वैज्ञानिक पशुपालन से मिसाल बने धमतरी के धनऊ सोनकर 75 की उम्र, युवाओं सा जज़्बा

0
IMG-20260720-WA0621(1)

​नियमित कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार और समय पर टीकाकरण को बनाया जीवन का मूलमंत्र

रायपुर । धमतरी जिला वैज्ञानिक पशुपालन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन गया है। उन्नत नस्ल के लिए ‘कृत्रिम गर्भाधान’, ‘फोल्डस्कोप’ जैसी पोर्टेबल माइक्रोस्कोप तकनीक और गौधामों के सफल संचालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। जिले का ग्राम पुरी कृत्रिम गर्भाधान और उन्नत पशुधन विकास का एक प्रमुख मॉडल है। इसके जरिए दुग्ध उत्पादन में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

NTPC World Environment Day

सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती, बल्कि संकल्प, वैज्ञानिक सोच और निरंतर परिश्रम का परिणाम होती है। यह उक्ति धमतरी जिले के ग्राम सिलघट निवासी 75 वर्षीय श्री धनऊ (भजनाहा) सोनकर पर सटीक बैठती है। जहाँ इस उम्र में लोग प्रायः विश्राम को प्राथमिकता देते हैं, वहीं श्री सोनकर अपने अनुशासन, अथक परिश्रम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

​मेहनत और वैज्ञानिक सोच का अद्भुत संगम ​श्री सोनकर की दिनचर्या किसी युवा से कम अनुशासित नहीं है। वे प्रतिदिन स्वयं खेतों से अपने गौवंशीय पशुओं के लिए हरा चारा काटते हैं और उसे साइकिल से घर लाते हैं। ​वर्तमान में उनके पास 4 गौवंशीय पशु हैं। जिसमें ​1 एचएफ × जर्सी संकर गाय, ​1 गिर × जर्सी संकर गाय,​1 गिर नस्ल की बछिया और ​1 बछड़ा है।​इनकी देखभाल, आहार-पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य प्रबंधन का पूरा दायित्व वे बिना किसी सहायता के स्वयं संभालते हैं।

नस्ल सुधार और आधुनिक तकनीकों के प्रति प्रतिबद्धता ​श्री धनऊ सोनकर पारंपरिक पशुपालन के बजाय वैज्ञानिक तरीकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। जैसे ही गाय हीट में आती है, वे बिना विलंब किए पशु चिकित्सा अमले को सूचित करते हैं। मई-जून की भीषण गर्मी में भी वे 3-4 किलोमीटर साइकिल चलाकर सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी (AVFO) को लाने खुद जाते हैं। क्षेत्र के एवीएफओ श्री चंद्रशेखर निर्मलकर बताते हैं कि पिछले 11 वर्षों से श्री सोनकर नियमित कृत्रिम गर्भाधान (AI) कराकर क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली दुग्ध उत्पादक नस्लों के विकास में योगदान दे रहे हैं। वे अवांछित (नाटे) सांडों का समय पर बधियाकरण कराते हैं। इसके साथ ही खुरपका-मुंहपका (FMD), गलघोटू (HS) और लम्पी स्किन डिजीज (LSD) जैसे गंभीर रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करते हैं।

आत्मनिर्भरता और समृद्धि का संदेश

​ श्री धनऊ सोनकर का कहना है कि पशुपालन केवल अतिरिक्त आय का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार है। सही पोषण, समय पर उपचार और वैज्ञानिक प्रबंधन से पशु स्वस्थ रहते हैं और परिवार की आय में निरंतर वृद्धि होती है।

शासकीय योजनाओं का मिल रहा संबल ​धमतरी जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग द्वारा पशुपालकों को तकनीकी मार्गदर्शन, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और नस्ल सुधार जैसी सुविधाएँ निरंतर उपलब्ध कराई जा रही हैं। शासन के इन प्रयासों को श्री सोनकर जैसे जागरूक पशुपालक धरातल पर सफल बना रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel

Latest News

error: Content is protected !!