मुंगेली को उप मुख्यमंत्री अरुण साव की बड़ी सौगात, नवापारा तालाब के कायाकल्प के लिए ₹3 करोड़ से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति

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अमृत मिशन 2.0 के तहत वार्ड क्रमांक 12 के तालाब का होगा पुनर्जीवन, संरक्षण और सौंदर्यीकरण को मिलेगी गति; एल्डरमैन अमितेश विज्जू आर्य ने उप मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

मुंगेली। मुंगेली नगर के विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। नगर के वार्ड क्रमांक 12 स्थित नवापारा तालाब के कायाकल्प एवं पुनर्जीवन (रिवाइटलाइजेशन) कार्य के लिए ₹3 करोड़ 1 लाख 7 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के प्रति इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए नगर पालिका परिषद मुंगेली के एल्डरमैन अमितेश विज्जू आर्य ने आभार व्यक्त किया है। इस परियोजना से नवापारा तालाब के संरक्षण, विकास और बेहतर उपयोग की दिशा में कार्य आगे बढ़ने की उम्मीद है।

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित अमृत मिशन 2.0 (अटल शहरी नवीकरण एवं परिवर्तन मिशन) के अंतर्गत इस परियोजना को वाटर बॉडी रिवाइटलाइजेशन घटक में स्वीकृति दी गई है। राज्य शहरी विकास अभिकरण, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी प्रशासकीय स्वीकृति के अनुसार, परियोजना की कुल स्वीकृत लागत में आगामी पांच वर्षों का संचालन एवं संधारण भी शामिल है। कार्य का क्रियान्वयन नगर पालिका परिषद मुंगेली द्वारा किया जाएगा।

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अमृत मिशन 2.0 के तहत तालाब के पुनर्जीवन की पहल

शहरी क्षेत्रों में स्थित तालाब और अन्य जल निकाय पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन तथा स्थानीय पारिस्थितिकी के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बढ़ते शहरीकरण के बीच इन जल स्रोतों का संरक्षण और व्यवस्थित विकास आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अमृत मिशन 2.0 के तहत जल निकायों के पुनर्जीवन पर जोर दिया जा रहा है।

मुंगेली के नवापारा तालाब के लिए स्वीकृत यह परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तालाब के कायाकल्प से उसके संरक्षण और विकास को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। परियोजना का उद्देश्य जल निकाय को बेहतर स्थिति में लाने के साथ उसके उपयोग को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

वार्ड क्रमांक 12 के नवापारा तालाब से जुड़े इस कार्य को लेकर नगरवासियों को उम्मीद है कि परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में तालाब के संरक्षण और सार्वजनिक उपयोग की स्थिति में सुधार होगा। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निर्धारित डिजाइन के पालन और नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगा।

राज्य स्तरीय समिति के निर्णय के बाद मिली प्रशासकीय स्वीकृति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, परियोजना को राज्य स्तरीय हाई पावर स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णयों तथा राज्य शासन के संबंधित आदेशों के परिप्रेक्ष्य में प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति के साथ निर्माण कार्य के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

आदेश के अनुसार, निर्माण कार्य के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित निविदा प्रारूप के आधार पर निविदा आमंत्रित की जाएगी। कार्य निर्धारित दिशा-निर्देशों और स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप कराया जाना होगा। इसके साथ ही परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने की जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी।

निर्माण के दौरान गुणवत्ता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। कार्य की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी तथा खर्च की गई राशि के संबंध में उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्धारित समय पर प्रस्तुत करना अनिवार्य रहेगा। इससे परियोजना के क्रियान्वयन और स्वीकृत राशि के उपयोग पर निगरानी रखी जा सकेगी।

पांच वर्षों तक संचालन एवं संधारण की व्यवस्था

नवापारा तालाब के रिवाइटलाइजेशन के लिए स्वीकृत ₹3 करोड़ 1 लाख 7 हजार की राशि में पांच वर्षों का संचालन एवं संधारण भी शामिल है। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी विकास कार्य की उपयोगिता केवल निर्माण पूरा होने तक सीमित नहीं रहती। उसके बाद नियमित देखरेख और रखरखाव से ही परियोजना का लाभ लंबे समय तक कायम रखा जा सकता है।

प्रशासकीय स्वीकृति के अनुसार, निर्माण कार्यों का निरीक्षण भारत सरकार द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी इंडिपेंडेंट रिव्यू एंड मॉनिटरिंग एजेंसी (आईआरएमए) द्वारा भी किया जाएगा। इससे परियोजना के कार्यों की निगरानी की व्यवस्था रहेगी।

अब परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी होने, निर्माण कार्य शुरू होने और उसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने पर विशेष ध्यान रहेगा। नगरवासियों की अपेक्षा है कि स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो और तालाब का कायाकल्प केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर दिखाई दे।

एल्डरमैन अमितेश विज्जू आर्य ने जताया आभार

नगर पालिका परिषद मुंगेली के एल्डरमैन अमितेश विज्जू आर्य ने नवापारा तालाब के कायाकल्प के लिए ₹3.01 करोड़ से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

उन्होंने कहा कि मुंगेली नगर के विकास और नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय है। वार्ड क्रमांक 12 के नवापारा तालाब के पुनर्जीवन के लिए इतनी बड़ी राशि की स्वीकृति मिलना क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक कदम है। तालाब जैसे जल निकाय नगर की प्राकृतिक संपदा हैं। इनका संरक्षण वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है।

अमितेश विज्जू आर्य ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों में विकास का अर्थ केवल सड़कों और भवनों का निर्माण करना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। नवापारा तालाब के कायाकल्प की स्वीकृति इसी व्यापक सोच को आगे बढ़ाने वाली पहल है।

उन्होंने कहा कि अमृत मिशन 2.0 के अंतर्गत मिलने वाली इस स्वीकृति से तालाब के संरक्षण और विकास के लिए योजनाबद्ध कार्य करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उप मुख्यमंत्री अरुण साव का धन्यवाद करते हुए उम्मीद जताई कि परियोजना का कार्य गुणवत्ता के निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा किया जाएगा और नगरवासियों को इसका दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।

नगरवासियों को अब धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार

नवापारा तालाब के कायाकल्प के लिए मिली प्रशासकीय स्वीकृति मुंगेली के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ₹3 करोड़ 1 लाख 7 हजार की स्वीकृत राशि से संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए अब निविदा प्रक्रिया, निर्माण की शुरुआत और गुणवत्ता की निगरानी अहम होगी।

नगरवासियों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग और नगर पालिका परिषद मुंगेली परियोजना को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करें। निर्माण कार्य समय पर शुरू हो, स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप पूरा हो और पांच वर्षों तक संचालन एवं संधारण की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू रहे, ताकि तालाब के पुनर्जीवन का उद्देश्य पूरा हो सके।

अब शहरवासियों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नवापारा तालाब के विकास की यह योजना कितनी तेजी से धरातल पर उतरती है और इससे क्षेत्र को किस प्रकार का लाभ मिलता है। यदि कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा होता है, तो यह मुंगेली में जल निकायों के संरक्षण और बेहतर शहरी सुविधाओं की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।

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