पालक-बालक सम्मेलन बना बेटियों के सपनों की राह आसान करने का माध्यम

0
IMG-20260811-WA1170

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में संवेदनशील प्रशासन की मिसाल, मांग रखते ही सीता और गीता बैगा को मिला छात्रावास में प्रवेश

रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण और शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी सुशासन की भावना को जिला स्तर पर प्रभावी रूप से आगे बढ़ाते हुए पालक-बालक सम्मेलन अब केवल संवाद का मंच नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक समस्याओं के समाधान और बच्चों के बेहतर भविष्य की राह आसान करने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। इसी क्रम में गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले के ग्राम करंगरा, पंचायत धनौली निवासी श्रीमती संतोषी बैगा द्वारा धनौली में आयोजित पालक-बालक सम्मेलन में अपनी दोनों बेटियों सीता बैगा एवं गीता बैगा के लिए छात्रावास में प्रवेश दिलाने की मांग रखी गई थी। जिला प्रशासन ने उनकी आवश्यकता को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पहल की और दोनों छात्राओं को पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास, पेंड्रा में प्रवेश दिला दिया।

मां की चिंता दूर हुई, बेटियों की पढ़ाई को मिला नया सहारा श्रीमती संतोषी बैगा के लिए अपनी बेटियों की पढ़ाई को निरंतर जारी रखना एक बड़ी चिंता थी। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली बेटियों के लिए आवास की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण नियमित अध्ययन में कठिनाइयां आती थीं। पालक-बालक सम्मेलन में उन्होंने अपनी समस्या प्रशासन के समक्ष रखी और उनकी मांग पर त्वरित कार्रवाई होने से अब दोनों बेटियों के लिए शिक्षा की राह पहले से अधिक सुगम हो गई है।

NTPC World Environment Day

छात्रावास में प्रवेश मिलने से बेहतर भविष्य की दिशा में कदम छात्रावास में प्रवेश मिलने से सीता और गीता को अध्ययन के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण के साथ आवश्यक आवासीय सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली दोनों छात्राओं को नियमित रूप से पढ़ाई जारी रखने में सुविधा मिलेगी और वे अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगी।

प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता सीता और गीता बैगा को छात्रावास में मिला प्रवेश पालक-बालक सम्मेलन शासन और आमजन के बीच सीधे संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहे हैं। इन सम्मेलनों में पालकों की ओर से बच्चों की शिक्षा, छात्रावास, छात्रवृत्ति सहित विभिन्न आवश्यकताओं से जुड़ी मांगें एवं समस्याएं सामने आती हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन आवेदनों को प्राथमिकता से लेते हुए पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। सीता और गीता बैगा को छात्रावास में मिला प्रवेश इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं संवेदनशीलता और तत्परता के साथ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं, तो उनका असर सीधे बच्चों के भविष्य पर दिखाई देता है।

शिक्षा के साथ आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती बेटियां राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास जैसी सुविधाएं उनकी शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे प्रयास आर्थिक या भौगोलिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करते हैं और बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

सपनों को आकार देने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर सीता और गीता के लिए छात्रावास में प्रवेश केवल रहने की सुविधा नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई जारी रखने, सपनों को आकार देने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। जिला प्रशासन की त्वरित पहल ने एक परिवार की चिंता दूर करने के साथ ही बेटियों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगाई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार में सुशासन का उद्देश्य शासन की योजनाओं और सुविधाओं को अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचाना है। पालक-बालक सम्मेलन में सामने आई एक मांग का त्वरित निराकरण इसी संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था की झलक प्रस्तुत करता है। श्रीमती संतोषी बैगा ने अपनी दोनों बेटियों को छात्रावास में प्रवेश मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि बेटियों की पढ़ाई को लेकर उनकी चिंता अब दूर हो गई है। छात्रावास में प्रवेश मिलने से उनकी बेटियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel

Latest News

error: Content is protected !!