मुंगेली नगर पालिका में 194.14 लाख के स्टॉर्म वाटर ड्रेन की फाइल गायब! मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला, जांच और एफआईआर की मांग
खड़खड़िया नाले में निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल, आरटीआई में नहीं मिले प्राक्कलन, कार्यादेश, मूल्यांकन और भुगतान के पूरे दस्तावेज
नगर पालिका से केवल 62 पेज की जानकारी मिलने का दावा, शिकायतकर्ता ने कहा—करोड़ों के विकास कार्य की मुख्य नस्ती उपलब्ध नहीं होना गंभीर मामला

शिकायत में राज्य स्तरीय जांच टीम गठित करने, गायब फाइल का पता लगाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

मुंगेली। छत्तीसगढ़ में सरकारी विकास कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के दावों के बीच मुंगेली नगर पालिका परिषद से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। नगर पालिका क्षेत्र के खड़खड़िया नाले में लगभग 194.14 लाख रुपये यानी करीब 1 करोड़ 94 लाख रुपये की लागत से निर्मित स्टॉर्म वाटर ड्रेन के निर्माण कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज नगर पालिका कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि खड़खड़िया नाले में स्टॉर्म वाटर ड्रेन का निर्माण कार्य कराया गया, लेकिन इस निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी मांगने पर नगर पालिका की ओर से पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद केवल माप पुस्तिका और अधूरे बिल-वाउचर सहित कुल 62 पृष्ठों की जानकारी मिलने का दावा किया गया है। शेष दस्तावेज नगर पालिका कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने की बात बताई गई।
करीब 194.14 लाख रुपये के निर्माण कार्य से जुड़े प्राक्कलन, कार्यादेश, कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र, मूल्यांकन, सत्यापन, भुगतान और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों का उपलब्ध नहीं होना अब जांच का विषय बन गया है। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर प्रशासनिक मामला बताते हुए राज्य स्तरीय टीम से निर्माण कार्य की सूक्ष्म जांच कराने, मुख्य नस्ती का पता लगाने और यदि जांच में अनियमितता या आपराधिक कृत्य प्रमाणित हो तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
हालांकि, फिलहाल यह शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। दस्तावेजों के गायब होने, निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार या सरकारी राशि के दुरुपयोग की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
194.14 लाख रुपये का निर्माण कार्य, लेकिन दस्तावेजों की जानकारी अधूरी
शिकायत के अनुसार, मुंगेली नगर पालिका परिषद द्वारा खड़खड़िया नाले में स्टॉर्म वाटर ड्रेन का निर्माण लगभग 194.14 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। निर्माण कार्य का उद्देश्य नाले के माध्यम से वर्षा जल की निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना बताया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्य की लागत और उससे जुड़े आरोपों को देखते हुए परियोजना की पूरी जानकारी प्राप्त करना आवश्यक था। इसी उद्देश्य से नगर पालिका कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर निर्माण कार्य से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गईं।
आवेदन में स्पष्ट रूप से प्राक्कलन, कार्यादेश, कार्यपूर्णता, मूल्यांकन, सत्यापन, समस्त ऑर्डरशीट और भुगतान से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इन दस्तावेजों के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की जानी थी कि निर्माण कार्य किस स्वीकृत लागत पर कराया गया, किस एजेंसी या ठेकेदार को कार्य सौंपा गया, कार्य की समयसीमा क्या निर्धारित थी, निर्माण पूरा होने के बाद उसका मूल्यांकन किस प्रकार किया गया और भुगतान किस आधार पर किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, नगर पालिका से प्राप्त जानकारी में केवल निर्माण कार्य की माप पुस्तिका और अधूरे बिल-वाउचर शामिल थे। कुल 62 पृष्ठों की जानकारी उपलब्ध कराई गई, जबकि आवेदन में मांगे गए अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
यही स्थिति अब शिकायत का मुख्य आधार बन गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब किसी निर्माण कार्य पर लगभग दो करोड़ रुपये खर्च किए गए हों, तो उससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों का सुरक्षित संधारण और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।
आरटीआई आवेदन के बाद सामने आया दस्तावेजों का मामला
शिकायत में बताया गया है कि खड़खड़िया नाले में स्टॉर्म वाटर ड्रेन के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत नगर पालिका परिषद में आवेदन लगाया गया था।
आवेदन के माध्यम से निम्न जानकारी मांगी गई थी—
- स्टॉर्म वाटर ड्रेन निर्माण कार्य का स्वीकृत प्राक्कलन।
- निर्माण कार्य से संबंधित कार्यादेश और स्वीकृति के दस्तावेज।
- कार्य पूर्ण होने से संबंधित प्रमाणपत्र और अभिलेख।
- निर्माण कार्य का मूल्यांकन और सत्यापन।
- निर्माण कार्य से संबंधित समस्त ऑर्डरशीट।
- भुगतान से संबंधित सभी दस्तावेज और बिल-वाउचर।
- निर्माण कार्य की पूरी नस्ती की प्रमाणित प्रतियां।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन सभी दस्तावेजों की जानकारी मांगने के बावजूद नगर पालिका कार्यालय से पूरी जानकारी नहीं मिली। केवल माप पुस्तिका और अधूरे बिल-वाउचर उपलब्ध कराए गए।
इस मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि नगर पालिका द्वारा कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, कौन से दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए और उनके उपलब्ध नहीं होने का आधिकारिक कारण क्या बताया गया। यदि दस्तावेज किसी अन्य शाखा में हैं, तो उनका पता लगाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
मुख्य फाइल गायब होने का आरोप, जिम्मेदारी किसकी?
