नारी शक्ति वन्दन अधिनियम मातृशक्ति के प्रति भाजपा की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण
भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व विधायक लता उसेण्डी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वन्दन’ संकल्प पर रखा भाजपा का पक्ष
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के आज आहूत विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वन्दन विधेयक’ (महिला आरक्षण) के अनुसमर्थन हेतु लाए गए शासकीय संकल्प पर सत्ता पक्ष की ओर से प्रथम वक्ता के रूप में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं विधायक सुश्री लता उसेण्डी ने प्रभावशाली संबोधन दिया। उन्होंने इस विधेयक को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय बताते हुए नारी शक्ति के सशक्तीकरण के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता को रेखांकित किया। भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व विधायक सुश्री उसेण्डी ने कहा कि दशकों से लम्बित महिला आरक्षण का सपना आज धरातल पर उतर रहा है। यह केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आधी आबादी को नीति-निर्धारण में समान भागीदारी सुनिश्चित करने वाला ‘युगांतकारी कदम’ है। सुश्री उसेण्डी ने बस्तर और छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे प्रदेश में महिलाएं सदैव निर्णय लेने की प्रक्रिया में अग्रणी रही हैं। इस विधेयक के माध्यम से अब छत्तीसगढ़ की बेटियों को विधानसभा और संसद में अपना नेतृत्व सिद्ध करने का व्यापक अवसर मिलेगा। ‘नारी शक्ति वन्दन अधिनियम’ मातृशक्ति के प्रति भाजपा की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह विधेयक महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयाँ प्रदान करेगा। अपने संबोधन में कांग्रेस के घोर महिला विरोधी चरित्र पर प्रहार करते हुए सुश्री उसेण्डी ने शाहबानो-प्रकरण की चर्चा भी विशेष रूप से की। सुश्री उसेण्डी ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लोकसभा में विधेयक लाकर कोर्ट के फैसले को उलटते हुए मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण प्राप्त करने के हक से वंचित कर दिया था। वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के आगे राजीव गांधी को झुकना पड़ा था। देश उस मामले को भूला नहीं है। पंचायतों में 33 प्रतशित महिला आरक्षण का श्रेय लेने के कांग्रेस के प्रयासों पर कटाक्ष करते हुए सुध्री उसेण्डी ने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को सिर्फ उतना ही दिया, जिससे उसे खतरा न हो, लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार ने पंचायतों में महिला आरक्षण को 2008 में 33 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था। सुश्री उसेण्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इस विषय पर केवल राजनीति की, जबकि वर्तमान नेतृत्व ने इसे “संकल्प से सिद्धि” तक पहुँचाया है। सुश्री उसेण्डी ने सदन के सभी सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस शासकीय संकल्प का सर्वसम्मति से समर्थन करने का आह्वान करते हुए विश्वास जताया कि जब प्रदेश की महिलाएँ सदन में अधिक संख्या में चुनकर आएंगीं, तो वे न केवल जनहित के मुद्दों को अधिक संवेदनशीलता से उठाएंगीं, बल्कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी अहम भूमिका भी निभाएंगीं।

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