छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ के संभाग स्तरीय सम्मेलन में लगा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर
110 बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच, उच्च रक्तचाप व मधुमेह सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की हुई पहचान
मुंगेली। छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ, जिला मुंगेली के तत्वावधान में सतनाम भवन में संभाग स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दौरान बुजुर्गों के स्वास्थ्य, सम्मान और कल्याण को प्राथमिकता देते हुए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया। शिविर में बड़ी संख्या में पेंशनधारी एवं बुजुर्ग शामिल हुए और चिकित्सकीय सेवाओं का लाभ लिया।

स्वास्थ्य शिविर में कुल 110 बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं चिकित्सकीय परामर्श किया गया। इस दौरान विभिन्न स्वास्थ्य जांच के माध्यम से बुजुर्गों में पाई जा रही सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की गई। जांच में 22 बुजुर्गों में उच्च रक्तचाप, 16 में मधुमेह, 23 में जोड़ों के दर्द तथा 6 बुजुर्गों में त्वचा संबंधी समस्याएं पाई गईं। वहीं 18 बुजुर्गों में शारीरिक निष्क्रियता एवं आलस्य जैसी समस्याएं सामने आईं। अन्य बुजुर्गों की जांच सामान्य रही।

शिविर के दौरान स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान के साथ बुजुर्गों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया। उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, खान-पान में सावधानी बरतने और अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों को शामिल करने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार जरूरी
इस अवसर पर डॉ. मनीष बंजारा ने बुजुर्गों से आत्मीय संवाद करते हुए स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “उम्र बढ़ना जीवन की सुंदर यात्रा का एक पड़ाव है, बीमारी का पर्याय नहीं।”
उन्होंने बुजुर्गों को नियमित रूप से हल्का व्यायाम एवं पैदल चलने, ध्यान-प्राणायाम करने तथा संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी। इसके साथ ही पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते स्वास्थ्य की जांच कराना आवश्यक है।
बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर
डॉ. बंजारा ने कहा कि बुजुर्ग परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका अनुभव, आशीर्वाद और जीवन से प्राप्त संस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल केवल चिकित्सकीय जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार और समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को स्वस्थ एवं सक्रिय बनाए रखने के लिए परिवार के सदस्यों को भी उनकी दिनचर्या, खान-पान और नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही बुजुर्गों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़े रखना उनके मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सेवा, संवेदना और सम्मान का संदेश
संभाग स्तरीय सम्मेलन में आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर ने कार्यक्रम को सेवा, संवेदना और सम्मान से जोड़ दिया। सम्मेलन में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और उनके स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया। स्वास्थ्य जांच के साथ चिकित्सकीय परामर्श मिलने से बुजुर्गों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझने और आवश्यक सावधानियां बरतने में मदद मिली।
आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मान देने के साथ ही उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। सम्मेलन में सामाजिक सहभागिता और आपसी संवाद के माध्यम से बुजुर्गों के अनुभवों एवं योगदान को महत्व देने का संदेश भी सामने आया।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 110 बुजुर्गों की जांच और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान के साथ उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि बुजुर्गों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन की देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारी भी है।

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