दो साल से नोटिस पर नोटिस, लेकिन कार्रवाई अधूरी: मुंगेली में अवैध प्लॉटिंग पर नगर पालिका के दावों की खुली पोल

2024 से 2026 तक नोटिस, अंतिम चेतावनी, पुलिस बल की मांग और एफआईआर की बात… फिर भी जारी है अवैध कॉलोनियों का कारोबार; प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल
मुंगेली। शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना वैधानिक अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों का मुद्दा अब केवल नगर पालिका की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुका है। पिछले दो वर्षों के नगर पालिका परिषद मुंगेली के आधिकारिक अभिलेखों का अध्ययन बताता है कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच कई मामलों में नोटिस जारी किए गए, अंतिम चेतावनियां दी गईं, अवैध निर्माण हटाने के आदेश पारित हुए, पुलिस बल की मांग की गई, एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई और विभिन्न विभागों को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजे गए। इसके बावजूद शहर में अवैध प्लॉटिंग का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा।
यही कारण है कि अब सवाल केवल अवैध कॉलोनियों के अस्तित्व का नहीं, बल्कि उन सरकारी कार्रवाइयों के अंतिम परिणाम का भी है, जिनका उल्लेख बार-बार सरकारी रिकॉर्ड में मिलता है। दस्तावेज यह तो बताते हैं कि कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि उसका निष्कर्ष क्या रहा।

रिकॉर्ड में कार्रवाई, जमीन पर परिणाम पर सवाल
नगर पालिका के उपलब्ध दस्तावेजों में प्रारंभिक नोटिस, अंतिम नोटिस, विभागीय पत्राचार, पुलिस बल की मांग और एफआईआर की चेतावनी जैसी अनेक प्रशासनिक प्रक्रियाएं दर्ज हैं। लेकिन इन अभिलेखों से यह स्पष्ट नहीं होता कि कितनी अवैध कॉलोनियों को वास्तव में हटाया गया, कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, कितनों पर आर्थिक दंड लगाया गया और कितने मामलों का अंतिम निराकरण हुआ।

यही वजह है कि शहर में प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यदि नोटिसों के बाद भी कथित अवैध प्लॉटिंग जारी रही तो कार्रवाई की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक होना आवश्यक माना जा रहा है।
2024 में स्वर्ण वाटिका से शुरू हुई कार्रवाई
नगर पालिका की कार्रवाई का पहला प्रमुख रिकॉर्ड 15 फरवरी 2024 का मिलता है। अंबेडकर वार्ड क्रमांक-13 स्थित “स्वर्ण वाटिका” परियोजना के संबंध में नगर पालिका ने नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर प्लॉटिंग बंद करने, कॉलोनाइजर लाइसेंस, स्वीकृत ले-आउट तथा अन्य आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
नोटिस में उल्लेख किया गया कि बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करना छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 सहित लागू नियमों का उल्लंघन है तथा निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

महज 12 दिन बाद जारी हो गया अंतिम नोटिस
पहले नोटिस के मात्र 12 दिन बाद 27 फरवरी 2024 को उसी मामले में अंतिम नोटिस जारी किया गया। इसमें कहा गया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया है तथा राजस्व विभाग की जांच में मौके पर प्लॉटिंग से संबंधित निर्माण और विकास कार्य पाए गए हैं।
नगर पालिका ने सात दिनों के भीतर भूमि को मूल स्वरूप में लाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर नगर पालिका स्वयं कार्रवाई करेगी तथा उसका पूरा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है। यदि अंतिम नोटिस जारी हो चुका था तो उसके बाद क्या वास्तव में अवैध निर्माण हटाया गया? यदि हटाया गया तो उसका सार्वजनिक रिकॉर्ड कहां है? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो अंतिम नोटिस का क्या परिणाम निकला?
करीब एक वर्ष बाद फिर शुरू हुई कार्रवाई
लगभग एक वर्ष बाद 5 जनवरी 2026 को नगर पालिका ने मुंगेली-पंडरिया मार्ग पर विकसित की जा रही एक अन्य कथित अवैध कॉलोनी के संबंध में चार लोगों को नोटिस जारी किया।
नगर पालिका ने आरोप लगाया कि बिना वैध ले-आउट स्वीकृति और आवश्यक अनुमति के कॉलोनी विकसित की जा रही है। संबंधित पक्षों को 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य बंद करने, बनाई गई सड़क एवं अन्य संरचनाएं हटाने तथा भूखंडों की बिक्री तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए।
साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई कि आदेशों का पालन नहीं होने पर बिना किसी अतिरिक्त सूचना के निर्माण ध्वस्त किया जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

अन्य विभागों को भी भेजे गए पत्र
कार्रवाई को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से नगर पालिका ने संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश, सीएसपीडीसीएल, एसडीएम, तहसीलदार तथा जिला पंजीयक कार्यालय सहित अन्य विभागों को भी पत्र भेजे।
इन पत्रों में संबंधित कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन नहीं देने, संपत्ति पंजीयन रोकने तथा अन्य प्रशासनिक कार्यवाही रोकने का अनुरोध किया गया था।
यदि इन निर्देशों के बावजूद कथित अवैध प्लॉटिंग जारी रही तो यह प्रश्न भी उठता है कि संबंधित विभागों ने इन पत्रों पर कितना अमल किया।
16 मई की कार्रवाई के लिए मांगा गया पुलिस बल
नगर पालिका ने 15 मई 2026 को सिटी कोतवाली थाना प्रभारी को पत्र लिखकर 16 मई को प्रस्तावित कार्रवाई के लिए पर्याप्त पुलिस बल एवं महिला पुलिसकर्मियों की मांग की।
पत्र में उल्लेख था कि सुबह सात बजे से अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित है तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
इससे स्पष्ट होता है कि उस समय नगर पालिका कार्रवाई के लिए तैयारी कर चुकी थी।
लेकिन क्या वास्तव में हुई कार्रवाई?
यहीं सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है।
यदि 16 मई को कार्रवाई प्रस्तावित थी तो—
- क्या अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चला?
- क्या सीसी रोड और अन्य निर्माण हटाए गए?
- क्या किसी कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई?
- क्या किसी की गिरफ्तारी हुई?
- क्या किसी पर आर्थिक दंड लगाया गया?
- क्या किसी परियोजना का विकास पूरी तरह रोका गया?

