शिवा मेडिसिटी अस्पताल ने आरोपों को बताया भ्रामक, प्रबंधन ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

स्टेज-IV पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित मरीज की मौत के मामले में अस्पताल ने रखा अपना पक्ष, DNR सहमति और पेलिएटिव केयर का दिया हवाला; संबंधित मीडिया पोर्टल्स को कानूनी नोटिस भेजने की बात कही

बिलासपुर। शिवा मेडिसिटी अस्पताल को लेकर कुछ मीडिया पोर्टल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित खबरों के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष जारी किया है। प्रबंधन ने मरीज की मौत से जुड़े आरोपों को निराधार और भ्रामक बताते हुए उनका खंडन किया है। अस्पताल का कहना है कि मामले में मरीज की गंभीर चिकित्सकीय स्थिति और उपचार से संबंधित तथ्यों को जाने बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। प्रबंधन ने यह भी कहा है कि संबंधित मीडिया पोर्टल्स को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजे गए हैं और आरोपों को वापस लेकर खबरें नहीं हटाए जाने पर भारतीय न्याय संहिता सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी: अस्पताल प्रबंधन

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, संबंधित मरीज स्टेज-IV पैंक्रियाटिक कैंसर यानी अग्न्याशय के उन्नत चरण के कैंसर से पीड़ित थे। इसके साथ ही उन्हें गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन की गंभीर समस्या भी थी, जिसमें पेट से भोजन के आगे जाने का रास्ता बाधित हो सकता है। प्रबंधन का दावा है कि मरीज की बीमारी काफी बढ़ चुकी थी और मुंबई के बड़े अस्पतालों में भी उपचार की सीमाओं के बारे में बताया गया था।

जारी बयान में अस्पताल ने बताया कि गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन के उपचार के लिए मरीज का अपोलो अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद उनकी स्थिति और अधिक नाजुक हो गई थी। प्रबंधन के मुताबिक, आर्थिक कारणों से परिजनों ने मरीज को शिवा मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया था।

अस्पताल का कहना है कि मरीज को भर्ती किए जाने के समय उनकी हालत अत्यंत गंभीर थी। प्रबंधन के अनुसार, उस समय मरीज का ब्लड प्रेशर और पल्स रिकॉर्ड नहीं हो पा रहे थे तथा श्वसन क्रिया भी असामान्य थी। अस्पताल का दावा है कि परिजनों को शुरुआत में ही मरीज की गंभीर स्थिति और संभावित अनहोनी के बारे में जानकारी दे दी गई थी।

DNR सहमति और पेलिएटिव केयर का दिया हवाला

अस्पताल प्रबंधन ने अपने पक्ष में लिखित DNR (Do Not Resuscitate) सहमति का उल्लेख किया है। प्रबंधन के अनुसार, मरीज के परिजनों ने स्वेच्छा से इस संबंध में लिखित सहमति दी थी, जिसमें वेंटिलेटर और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं से इनकार किया गया था।

अस्पताल का कहना है कि मरीज को पेलिएटिव केयर यानी आराम एवं लक्षणों से राहत देने वाली देखभाल के उद्देश्य से भर्ती किया गया था। प्रबंधन के मुताबिक, इस देखभाल का उद्देश्य मरीज की तकलीफ और दर्द को कम करना था।

हालांकि, DNR सहमति का वास्तविक दायरा, उपचार संबंधी निर्णयों का विवरण और मरीज को दी गई चिकित्सा का आकलन संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है। अस्पताल के बयान में इन तथ्यों को अपने पक्ष के समर्थन में प्रस्तुत किया गया है।

इंजेक्शन से मौत के दावे पर अस्पताल ने उठाए सवाल

मरीज की मौत को लेकर इंजेक्शन से संबंधित लगाए गए आरोपों को अस्पताल प्रबंधन ने खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि चिकित्सकीय जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अथवा किसी आधिकारिक प्रमाण के बिना मौत का कारण किसी विशेष इंजेक्शन को बताना उचित नहीं है।

अस्पताल ने कहा कि मामले से जुड़े किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड और अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रबंधन ने यह भी कहा कि अस्पताल का पक्ष जाने बिना गंभीर आरोपों का प्रसारण उसकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है।

इस मामले में मौत के वास्तविक कारण और उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया से जुड़े निष्कर्षों की पुष्टि स्वतंत्र जांच तथा उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है। अस्पताल की ओर से जारी बयान अपने पक्ष का विवरण है; इसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक होगी।

मीडिया पोर्टल्स को कानूनी नोटिस भेजने का दावा

अस्पताल प्रबंधन ने निष्पक्ष पत्रकारिता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान से संबंधित खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करना और संबंधित पक्ष का बयान लेना आवश्यक है। प्रबंधन के अनुसार, कुछ मीडिया पोर्टल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित सामग्री से अस्पताल की छवि को नुकसान पहुंचा है।

अस्पताल ने दावा किया है कि संबंधित मीडिया पोर्टल्स को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजे गए हैं। प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि यदि कथित मानहानिकारक सामग्री वापस नहीं ली गई और संबंधित खबरें नहीं हटाई गईं, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 सहित लागू अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों का सामने आना जरूरी

मरीज की मौत से जुड़ा मामला संवेदनशील होने के कारण इसमें अस्पताल प्रबंधन के दावों, परिजनों के पक्ष और उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों का निष्पक्ष आकलन महत्वपूर्ण है। अस्पताल ने अपनी ओर से मरीज की गंभीर बीमारी, DNR सहमति और पेलिएटिव केयर का हवाला देते हुए आरोपों का खंडन किया है।

फिलहाल, अस्पताल द्वारा जारी बयान के आधार पर ही पूरे मामले का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। मौत के कारण, उपचार की प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों के बयान तथा प्रासंगिक दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है।

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