकायत में दी गई है। शिकायतकर्ता की ओर से बैजनाथ बघेल को जितेंद्र बघेल का जैविक पिता बताया गया है। इन तथ्यों के आधार पर दोनों के बीच कथित मिलीभगत से दस्तावेज तैयार कराने और शासन की योजनाओं का अनुचित लाभ लेने का आरोप लगाया गया है।
छह धाराओं के तहत मामला दर्ज
पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर जितेंद्र बघेल और बैजनाथ बघेल के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी, कूटरचना, कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग और साझा मंशा से संबंधित आरोप शामिल हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों, बैंक ऋण से जुड़े रिकॉर्ड और विभाग में दिए गए शपथ पत्र की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने आरोपों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले में जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
