रेल लाइन की स्वीकृति पर मुंगेली प्रेस क्लब ने किया केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू का स्वागत
कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहे संघर्ष को बताया नागरिकों की जीत, प्रेस क्लब ने जताया आभार
मुंगेली। कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल लाइन निर्माण की विभिन्न बाधाओं को दूर कर परियोजना को पुनः स्वीकृति दिलाए जाने के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू के मुंगेली आगमन पर प्रेस क्लब मुंगेली के पत्रकारों एवं क्षेत्रवासियों ने प्रेस क्लब चौक में उनका स्वागत किया। इस दौरान पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री तथा मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले और पूर्व सांसद लखनलाल साहू का भी स्वागत किया गया। प्रेस क्लब ने रेल लाइन की स्वीकृति को क्षेत्रवासियों के लंबे संघर्ष की जीत बताया।
रेल लाइन की मांग को लेकर मुंगेली प्रेस क्लब के बैनर तले क्षेत्रवासियों के साथ लंबे समय से आंदोलन और विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जाते रहे हैं। प्रेस क्लब का कहना है कि मुंगेली को रेल सुविधा से जोड़ने की मांग केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि क्षेत्र के नागरिकों की वर्षों पुरानी मांग रही है। इसी संघर्ष के परिणामस्वरूप अब कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

वर्षों पुरानी मांग को लेकर चलता रहा संघर्ष
प्रेस क्लब के वरिष्ठ एवं संस्थापक सदस्य मनोज अग्रवाल ने बताया कि मुंगेली प्रेस क्लब सामाजिक सरोकारों और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के साथ काम करता रहा है। जिला निर्माण आंदोलन से लेकर रेल लाइन की मांग, क्षेत्र में शांति व्यवस्था और विभिन्न सर्वदलीय मुद्दों तक प्रेस क्लब के बैनर तले समय-समय पर संघर्ष किया गया है।

उन्होंने बताया कि मुंगेली में रेल लाइन की मांग का इतिहास काफी पुराना है। अलग-अलग समय में बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों ने भी इस मांग को संसद में उठाया। तत्कालीन सांसद निरंजन केशरवानी ने लोकसभा में मुंगेली रेल लाइन की मांग उठाई थी। इसके बाद खेलनराम जांगड़े, जांजगीर सांसद रहते प्रभात मिश्रा और बिलासपुर से चार बार सांसद रहे पुन्नूलाल मोहले ने भी रेल सुविधा की मांग को आगे बढ़ाया।
उन्होंने बताया कि दिलीप सिंह जूदेव ने भी सांसद रहते मुंगेली की रेल मांग को आगे बढ़ाया और मुंगेली में रेल टिकट काउंटर खुलवाने की पहल की थी। इसके अलावा लखनलाल साहू, अरुण साव, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय और दुर्ग सांसद सरोज पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अलग-अलग अवसरों पर रेल लाइन की मांग संसद में उठाई।
साइकिल यात्रा और आंदोलनों से तेज हुई आवाज
रेल लाइन की मांग को लेकर मुंगेली प्रेस क्लब द्वारा साइकिल यात्रा सहित विभिन्न आंदोलन किए गए। क्षेत्र के नागरिकों को साथ लेकर आंदोलन को व्यापक रूप देने का प्रयास किया गया। तत्कालीन सांसद लखनलाल साहू ने भी संसद में इस मांग को उठाया। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ किए गए प्रयासों के बाद रेल लाइन परियोजना को पूर्व में स्वीकृति मिली थी। हालांकि भूमि अधिग्रहण और राज्यांश सहित विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ लगभग पांच वर्षों तक यह मामला आगे नहीं बढ़ पाया। रेल लाइन की मांग को लेकर क्षेत्र में फिर से प्रयास शुरू हुए।
सांसद बनने के बाद तोखन साहू ने उठाया मामला
प्रेस क्लब के अनुसार वर्ष 2024 में तोखन साहू के बिलासपुर सांसद निर्वाचित होने और बाद में केंद्रीय राज्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल लाइन की मांग को केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के समक्ष रेल परियोजना को लेकर लगातार पहल की गई।
बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा परियोजना में 50 प्रतिशत भागीदारी की सहमति दिए जाने के बाद परियोजना को पुनः स्वीकृति मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। प्रेस क्लब ने इसके लिए केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू सहित राज्य सरकार और इस मांग को लेकर वर्षों से संघर्ष कर रहे क्षेत्रवासियों के प्रति आभार जताया।
प्रेस क्लब ने बताया नागरिकों के संघर्ष की जीत
प्रेस क्लब अध्यक्ष अनिल सोनी ने कहा कि मुंगेली को रेल सुविधा से जोड़ने की मांग लंबे समय से क्षेत्र के विकास का प्रमुख मुद्दा रही है। रेल लाइन की स्वीकृति से मुंगेली सहित आसपास के क्षेत्रों में आवागमन, व्यापार, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर प्रेस क्लब के संस्थापक सदस्य मनोज अग्रवाल, संरक्षक शैलेन्द्र जायसवाल, प्रमोद पाठक, सुनील पाठक, प्रशांत शर्मा, राहुल पाठक, आशीष मिश्रा सहित पत्रकार एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
प्रेस क्लब का कहना है कि रेल लाइन की स्वीकृति को किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि के बजाय वर्षों से चले आ रहे सामूहिक संघर्ष का परिणाम माना जाना चाहिए। हालांकि वर्तमान में स्वीकृति के बाद परियोजना के धरातल पर उतरने, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू होने की प्रक्रिया पर क्षेत्रवासियों की नजर रहेगी।

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