कारण बताओ नोटिस से नाराज शिक्षक संघर्ष मोर्चा, तहसीलदार से मिलकर जताया कड़ा विरोध
शिक्षकों का सवाल—निर्वाचन ड्यूटी भी करें और स्कूल में उपस्थिति भी दें, आखिर दोनों काम एक साथ कैसे संभव?
मुंगेली। निर्वाचन कार्य में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के रूप में तैनात शिक्षकों को वीएसके एप में उपस्थिति दर्ज करने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने पर शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने कड़ी नाराजगी जताई है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने तहसीलदार से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि निर्वाचन कार्य में संलग्न शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाने के आधार पर नोटिस जारी करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है और निर्वाचन कार्य के साथ शैक्षणिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना मुश्किल हो रहा है।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी संजय उपाध्याय, बलराज सिंह, मोहन लहरी, दीपक वेंताल, नेमीचंद भास्कर, भूपेंद्र बंजारा और मनोज अंचल ने तहसीलदार से मुलाकात के दौरान कहा कि प्रशासन द्वारा शिक्षकों की निर्वाचन कार्य में ड्यूटी लगाई गई है। दूसरी ओर, विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा वीएसके एप में उपस्थिति को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के सामने एक साथ दो जिम्मेदारियों को निभाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

निर्वाचन ड्यूटी और स्कूल की उपस्थिति को लेकर सवाल
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि निर्वाचन कार्य प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और शिक्षक इसमें पूरी गंभीरता से अपना दायित्व निभा रहे हैं। बीएलओ के रूप में मतदाता सूची से संबंधित कार्यों और अन्य निर्वाचन दायित्वों के निर्वहन में समय लगता है। ऐसी स्थिति में संबंधित शिक्षक हर परिस्थिति में विद्यालय पहुंचकर उपस्थिति दर्ज कर सकें, यह संभव नहीं हो पाता।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी शिक्षक की ड्यूटी निर्वाचन कार्य में लगाई गई है, तब उससे विद्यालय में उपस्थिति दर्ज करने की अपेक्षा किस आधार पर की जा रही है? प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि प्राथमिकता निर्वाचन कार्य को दी जानी है या विद्यालय में उपस्थिति को। मोर्चा का कहना है कि दोनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाने की अपेक्षा करने के बजाय विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए।
पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि शिक्षक अपनी ओर से प्रयास करते हैं कि निर्वाचन कार्य के बीच समय निकालकर विद्यालय पहुंच सकें और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके बावजूद कारण बताओ नोटिस जारी होने से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।
चुनिंदा शिक्षकों को निशाना बनाने का लगाया आरोप
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि विकासखंड और जिले में ऐसे अन्य कर्मचारी भी हैं, जो वीएसके एप में चेक-आउट दर्ज नहीं कर पाते, लेकिन उनके मामलों में समान रूप से कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
मोर्चा ने इस कथित असमानता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वीएसके एप में उपस्थिति दर्ज करने से संबंधित नियमों का पालन सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है, तो कार्रवाई भी समान आधार पर होनी चाहिए। निर्वाचन कार्य में संलग्न शिक्षकों को नोटिस जारी करना और अन्य समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के मामलों में कार्रवाई नहीं होना समझ से परे है।
पदाधिकारियों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न एक शिक्षिका का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि संबंधित शिक्षिका कार्यालय में नियमित रूप से कार्य कर रही हैं, लेकिन उनके मामले में अब तक नोटिस जारी नहीं किया गया। मोर्चा ने इस संबंध में विभाग से स्पष्टता की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
कार्रवाई जारी रही तो कलेक्टर और डीईओ से करेंगे शिकायत
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि निर्वाचन कार्य में लगे शिक्षकों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रही, तो संगठन कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी, मुंगेली के समक्ष औपचारिक शिकायत करेगा। पदाधिकारियों ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा।
मोर्चा ने स्पष्ट किया कि शिक्षक निर्वाचन कार्य से पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि उनकी मांग है कि निर्वाचन ड्यूटी और विद्यालयीन उपस्थिति के बीच व्यावहारिक समन्वय बनाया जाए। शिक्षकों को उनके निर्धारित दायित्वों के निर्वहन के दौरान आने वाली परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।
प्रशासनिक समन्वय से निकले समाधान की मांग
इस पूरे मामले में शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि निर्वाचन कार्य में तैनात शिक्षकों की ड्यूटी और विद्यालय में उपस्थिति से जुड़े निर्देशों के बीच स्पष्ट समन्वय होना चाहिए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक नोटिस और कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
अब इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा विभाग का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। यदि विभाग की ओर से उपस्थिति संबंधी नियमों और निर्वाचन ड्यूटी के दौरान लागू व्यवस्था को स्पष्ट किया जाता है, तो विवाद का समाधान निकल सकता है। फिलहाल शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए चेतावनी दी है कि मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने की स्थिति में संगठन आगे आंदोलनात्मक कदम उठाएगा।

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