SNG शास. कॉलेज की जमीन को हथियाने की बड़ी साज़िश…कलेक्टर न्यायालय के आदेश का नहीं हुआ पालन…4 बार तहसीलदार को कॉलेज ने भेजा हैं पत्र…रसूखदारों का हैं दखल…मुख्यमंत्री से होगी शिकायत…
मुंगेली@अपना छत्तीसगढ़ । प्रदेश में सुशासन के दावों के बीच मुंगेली के प्रतिष्ठित एस.एन.जी. (SNG) शासकीय कॉलेज की जमीन का भविष्य अंधकार में लटका हुआ हैं। जिस भूमि पर छात्रों के सुनहरे भविष्य की नींव होनी चाहिए थी, वह आज अवैध कब्जेधारियों और रसूखदारों के आंखों में चुभने लगी है। हैरानी की बात यह है कि मुंगेली कलेक्टर न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा आदेश की अनदेखी की जा रही हैं जो कि गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता हैं।

कलेक्टर का आदेश…तहसीलदारों की अनदेखी…
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासनिक अनुशासनहीनता है। कलेक्टर न्यायालय ने कॉलेज के जमीन संबंधी मामले को गंभीरता से लेते हुए दिनांक 23/08/2023 को अधीनस्थ न्यायालय को सीमांकन की कार्यवाही करने आदेश जारी किया था। नियमानुसार कलेक्टर न्यायालय के आदेश का पालन तत्काल होना चाहिए, लेकिन तत्कालीन तहसीलदार ने कलेक्टर न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया और कलेक्टर का आदेश मुंगेली तहसील कार्यालय में धूल फांक रही हैं।
कलेक्टर न्यायालय के आदेश में निम्न बातें उल्लेखित हैं –
“प्राचार्य शास. एसएनजी महाविद्यालय मुंगेली द्वारा पदेन प्राचार्य रजत दवे मुंगेली, जिला-मुंगेली (छ.ग.) द्वारा न्यायालय तहसीलदार मुंगेली के प्र.क्र. 202212250200059/अ-12/21-22 में पारित आदेश दिनांक 13.03.2023 से परिवेदित होकर पुनरीक्षण आवेदन अंतर्गत धारा 50, भू-राजस्व संहिता 1959 प्रस्तुत किया है। पुनरीक्षणकर्ता के अधिवक्ता ने अपने लिखित तर्क में प्रमुख रूप से यह बताया है कि ग्राम मुंगेली स्थित भूमि ख.नं. 963, 964, 965, 967/2 रकबा क्रमशः 0.5430, 3.1040, 0.9260, 0.2830 हे. कुल रकबा 4.8560 हे. (11.99 ए.) भूमि पुनरीक्षणकर्ता एस. एन. जी. कॉलेज मुंगेली के नाम पर राजस्व प्रपत्रों में दर्ज है अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष सीमांकन का आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर राजस्व निरीक्षक द्वारा दिनांक 06.03.23 को प्रस्तुत प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि वादभूमि का रकबा 11.99 तथा नक्शा 11.45 ए. का है। पुनरीक्षणकर्ता संस्था की भूमि पर अनावेदक प्रदीप कुमार उप्पल की भूमि रकबा 1.98 ए. है। जिसमें 0.22 ए. भूमि घटाने पर मौके पर 1.76 ए. भूमि शेष रहेगी। जिससे स्पष्ट है कि वादभूमि 11.99 ए. भूमि के स्थान पर 11.45 ए. भूमि का सीमांकन किया गया है। इस प्रकार शेष 0.54 ए. भूमि के संबध में सीमांकन की कार्यवाही किया जाना था। परंतु शेष 0.32 ए. भूमि सीमांकन कर उसे चिन्हांकित नहीं किया गया है। इसलिए सीमांकन रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण है। वादभूमि 11.99 ए. भूमि का सीमांकन किए जाने हेतु आदेश दिए जाने का निवेदन किया गया है। उपरोक्त तर्क के प्रकाश में प्रकरण पर उपलब्ध राजस्व निरीक्षक का प्रतिवेदन दिनांक 06.03.23 का परिशीलन किया गया।
