जनसुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता, चक्रवाती तूफान से निपटने सभी तैयारियां सुनिश्चित करें -राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा
चक्रवाती तूफान के मद्देनजर छत्तीसगढ़ में अलर्ट जारी, जनसुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां
राज्य के 12 जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना, 1769 संवेदनशील गांव चिन्हित

आपदा की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय, टोल फ्री नंबर 1070 जारी

रायपुर । बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान अर्नब के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने जनसुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 एवं 28 अक्टूबर को प्रदेश के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर जिले में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने संबंधित जिलों में सतर्कता बढ़ाने और आवश्यक एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन को पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करना होगा। किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रखने और संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए।
मंत्री वर्मा ने कहा कि संभावित आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय पर सूचना और पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को तेज हवाओं और तूफान से गिरने की आशंका वाले जर्जर एवं असुरक्षित मकानों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जलाशयों के जलस्तर की नियमित निगरानी करने और पानी छोड़े जाने की स्थिति में संबंधित क्षेत्रों को 48 घंटे पहले सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
आपदा प्रबंधन की तैयारी विशेष प्राथमिकता में
राज्य शासन द्वारा संभावित आपदा से प्रभावित होने वाले संवेदनशील गांवों का चिन्हांकन भी किया गया है। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर सहित 12 अति संवेदनशील जिलों में 763 गांव चिन्हित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त शेष 21 जिलों में 1006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। इस प्रकार प्रदेश में कुल 1769 गांवों को चिन्हित कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
आपदा संबंधी सूचनाओं के लिए टोल फ्री नंबर 1070
राज्य में आपदा संबंधी सूचनाओं और त्वरित सहायता के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे संचालित है। इसका टोल फ्री नंबर 1070 है। संभावित खतरे के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए दामिनी एवं मेघदूत मोबाइल ऐप के माध्यम से मौसम संबंधी चेतावनियां प्रसारित की जा रही हैं।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने नागरिकों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक जोखिम से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के समन्वित प्रयासों तथा नागरिकों की सतर्कता से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने और जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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