मदकू द्वीप में शांताराम सर्राफ को दी श्रद्धांजलि
प्रथम पुण्यतिथि पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने किया स्मरण, राष्ट्र और समाज के लिए उनके योगदान को बताया प्रेरणादायी
मुंगेली/ सरगांव । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम प्रांत प्रचारक रहे श्रद्धेय शांताराम सर्राफ की प्रथम पुण्यतिथि पर मदकू द्वीप की पावन धरती पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू शामिल हुए और शांताराम सर्राफ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके राष्ट्र, समाज और संगठन के लिए किए गए कार्यों को स्मरण किया गया।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि शांताराम सर्राफ ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने संगठनात्मक जीवन में सुदूर वनांचलों तक पहुंचकर कार्यकर्ताओं के निर्माण और संगठन के विस्तार के लिए निरंतर कार्य किया। उनके जीवन का प्रत्येक चरण सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा से जुड़ा रहा।

बस्तर से सरगुजा तक किया प्रवास
तोखन साहू ने बताया कि वर्ष 1963 में शांताराम सर्राफ ने दुर्ग जिला प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वर्ष 1967 में वे रायपुर विभाग प्रचारक बने। इस दौरान उन्होंने बस्तर से लेकर सरगुजा तक सुदूर वनांचलों में लगातार प्रवास किया और संगठन विस्तार के साथ कार्यकर्ता निर्माण का कार्य किया।

वर्ष 1989 में वे छत्तीसगढ़ के प्रथम प्रांत प्रचारक बने। बाद में मध्य क्षेत्र के संपर्क प्रमुख के रूप में भी उन्होंने कार्य किया। इस दौरान उन्होंने अनेक कार्यकर्ताओं को दिशा, संस्कार और संगठनात्मक दृष्टि प्रदान की। उनके कार्यकाल से जुड़े अनेक कार्यकर्ताओं ने उनके सरल व्यवहार और मार्गदर्शन को याद किया।
सादगी और आत्मीयता थी पहचान
साहू ने कहा कि शांताराम सर्राफ की पहचान सादगी, आत्मीयता, ईमानदारी और सेवा भावना से थी। वे प्रत्येक कार्यकर्ता के साथ पारिवारिक आत्मीयता रखते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने संगठन और समाज के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया।
आपातकाल के दौरान उनके संघर्ष और जेल यात्रा का उल्लेख करते हुए साहू ने कहा कि यह उनके राष्ट्रसमर्पण और दृढ़ संकल्प का महत्वपूर्ण अध्याय रहा। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने विचारों और राष्ट्रसेवा के मार्ग से समझौता नहीं किया।
मदकू द्वीप की धरोहरों से रहा विशेष जुड़ाव
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि मदकू द्वीप की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में भी शांताराम सर्राफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यहां प्राचीन शिवलिंगों की खोज और उनके संरक्षण के प्रयासों से उनका विशेष जुड़ाव रहा। धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले मदकू द्वीप के प्रति उनकी विशेष आस्था और रुचि रही।
उन्होंने बताया कि शांताराम सर्राफ की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार भी मदकू द्वीप की इसी पावन धरती पर किया गया। ऐसे में उनके लिए मदकू द्वीप से जुड़ी स्मृतियां और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
विचार और सेवा का आदर्श करता रहेगा प्रेरित
तोखन साहू ने कहा कि 5 सितंबर 2025 को शांताराम सर्राफ के देहावसान के बाद भी उनके विचार, सादगी, राष्ट्रनिष्ठा और सेवा का आदर्श समाज और कार्यकर्ताओं का निरंतर मार्गदर्शन करता रहेगा। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता की प्रेरणा देता रहेगा।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने शांताराम सर्राफ के व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की तथा उनके बताए सेवा और राष्ट्रहित के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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