मुंगेली में श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव, शोभायात्रा, श्री कृष्ण सजाओ प्रतियोगिता एवं सम्मान समारोह मे शामिल हूए केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू

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भगवान श्रीकृष्ण का जीवन संघर्ष, धैर्य, साहस और अधर्म पर धर्म की विजय की अमर गाथा: केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू

मुंगेली। मुंगेली में श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पावन अवसर पर शोभायात्रा, ‘श्री कृष्ण सजाओ प्रतियोगिता’ तथा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होकर केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

समारोह को संबोधित करते हुए साहू ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल एक उत्सव या आनंद का प्रतीक नहीं है, बल्कि उनका पूरा जीवन संघर्ष, धैर्य, साहस और अधर्म पर धर्म की विजय की अमर गाथा है। प्रभु का जन्म किसी भव्य राजमहल में नहीं, बल्कि कारागार की अंधेरी कोठरी में हुआ और जन्म लेते ही संकटों ने उन्हें घेर लिया। माता देवकी और पिता वसुदेव बंदी थे, तथा कंस ने नवजात श्रीकृष्ण को समाप्त करने के लिए पूतना, शकटासुर, तृणावर्त, बकासुर और अघासुर जैसे राक्षसों को भेजकर एक के बाद एक षड्यंत्र रचे। लेकिन हर विपत्ति को पार करते हुए श्रीकृष्ण और भी अधिक तेजस्वी बनकर सामने आए। यह दृश्य सिखाता है कि जीवन में चुनौतियां चाहे कितनी भी विकट हों, यदि संकल्प दृढ है, तो दुनिया की कोई शक्ति मार्ग से डिगा नहीं सकती। संकटों से भागना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर में बदलकर आगे बढ़ना ही वास्तविक पुरुषार्थ है।

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उन्होंने आगे कहा कि एक हाथ में प्रेम और समरसता बिखेरती बांसुरी, तो आवश्यकता पड़ने पर दूसरे हाथ में अन्याय का संहार करने वाला सुदर्शन चक्र ही श्रीकृष्ण का पूर्ण रूप है, जहाँ एक ओर वात्सल्य और करुणा है, वहीं दूसरी ओर धर्म और राष्ट्र रक्षा का अडिग संकल्प है।

महाभारत के युद्ध में प्रभु ने स्वयं अस्त्र न उठाकर अर्जुन का सारथी बनना स्वीकार किया और कुरुक्षेत्र की भूमि पर श्रीमद्भगवद्गीता का निष्काम कर्मयोग का अमर संदेश—”कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” दिया। जब अर्जुन कर्तव्यपथ से भ्रमित हुए, तब श्रीकृष्ण ने स्मरण कराया कि धर्म और अधर्म के मध्य धर्मयुद्ध होने पर सत्य और न्याय के पक्ष में पूरी दृढता से खड़े होना ही सबसे बड़ा कर्तव्य है।

वक्ता ने कहा कि आज जन्माष्टमी के पवित्र अवसर पर केवल उत्सव तक सीमित न रहकर प्रभु के विचारों को अपने आचरण में उतारना आवश्यक है। श्रीकृष्ण से निर्भीकता, कुशल नेतृत्व और कर्मयोग की प्रेरणा मिलती है तथा समाज में परस्पर प्रेम, भाईचारा और सामाजिक समरसता की सीख मिलती है। उनकी बांसुरी सद्भाव का पाठ पढ़ाती है, तो सुदर्शन चक्र यह संदेश देता है कि राष्ट्रहित और धर्म की रक्षा के लिए कभी भी समझौते की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में मंच से सभी ने मिलकर श्रीकृष्ण के नीति, नेतृत्व, धर्म और ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। साथ ही प्रार्थना की गई कि भगवान श्रीकृष्ण सभी को सद्बुद्धि प्रदान करें, क्षेत्र और देश में सुख-समृद्धि का विस्तार करें, और भारत को एक विकसित, समर्थ और संस्कारवान राष्ट्र बनाने के साझा प्रयासों को बल दें।

कार्यक्रम मे मुंगेली के वरिष्ठ विधायक पुन्नूलाल मोहले, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय, जिला भाजप अध्यक्ष दीनानाथ केसरवानी,अध्यक्ष रामकमल परिहार, जिला पंचायत के पुर्व सदस्य शीलू साहू, शैलेन्द्र पाठक सहित जनप्रतिनिधि और पार्टी के कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।

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