प्रसूता के पहुंचने पर अस्पताल से नदारद मिली स्टाफ नर्स, तत्काल प्रभाव से निलंबित

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रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के दौरान लापरवाही का मामला, कलेक्टर ने जिले के अस्पतालों की सतत निगरानी के दिए निर्देश

बलरामपुर। मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए विकासखंड राजपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतपुर में पदस्थ स्टाफ नर्स अपूर्वा सिंह भदौरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची महिला के समय संबंधित स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद नहीं थीं। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच कराई, जिसमें स्टाफ नर्स की अनुपस्थिति और ड्यूटी में लापरवाही की बात सामने आई। इस घटना के बाद कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जिले के स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित निगरानी करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

प्रसव के लिए पहुंची महिला, ड्यूटी पर नहीं मिलीं नर्स

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को ग्राम कुंदीकला निवासी अनिता सिंह प्रसव के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतपुर पहुंचीं। उस समय अस्पताल में संबंधित स्टाफ की अनुपस्थिति का मामला सामने आया। जानकारी मिलने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 21 अक्टूबर को खंड चिकित्सा अधिकारी, राजपुर से जांच प्रतिवेदन मांगा।

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उसी दिन किए गए निरीक्षण में पाया गया कि सुबह की ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स निर्धारित समय पर अस्पताल में उपस्थित नहीं थीं। अस्पताल प्रभारी द्वारा फोन किए जाने के बाद स्टाफ नर्स वहां पहुंचीं। इसके बाद प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कर सुरक्षित प्रसव कराया गया।

विभाग के अनुसार, खंड चिकित्सा अधिकारी ने प्रसूता अनिता सिंह से स्वयं संपर्क कर उनकी स्थिति की जानकारी ली। प्रसूता और नवजात शिशु दोनों स्वस्थ हैं।

जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही की पुष्टि

स्वास्थ्य विभाग की जांच में स्टाफ नर्स अपूर्वा सिंह भदौरिया को प्रथम दृष्टया कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 10 दिनों के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय जांच में मामले से जुड़े तथ्यों और संबंधित कर्मचारी का पक्ष सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: कलेक्टर

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर के निर्देशानुसार, स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और खंड चिकित्सा अधिकारियों के साथ अनुविभागीय अधिकारियों तथा राजस्व अमले द्वारा भी की जाएगी। इसका उद्देश्य अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की नियमित समीक्षा करना है।

मातृ-शिशु सेवाओं पर विशेष जोर

कलेक्टर ने कहा कि जिले में कोई भी व्यक्ति आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। विशेष रूप से आपातकालीन उपचार और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। रेवतपुर की घटना के बाद विभागीय कार्रवाई और अस्पतालों की निगरानी के निर्देशों को इसी दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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