मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 8 हजार करोड़ की रेल परियोजना को मंजूरी, मुंगेली को मिलेगी रेल कनेक्टिविटी

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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया परियोजना का महत्व, कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ तक 295 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग प्रस्तावित

रायपुर/मुंगेली । छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी को विस्तार देने और पर्यटन क्षेत्र को नई गति प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीआरसीएल) के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। लगभग 8,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना से मुंगेली सहित रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ को भी स्वीकृति प्रदान की है।

रेल परियोजना में 2,000 करोड़ रुपये की अंशपूंजी

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कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, कटघोरा से तखतपुर, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित रेल परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 8,000 करोड़ रुपये है। परियोजना में 25 प्रतिशत यानी करीब 2,000 करोड़ रुपये की अंशपूंजी का प्रावधान होगा। इसमें छत्तीसगढ़ शासन और रेल मंत्रालय की ओर से लगभग 1,000-1,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया जाएगा। राज्य शासन अपनी हिस्सेदारी मिनरल डेवलपमेंट फंड (एमडीएफ), जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) अथवा राज्य बजट के माध्यम से वहन करेगा।

परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय व्यवस्था का रास्ता प्रशस्त होने की उम्मीद है।

मुंगेली को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अहम कदम

प्रस्तावित रेल मार्ग में मुंगेली का शामिल होना जिले के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने से आवागमन और माल परिवहन के विकल्प बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय व्यापार, कृषि आधारित गतिविधियों और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से किसानों की कृषि उपज को दूसरे बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। वहीं उद्योगों को परिवहन की सुविधा मिलने से निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी। पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय स्तर पर कारोबार, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी लाभ मिल सकता है।

हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ इसके क्रियान्वयन, निर्माण की प्रगति और रेल सेवा शुरू होने के बाद ही सामने आएगा।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया निर्णय का महत्व

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने रेल परियोजना को मिली मंजूरी को छत्तीसगढ़ के विकास और कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी है।

उन्होंने बताया कि लगभग 8,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली परियोजना में 25 प्रतिशत यानी करीब 2,000 करोड़ रुपये की अंशपूंजी निर्धारित है। इसमें राज्य शासन और रेल मंत्रालय की ओर से लगभग 1,000-1,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया जाएगा। राज्य शासन की हिस्सेदारी मिनरल डेवलपमेंट फंड, डीएमएफ अथवा राज्य बजट के माध्यम से वहन की जाएगी।

अरुण साव के अनुसार, इस रेल परियोजना से रेल सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही उद्योग, पर्यटन, रोजगार और कृषि उपज के लिए नए बाजारों तक पहुंच का विस्तार होगा।

पांच वर्षों में पर्यटन विकास पर खर्च होंगे लगभग 500 करोड़ रुपये

मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ को भी मंजूरी दी गई। ‘पर्यटन से समृद्धि’ के ध्येय के साथ इस मिशन का संचालन आगामी पांच वर्षों तक किया जाएगा। इसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

मिशन के तहत प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं, सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा होमस्टे, निजी निवेश और पर्यटन उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि पर्यटन गतिविधियों का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे।

युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को मिलेंगे अवसर

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटन स्थलों के विकास से स्थानीय स्तर पर आवास, खानपान, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

पर्यटन अधोसंरचना को मजबूत करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने से छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है।

विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद

कैबिनेट के दोनों निर्णयों को प्रदेश में कनेक्टिविटी और पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। एक ओर प्रस्तावित रेल परियोजना से मुंगेली सहित कई क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर पर्यटन विकास मिशन स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम बन सकता है। इन योजनाओं का लाभ जमीन पर पहुंचाने के लिए समयबद्ध क्रियान्वयन, वित्तीय व्यवस्था और आवश्यक अधोसंरचना का विकास महत्वपूर्ण रहेगा।

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