रिकार्ड में दर्ज वादभूमि 11.99 ए. नक्शे में 11.45 ए. होना प्रतिवेदित हैं। उपरोक्त अंतर के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। सीमांकन दल यह स्पष्ट करने में विफल रहा है कि उपरोक्त अंतर का तार्किक कारण क्या है ? तथा दोनों में प्रविष्टियों में सही कौन सी प्रविष्टि है? पुनरीक्षणकर्ता संस्था शासकीय महाविद्यालय है। इसलिए संस्था के नाम पर दर्ज भूमि की स्थिति सीमांकन में स्पष्ट होनी चाहिए। राजस्व निरीक्षक का सीमांकन रिपोर्ट उपरोक्त कारणों से त्रुटिपूर्ण है। इसलिए अंधीनस्थ न्यायालय के आदेश दिनांक 13.03.2023 को निरस्त करते हुए अधीनस्थ न्यायालय को निर्देशित किया जाता है कि वादभूमि के संबंध में राजस्व अभिलेख एवं नक्शा को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अद्यतन करते हुए सीमांकन की कार्यवाही नियमानुसार की जाये।”
कलेक्टर न्यायालय द्वारा पारित इस आदेश का तत्कालीन तहसीलदार ने पालन नहीं किया और अभी भी सीमांकन लंबित हैं।
4 बार पत्र, फिर भी चुप्पी क्यों ?
एसएनजी शासकीय कॉलेज प्रबंधन द्वारा अब तक चार बार तहसीलदार को पत्र लिखकर कलेक्टर न्यायालय के आदेश के पालन हेतु सीमांकन की गुहार लगाई जा चुकी हैं, परंतु तहसीलदार द्वारा अभी तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई।
कलेक्टर न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार सीमांकन कराने के लिए प्राचार्य द्वारा तहसीलदार को भेजे गये 4 पत्रों की तिथिवार जानकर –
पहला पत्र – दिनांक 02/01/2024
दूसरा पत्र – दिनांक 15/04/2024
तीसरा पत्र – दिनांक 30/06/2025
चौथा पत्र – दिनांक – 11/03/2026
SNG शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा भेजे गए चार-चार पत्रों के बाद भी तहसीलदार कार्यालय से किसी भी टीम का मौके पर न पहुंचना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसी कौन सी ताकत है जो तहसीलदार के हाथ बांध रही है ? क्या रसूखदार अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है ? कालेज की जमीन पर कब्जा होने के कारण कॉलेज का विकास और विस्तार कार्य रुका हुआ हैं। खेल मैदान, बाउंड्रीवाल से लेकर नए भवनों के निर्माण तक की योजनाएं अधर में लटकी हैं। स्थानीय नागरिकों और छात्रों ने भारी आक्रोश भरे स्वर में कहा कि शिक्षा के मंदिर की जमीन पर रसूखदार नजरें गड़ाये हुये हैं। “जब कलेक्टर न्यायालय का आदेश ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करें ? चार बार पत्र लिखने के बाद भी सीमांकन न होना सीधे तौर पर कार्य के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। क्या मुंगेली प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए इस जमीन को कब्जा मुक्त कराएगा ? या फिर शिक्षा के इस धाम पर अवैध कब्जा बदस्तूर जारी रहेगा ? अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद उच्चाधिकारी गहरी नींद से जागते हैं या फिर ‘तारीख पर तारीख’ का खेल चलता रहेगा।
इस मामले में एसएनजी महाविद्यालय के पूर्व छात्रों और समाजसेवियों द्वारा 10 मई को मुख्यमंत्री के मुंगेली आगमन पर पूरे मामले की उनसे शिकायत करने की जानकारी मिली हैं।

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