सेवा संकल्प अभियान सेवा की कहानी: उज्ज्वला से चंपा की रसोई हुई आसान, धुएं और लकड़ी की परेशानी से मिली राहत
बच्चों को स्कूल भेजना हो या समय पर काम पर निकलना, गैस से जल्दी तैयार हो रहा परिवार का भोजन

गीली लकड़ी और चूल्हा जलाने की मशक्कत हुई दूर, धुएं से आंखों में आने वाले आंसुओं से भी मिली राहत

अचानक मेहमान आने पर भी अब चूल्हा जलने का इंतजार नहीं, रसोई के काम में हो रही समय की बचत
रायपुर । कभी सुबह चूल्हा जलाने की मशक्कत और धुएं से आंखों में आते आंसुओं के बीच श्रीमती चंपा पात्र को बच्चों के लिए समय पर भोजन तैयार करने की चिंता रहती थी। बारिश में लकड़ियां गीली हो जाएं तो यह परेशानी और बढ़ जाती थी। अब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिली रसोई गैस ने उनकी दिनचर्या आसान कर दी है। गैस पर कम समय में भोजन तैयार होने से बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर स्वयं समय पर काम पर निकलने तक उन्हें सहूलियत मिल रही है।
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत सकोला निवासी चंपा पात्र ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए बताया कि पहले परिवार का भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनता था। चूल्हा जलाने से लेकर भोजन तैयार करने तक काफी समय लगता था। इसके साथ ही लकड़ी की व्यवस्था और धुएं की परेशानी भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थी।
गीली लकड़ी और चूल्हा जलाने की मशक्कत से मिली राहत
चंपा बताती हैं कि पहले चूल्हे में आग जलाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। बारिश और नमी के कारण लकड़ी गीली होने पर आग जल्दी नहीं सुलगती थी। चूल्हे को बार-बार फूंकना पड़ता और धुएं के कारण आंखों से आंसू आने लगते थे।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने के बाद रसोई का यह अनुभव बदल गया है। अब गैस चालू करते ही भोजन बनाना शुरू किया जा सकता है। इससे चूल्हा जलाने में लगने वाला समय बच रहा है और लकड़ी के धुएं की परेशानी से भी राहत मिली है।
बच्चों को स्कूल भेजने और काम पर जाने की जल्दी में बड़ी सहूलियत
चंपा के लिए गैस कनेक्शन का बड़ा लाभ समय की बचत के रूप में सामने आया है। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए भोजन तैयार करना हो या स्वयं काम पर समय से निकलना हो, अब रसोई का काम पहले की तुलना में जल्दी पूरा हो जाता है।
चंपा कहती हैं, “अब गैस मिल जाने से बहुत सुविधा हो गई है। बच्चों को स्कूल भेजना हो या काम पर जाना हो तो जल्दी खाना बन जाता है। कोई मेहमान अचानक आ जाए तो भी तुरंत खाना तैयार कर सकते हैं।”
अचानक मेहमान आएं तो अब चूल्हा जलने का इंतजार नहीं
पहले अचानक मेहमान आने पर लकड़ी जुटाने, चूल्हा जलाने और उसके बाद भोजन तैयार करने में समय लगता था। अब गैस उपलब्ध होने से जरूरत पड़ते ही भोजन बनाना शुरू किया जा सकता है। इससे चंपा और उनके परिवार की रोजमर्रा की दिनचर्या अधिक सहज हुई है।
चंपा बताती हैं कि रसोई गैस मिलने के बाद खाना बनाने से जुड़ी कई दैनिक परेशानियां कम हुई हैं। समय की बचत होने से वे परिवार और अपने दूसरे कामों को भी बेहतर ढंग से समय दे पा रही हैं।
धुएं से राहत, समय की भी बचत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से मिली सुविधा के लिए चंपा पात्र ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि गैस मिलने से लकड़ी के चूल्हे और धुएं की परेशानी से राहत मिलने के साथ भोजन तैयार करना भी आसान हुआ है।
चंपा की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि रसोई गैस की सुविधा ने केवल खाना बनाने के तरीके को नहीं बदला, बल्कि समय की बचत कर परिवार की रोजमर्रा की दिनचर्या को भी आसान बनाया है।

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