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि खड़खड़िया नाले में स्टॉर्म वाटर ड्रेन निर्माण कार्य की महत्वपूर्ण नस्ती नगर पालिका कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। शिकायत में इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा गया है कि निर्माण कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों का उपलब्ध नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
यदि निर्माण कार्य की पूरी फाइल वास्तव में गायब है, तो सबसे पहले यह पता लगाया जाना जरूरी है कि फाइल अंतिम बार किस शाखा में थी और उसे किस अधिकारी या कर्मचारी के सुपुर्द किया गया था।
इसके साथ ही यह भी जांच की जरूरत होगी कि फाइल के संधारण की जिम्मेदारी किसकी थी, निर्माण कार्य के दौरान किन-किन अधिकारियों ने निरीक्षण किया, मूल्यांकन और सत्यापन किस स्तर पर हुआ तथा भुगतान से संबंधित दस्तावेज किस शाखा में रखे गए थे।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि दस्तावेजों के उपलब्ध नहीं होने से निर्माण कार्य में हुई कथित अनियमितताओं की जानकारी छिप सकती है। हालांकि, फाइल के गायब होने के पीछे किसी की मिलीभगत या जानबूझकर दस्तावेज हटाने का आरोप जांच के बिना प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि मामला अभिलेखों के संधारण में लापरवाही का है, दस्तावेजों के स्थानांतरण का है या किसी अन्य कारण से फाइल उपलब्ध नहीं हो रही है।
निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप, गुणवत्ता की जांच की मांग
शिकायत में खड़खड़िया नाले पर निर्मित स्टॉर्म वाटर ड्रेन के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसमें खर्च की गई राशि को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत के अनुसार, निर्माण कार्य की पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों की मांग की गई थी, लेकिन सभी अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का परीक्षण नहीं हो पा रहा है।
अब इस मामले में निर्माण कार्य की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि स्वीकृत प्राक्कलन में किन कार्यों का उल्लेख था, वास्तविक निर्माण में कौन-कौन से कार्य किए गए, निर्माण में किस प्रकार की सामग्री का उपयोग हुआ और कार्य की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
इसके साथ ही माप पुस्तिका में दर्ज विवरणों का मौके पर किए गए निर्माण से मिलान, कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र की जांच, मूल्यांकन और भुगतान के अभिलेखों का परीक्षण भी आवश्यक होगा।
यदि जांच में निर्माण कार्य की मात्रा, गुणवत्ता, भुगतान या अन्य प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भुगतान और मूल्यांकन की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
करीब 194.14 लाख रुपये की लागत वाले निर्माण कार्य में भुगतान किस आधार पर किया गया, यह भी शिकायत का महत्वपूर्ण बिंदु है।
शिकायतकर्ता ने भुगतान से संबंधित समस्त दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। इनमें बिल-वाउचर, भुगतान की स्वीकृति, मूल्यांकन और सत्यापन से जुड़े अभिलेख शामिल थे।
लेकिन शिकायत के अनुसार, नगर पालिका से उपलब्ध कराई गई जानकारी में भुगतान से संबंधित पूरी नस्ती नहीं मिली। ऐसे में निर्माण कार्य के भुगतान की प्रक्रिया और उसकी वैधानिकता की जांच की मांग की गई है।
जांच के दौरान यह पता लगाया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य के लिए कुल कितनी राशि स्वीकृत की गई थी, कितनी राशि का कार्य किया गया, कितने बिल प्रस्तुत हुए और कितनी राशि का भुगतान किया गया। इसके अलावा, भुगतान से पहले तकनीकी मूल्यांकन और कार्य की गुणवत्ता का सत्यापन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
यदि भुगतान अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित वित्तीय शाखा, लेखा विभाग और निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर दस्तावेजों का पुनर्निर्माण किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री से शिकायत, राज्य स्तरीय जांच टीम बनाने की मांग
मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायत में मांग की गई है कि खड़खड़िया नाले में निर्मित स्टॉर्म वाटर ड्रेन के निर्माण कार्य की जांच स्थानीय स्तर तक सीमित न रखकर राज्य स्तरीय टीम से कराई जाए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्य की लागत लगभग 194.14 लाख रुपये है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। इसलिए जांच निष्पक्ष और विस्तृत तरीके से कराई जानी चाहिए।
शिकायत में प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी गई हैं—
- खड़खड़िया नाले में निर्मित स्टॉर्म वाटर ड्रेन की राज्य स्तरीय टीम से सूक्ष्म जांच कराई जाए।
- निर्माण कार्य की गायब बताई जा रही फाइल या नस्ती का पता लगाया जाए।
- प्राक्कलन, कार्यादेश, कार्यपूर्णता, मूल्यांकन, सत्यापन और भुगतान से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच की जाए।