उपलब्ध दस्तावेज इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर नहीं देते। इसी कारण प्रशासनिक कार्रवाई की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
फिर जारी हुआ अंतिम नोटिस
इसके बाद नगर पालिका ने मैसर्स राज प्रॉपर्टी डेवलपर्स के प्रोपराइटर सूरज मक्कड़ को अंतिम नोटिस जारी किया। इसमें उल्लेख किया गया कि 18 फरवरी तथा 15 मई को पहले भी नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
नगर पालिका ने चेतावनी दी कि अब एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी तथा कार्रवाई में आने वाला पूरा खर्च संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा।
दो वर्षों में नोटिसों की लंबी श्रृंखला
नगर पालिका के उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि अलग-अलग मामलों में—
- प्रारंभिक नोटिस जारी किए गए।
- अंतिम नोटिस जारी किए गए।
- अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए गए।
- एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई।
- पुलिस बल की मांग की गई।
- कार्रवाई का खर्च वसूलने की चेतावनी दी गई।
- बिजली कनेक्शन रोकने के लिए विभागों को पत्र भेजे गए।
- जिला पंजीयक कार्यालय को भी कार्रवाई के लिए लिखा गया।
इसके बावजूद यदि शहर में अवैध प्लॉटिंग की शिकायतें लगातार सामने आती हैं तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
नागरिकों में बढ़ रहा असंतोष
शहर के कई नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन शुरुआती स्तर पर ही प्रभावी कार्रवाई करता तो अवैध कॉलोनियों का विस्तार इतनी तेजी से नहीं होता।
लोगों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करने से कानून का पालन सुनिश्चित नहीं होता। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध समयबद्ध और दृश्यमान कार्रवाई ही ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगा सकती है।
क्या केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहा अभियान?
उपलब्ध दस्तावेज यह साबित करते हैं कि कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करते कि चेतावनी के बाद कितने मामलों में अवैध निर्माण हटाए गए, कितनों पर जुर्माना लगाया गया, कितनी एफआईआर दर्ज हुईं और कितने मामलों का अंतिम निपटारा हुआ।
इसी वजह से शहर में कई लोग इस पूरे अभियान को केवल कागजी कार्रवाई बताते हुए इसकी निष्पक्ष समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
सबसे बड़ा नुकसान आम खरीदारों को
अवैध कॉलोनियों का सबसे अधिक नुकसान उन लोगों को होता है जो जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदते हैं। बाद में यदि कॉलोनी अवैध घोषित हो जाए, विकास कार्य रुक जाएं या वैधानिक अनुमति न मिले तो आर्थिक और कानूनी संकट खरीदारों के सामने खड़ा हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्लॉट या कॉलोनी में निवेश करने से पहले कॉलोनाइजर लाइसेंस, स्वीकृत ले-आउट, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की अनुमति, भूमि अभिलेख तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों की पूरी जांच कर लेना आवश्यक है।
प्रशासन के सामने विश्वसनीयता की चुनौती
लगातार दो वर्षों तक नोटिस जारी होने, अंतिम चेतावनियां देने और कार्रवाई की घोषणाओं के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन की विश्वसनीयता की है। यदि वास्तव में प्रभावी कार्रवाई हुई है तो उसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि कार्रवाई अधूरी रही है तो उसके कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
यह मामला अब केवल अवैध प्लॉटिंग का नहीं, बल्कि कानून के समान अनुपालन, प्रशासनिक पारदर्शिता और आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा का विषय बन चुका है।
क्या बोले जिम्मेदार
सिटी कोतवाली थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े ने बताया कि नगर पालिका परिषद मुंगेली द्वारा 16 मई 2026 को प्रस्तावित कार्रवाई के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिले से पुलिस जवानों की ड्यूटी भी लगाई गई थी, लेकिन किसी कारणवश प्रस्तावित कानून-व्यवस्था ड्यूटी स्थगित हो गई। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग किसी भी प्रकार की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार था।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर ने बताया कि पंडरिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे “स्वर्ण वाटिका” नाम से नगर पालिका की एनओसी एवं आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना प्लॉटिंग और सीसी रोड का निर्माण कराया गया था। इस संबंध में पहले दो बार नोटिस जारी किए गए थे। निर्देशों का पालन नहीं होने पर अंतिम नोटिस भी दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब संबंधित मामले में सक्षम न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया जाएगा तथा न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पार्षद प्रतिनिधि आयुष शुक्ला ने कहा कि नगर पालिका क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग का खेल किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भू-माफिया नियमों की अनदेखी कर लोगों की जीवनभर की जमा पूंजी से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में किसी परियोजना के बिना वैधानिक अनुमति संचालित होने की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पिछले दो वर्षों में जारी नोटिसों के बावजूद कार्रवाई में हुई देरी की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अतिरिक्त कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय ने कहा कि संबंधित मामले में विधिवत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जांच और प्रक्रिया पूरी करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमों के अनुरूप कदम उठाए जाएंगे।

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