खैरासेतगंगा धाम समिति विवाद: शिक्षक शत्रुहन टोंडर के खिलाफ कलेक्टर, एसपी और डीईओ से शिकायत

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समिति पदाधिकारियों ने लगाए हस्तक्षेप के आरोप, सामुदायिक भवन निर्माण और पुराने समझौते को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग

मुंगेली। ग्राम खैरासेतगंगा स्थित गुरु घासीदास मंदिर एवं सेतगंगा धाम की समिति को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। मानव सतनाम कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने शिक्षक शत्रुहन टोंडर के खिलाफ मुंगेली कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम को शिकायत सौंपकर मामले की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। समिति पदाधिकारियों का आरोप है कि समिति के कामकाज में हस्तक्षेप और सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर अलग-अलग गतिविधियों से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित शिक्षक का पक्ष सामने आना बाकी है।

समिति के गठन और पंजीयन को लेकर विवाद

समिति पदाधिकारियों के अनुसार, खैरासेतगंगा धाम में पहले सतनामी कल्याण समिति और बाद में सतनाम मानव कल्याण समिति के नाम से सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं। सामाजिक बैठकों के माध्यम से अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों का चयन किया जाता था।

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पदाधिकारियों का कहना है कि मोती टोंडर के निधन के बाद शत्रुहन टोंडर को अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। इसके बाद समिति की बैठक में पंजीयन कराने का प्रस्ताव पारित हुआ और आवश्यक दस्तावेज उन्हें सौंपे गए। समिति के सदस्यों का आरोप है कि पंजीयन जनमानस कल्याण समिति के नाम से कराया गया। बाद में पंजीयन प्रमाणपत्र और नियमावली मांगे जाने पर कथित तौर पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ने की बात कही जा रही है।

सामाजिक बैठक में नई कार्यकारिणी के गठन का दावा

समिति पदाधिकारियों के मुताबिक, पंजीयन संबंधी विवाद के बाद सामाजिक बैठक में पूर्व समिति को भंग कर नई समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद समाज के वरिष्ठजनों, राजमहंतों और पदाधिकारियों ने भंडारपुरी धाम के राजा गुरु धर्मगुरु बालदास साहेब से नई समिति के गठन में मार्गदर्शन देने का अनुरोध किया।

समिति का दावा है कि धर्मगुरु बालदास साहेब की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में नई कार्यकारिणी का चयन किया गया। इसमें विधायक पुन्नूलाल मोहले, पूर्व विधायक चंद्रभान बारमते और चुरावन मंगेशकर सहित अन्य लोगों को संरक्षक बनाए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, मानिकलाल सोनवानी को अध्यक्ष, सुखचंद भास्कर को सचिव और देवचंद भास्कर को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात कही गई है। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि गठन की प्रक्रिया में समाज के लोगों की सहभागिता रही।

सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद

समिति पदाधिकारियों ने बताया कि 18 दिसंबर को मुख्यमंत्री के खैरासेतगंगा धाम आगमन के दौरान सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये और मेले के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये की घोषणा की गई थी। इसके बाद समिति ने मेले का आयोजन किया और पदाधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम से संबंधित आय-व्यय का विवरण समाज के सामने प्रस्तुत किया गया।

अब सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। समिति पदाधिकारियों का आरोप है कि शिक्षक शत्रुहन टोंडर ने कुछ लोगों के साथ अलग से बैठक कर भवन निर्माण और नई समिति के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे सामाजिक स्तर पर भ्रम और तनाव की स्थिति बन सकती है।

पुराने लिखित समझौते का हवाला

समिति पदाधिकारियों ने दावा किया कि संबंधित स्थल को लेकर पूर्व में सतनामी समाज और अन्य समाज के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। उनके अनुसार, उस समय कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय में लिखित समझौता हुआ था कि उक्त स्थान को धार्मिक कार्यक्रमों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा तथा वहां किसी भी समाज द्वारा निर्माण कार्य नहीं कराया जाएगा।

समिति का आरोप है कि अब इसी स्थल पर मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर विवाद उत्पन्न हो रहा है। पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि यदि पहले से इस स्थान को लेकर लिखित सहमति बनी थी, तो निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले पुराने समझौते और भूमि की स्थिति की जांच क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक शत्रुहन टोंडर पूर्व में समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए मौजूदा विवाद के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

मानव सतनाम कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम को शिकायत देकर पंजीयन संबंधी विवाद, समिति के कामकाज में कथित हस्तक्षेप तथा सामुदायिक भवन निर्माण से जुड़े मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पुराने लिखित समझौते, संबंधित भूमि के दस्तावेजों और समिति के पंजीयन अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

समिति ने समाज के लोगों से शांति और आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि विवाद का समाधान प्रशासनिक जांच और आपसी संवाद के माध्यम से होना चाहिए। अब मामले में प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। शिक्षक शत्रुहन टोंडर तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया मिलने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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