नवरात्रि पंडालों की तैयारी के बीच सुरक्षा से खिलवाड़, 20 से 30 फीट ऊंचाई पर बिना सुरक्षा उपकरण काम कर रहे मजदूर

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बिजली की लाइनों के नीचे बन रहे पूजा पंडाल, जरा सी चूक से हो सकता है बड़ा हादसा; प्रशासन और विद्युत विभाग से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग

मुंगेली । शारदीय नवरात्रि पर्व को लेकर शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। जगह-जगह मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना के लिए भव्य पूजा पंडालों और आकर्षक टेंटों का निर्माण किया जा रहा है। आयोजन समितियां तैयारियों में जुटी हैं और कारीगर दिन-रात मेहनत कर पंडालों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। लेकिन इस धार्मिक उत्साह के बीच पंडाल निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, कई स्थानों पर मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के ऊंचाई पर चढ़कर काम कर रहे हैं। वहीं, कुछ जगहों पर पंडालों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरने की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।

20 से 30 फीट ऊंचाई पर जोखिम भरा काम

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पंडालों के निर्माण में पाइप, बांस-बल्ली और अन्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इन ढांचों को जोड़ने और बांधने के लिए मजदूरों को काफी ऊंचाई पर चढ़ना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही स्थितियों के मुताबिक, कुछ श्रमिक लगभग 20 से 30 फीट की ऊंचाई पर बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के काम करते नजर आते हैं। ऐसे में संतुलन बिगड़ने, पाइप खिसकने या पैर फिसलने से गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

निर्माण स्थलों पर सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और ऊंचाई पर काम करने के लिए जरूरी अन्य सुरक्षा उपायों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके बावजूद यदि श्रमिकों से बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है, तो यह उनकी जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

बिजली की लाइनों के नजदीक पंडाल निर्माण चिंता का विषय

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू बिजली की मुख्य लाइनों और खुले तारों के आसपास पंडालों का निर्माण है। कई स्थानों पर विद्युत पोल और ट्रांसफॉर्मर के नजदीक भी टेंट लगाने की तैयारी किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। ऊंचे पाइप या धातु के ढांचे खड़े करते समय यदि वे बिजली की लाइन के संपर्क में आ जाएं, तो करंट लगने से जानलेवा हादसा हो सकता है।

ऐसी स्थिति में केवल मजदूर ही नहीं, बल्कि आयोजन समिति के सदस्य, आसपास के दुकानदार और पंडाल में आने वाले श्रद्धालु भी खतरे की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए पंडाल निर्माण शुरू होने से पहले स्थल का निरीक्षण और बिजली लाइनों से सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना जरूरी है।

आयोजकों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण

नवरात्रि जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में पंडालों की सजावट और भव्यता के साथ सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है। आयोजन समितियों और टेंट ठेकेदारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों को जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, निर्माण के दौरान ढांचे की मजबूती, कार्यस्थल की सुरक्षित व्यवस्था और बिजली के खतरों से बचाव के उपायों पर ध्यान दिया जाए।

प्रशासन और विद्युत विभाग से कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन तथा विद्युत विभाग से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। मांग की गई है कि पंडाल निर्माण स्थलों का निरीक्षण कराया जाए, बिजली की लाइनों के आसपास सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और आयोजकों व टेंट ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। जहां नियमों की अनदेखी पाई जाए, वहां नियमानुसार कार्रवाई भी की जाए।

नवरात्रि पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्सव का अवसर है। ऐसे में किसी भी आयोजन की तैयारी के दौरान श्रमिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। समय रहते प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, तो संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण या कार्रवाई किए जाने की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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