PRAGATI-50 में रायपुर-बिलासपुर का चयन, संकल्प भवन में RRR सेंटर का शुभारंभ
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा—समयबद्ध और तकनीक आधारित प्रयासों से कचरा-मुक्त शहरों की दिशा में मिलेगी गति
नई दिल्ली । स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के तहत नई दिल्ली स्थित संकल्प भवन में Reduce, Reuse and Recycle (RRR) सेंटर का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
संकल्प भवन में स्थापित RRR सेंटर का उद्देश्य सरकारी कार्यस्थलों पर संसाधनों के पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और सतत उपभोग को सरकारी संस्थानों की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

SBM-U 2.0 को मजबूत करने वाली कई पहल शुरू

कार्यक्रम के दौरान स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 को और मजबूत करने के लिए कई नई पहलों की शुरुआत की गई। इनमें PRAGATI-50, स्वच्छ भारत टेस्ट बेड, स्वच्छता स्टार्टअप का तीसरा चरण और स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन डिजिटल कोष प्रमुख हैं।

तोखन साहू ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से शहरी स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के साथ नवाचार, आधुनिक तकनीक और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को स्थायी रूप से प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
PRAGATI-50 में रायपुर और बिलासपुर का चयन
PRAGATI-50 के तहत देश के 50 चयनित शहरों में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े लक्षित एवं समयबद्ध कार्यों की निगरानी की जाएगी। पहल का उद्देश्य चयनित शहरों में बेहतर परिणाम हासिल करने के साथ उन्हें अन्य शहरी क्षेत्रों के लिए अनुकरणीय मॉडल के रूप में विकसित करना है।
छत्तीसगढ़ से रायपुर और बिलासपुर का चयन किया गया है। तोखन साहू ने इसे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि दोनों शहरों में कचरा-मुक्त शहर की दिशा में समयबद्ध, तकनीक आधारित और परिणाम-केंद्रित प्रयासों को गति देने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप सूक्ष्म स्तर की कार्ययोजना तैयार करने तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार कार्ययोजनाओं की नियमित निगरानी और परिणामों का मूल्यांकन स्वच्छता व्यवस्था में स्थायी सुधार के लिए महत्वपूर्ण होगा।
स्वच्छ भारत टेस्ट बेड से तकनीकों का होगा परीक्षण
कार्यक्रम में CSIR-CMERI द्वारा विकसित स्वच्छ भारत टेस्ट बेड का भी शुभारंभ किया गया। यह मंच शहरी स्वच्छता से संबंधित नई तकनीकों के परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन में सहयोग करेगा।
इससे स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित हो रहे तकनीकी समाधानों की उपयोगिता का परीक्षण करने तथा जरूरत के अनुसार उन्हें शहरी निकायों में अपनाने की दिशा में सहायता मिलने की उम्मीद है।
स्वच्छता स्टार्टअप के तीसरे चरण की शुरुआत
आईआईटी कानपुर के सहयोग से स्वच्छता स्टार्टअप्स के तीसरे चरण की भी शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में काम कर रहे नवाचार आधारित स्टार्टअप समाधानों को प्रोत्साहित करना है।
स्वच्छता क्षेत्र में नई तकनीकों और स्थानीय समाधानों को बढ़ावा देकर कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण जैसी गतिविधियों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
डिजिटल माध्यम से व्यवहार परिवर्तन पर जोर
कार्यक्रम में स्वच्छता व्हाट्सएप चैनल और स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन डिजिटल कोष भी लॉन्च किया गया। डिजिटल कोष में स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन से जुड़े विचारों, रचनात्मक सामग्री, अभियानों और अन्य उपयोगी संसाधनों को एकत्रित किया जाएगा।
इसका उद्देश्य स्वच्छता के प्रति नागरिक जागरूकता बढ़ाने और व्यवहार परिवर्तन से जुड़े प्रभावी प्रयासों को साझा करने के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराना है।
वेस्ट-टू-वेल्थ से रोजगार के अवसरों पर जोर
तोखन साहू ने कहा कि शहरी स्वच्छता को स्थायी रूप से मजबूत करने में युवा, स्टार्टअप, तकनीक और नागरिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन पुनर्चक्रण और वेस्ट-टू-वेल्थ जैसे क्षेत्रों में नवाचार स्वच्छता संबंधी चुनौतियों के समाधान के साथ हरित रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी सहायक हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में शहरों को स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के साथ स्थानीय स्तर पर प्रभावी समाधानों को अपनाना होगा।
राज्यों और नगरीय निकायों से समन्वित प्रयास का आह्वान
केंद्रीय राज्य मंत्री ने सभी राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों और संबंधित हितधारकों से समयबद्ध कार्ययोजनाओं, तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी के माध्यम से शहरों को कचरा-मुक्त बनाने की दिशा में समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान की सफलता केवल सरकारी योजनाओं और व्यवस्थाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, व्यवहार में बदलाव और स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ही स्वच्छता के स्थायी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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