- निर्माण कार्य की वास्तविक गुणवत्ता और मौके पर किए गए कार्य का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
- संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
- जांच में अनियमितता या आपराधिक कृत्य प्रमाणित होने पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
- जांच पूरी होने और आवश्यक कार्रवाई किए जाने तक खड़खड़िया नाले में अन्य निर्माण कार्य की स्वीकृति नहीं दी जाए।
जांच पूरी होने तक नए निर्माण पर रोक लगाने की मांग
शिकायतकर्ता ने खड़खड़िया नाले में अन्य निर्माण कार्यों की स्वीकृति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में मांग की गई है कि जब तक स्टॉर्म वाटर ड्रेन निर्माण कार्य से संबंधित शिकायत की जांच पूरी नहीं हो जाती और आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक नाले में अन्य निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान नहीं की जाए।
शिकायतकर्ता का तर्क है कि पहले पुराने निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति, दस्तावेजों की उपलब्धता और कथित अनियमितताओं की जांच होना जरूरी है। इसके बाद ही आगे के निर्माण कार्यों पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
हालांकि, किसी नए निर्माण कार्य पर रोक लगाने का निर्णय संबंधित तकनीकी आवश्यकता, जनहित, सुरक्षा और सक्षम प्राधिकारी के नियमों के अनुसार लिया जाना चाहिए। शिकायत में की गई मांग पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
नगर पालिका के अभिलेखों की जांच से खुल सकते हैं कई पहलू
इस मामले में नगर पालिका परिषद के अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी। निर्माण कार्य से संबंधित फाइल के अलावा लेखा शाखा, तकनीकी शाखा, कार्यादेश जारी करने वाली शाखा और भुगतान से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जा सकता है।
यदि मूल नस्ती उपलब्ध नहीं होती है, तो उसकी प्रतियां अन्य शाखाओं, संबंधित निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, तकनीकी अधिकारियों और भुगतान अभिलेखों से प्राप्त की जा सकती हैं।
जांच में यह भी पता लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई थी, कार्यादेश कब जारी हुआ, निर्माण कार्य कब शुरू और कब पूरा हुआ, निरीक्षण किसने किया और भुगतान के लिए किन अधिकारियों ने अनुमोदन दिया।
इसके अलावा, निर्माण कार्य के दौरान दर्ज माप, मौके पर उपलब्ध संरचना और भुगतान किए गए बिलों का मिलान करने से वास्तविक कार्य की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
खड़खड़िया नाले के स्टॉर्म वाटर ड्रेन निर्माण कार्य से जुड़ी शिकायत ने नगर पालिका के दस्तावेज संधारण और विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
यदि लगभग दो करोड़ रुपये के निर्माण कार्य की महत्वपूर्ण नस्ती कार्यालय में उपलब्ध नहीं है, तो यह पता लगाना आवश्यक होगा कि दस्तावेजों के संधारण में किस स्तर पर कमी हुई। वहीं, यदि दस्तावेज उपलब्ध हैं लेकिन आरटीआई आवेदन के जवाब में नहीं दिए गए, तो उसके कारण और संबंधित प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।
इस मामले में नगर पालिका प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। नगर पालिका को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माण कार्य की फाइल वर्तमान में कहां है, कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध हैं और शेष दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में क्या कदम उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता की मांग है कि मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदारी तय की जाए। वहीं, संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत के बाद अब इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर है। शिकायतकर्ता ने राज्य स्तरीय जांच, गायब फाइल का पता लगाने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भुगतान की जांच तथा दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
करीब 194.14 लाख रुपये के निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेजों का उपलब्ध नहीं होना और आरटीआई के तहत पूरी जानकारी नहीं मिलने का आरोप गंभीर प्रशासनिक जांच की मांग करता है। हालांकि, भ्रष्टाचार, सरकारी राशि के दुरुपयोग और फाइल जानबूझकर गायब करने जैसे आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
अब देखना होगा कि नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या निर्माण कार्य की पूरी नस्ती उपलब्ध कराई जाएगी? क्या तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाएगी? क्या दस्तावेजों के संधारण में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय होगी? और यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो क्या संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी?
फिलहाल खड़खड़िया नाले के स्टॉर्म वाटर ड्रेन निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की जांच ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है।






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