पीएम स्वनिधि ने स्ट्रीट वेंडर्स को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनकी आय और जीवन स्तर में किया सुधार”: तोखन साहू
The Minister of State for Housing & Urban Affairs, Shri Tokhan Sahu addressing at the event World Habitat Day at Vigyan Bhawan, in New Delhi on October 08, 2025.
पीएम स्वनिधि से 76.95 लाख स्ट्रीट वेंडर्स लाभान्वित, ₹18,475 करोड़ के ऋण वितरित: श्री साहू
बिलासपुर । प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना किसी जमानत के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के अपने उद्देश्य को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया है। योजना की शुरुआत से 12 जुलाई 2026 तक देशभर में 76.95 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को 1.15 करोड़ से अधिक बिना जमानत ऋण वितरित किए गए हैं, जिनकी कुल राशि ₹18,475 करोड़ है।

इसी अवधि तक 29.71 लाख विक्रेताओं ने योजना के तहत दूसरी ऋण किश्त का लाभ उठाया है, जबकि 8.49 लाख विक्रेताओं ने तीसरी ऋण किश्त प्राप्त की है। इससे छोटे व्यवसायों को निरंतर कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने और उन्हें औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।

योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB), हैदराबाद द्वारा वर्ष 2023 और 2025 में अध्ययन किए गए। वर्ष 2023 का अध्ययन देश के 100 शहरी स्थानीय निकायों में 5,000 से अधिक लाभार्थियों को शामिल करते हुए किया गया। अध्ययन में पाया गया कि 95 प्रतिशत लाभार्थियों के लिए पीएम स्वनिधि ऋण उनके बैंक से प्राप्त होने वाला पहला ऋण था और इसका उपयोग मुख्य रूप से व्यवसाय के विस्तार के लिए किया गया।
वर्ष 2025 में 99 शहरी स्थानीय निकायों में 5,000 से अधिक लाभार्थियों को शामिल कर किए गए अध्ययन के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच पीएम स्वनिधि ऋण लेने वाले विक्रेताओं की औसत वार्षिक व्यावसायिक आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि सभी ऋण चक्रों को मिलाकर लगभग 30 प्रतिशत ऋणधारकों ने पीएम स्वनिधि के अतिरिक्त अन्य ऋण भी लिए, जो इस बात का संकेत है कि योजना ऐसे विक्रेताओं के लिए औपचारिक ऋण व्यवस्था में प्रवेश और क्रेडिट हिस्ट्री निर्माण का प्रभावी माध्यम बनी है, जिनकी पहले औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक सीमित या कोई पहुंच नहीं थी।
पीएम स्वनिधि योजना का प्रभाव केवल व्यवसाय के विस्तार तक सीमित नहीं रहा है। अध्ययन के अनुसार, ऋण की उपलब्धता से घरेलू नकदी प्रवाह को स्थिरता मिली, जिससे लाभार्थी परिवारों के जीवन स्तर, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और बच्चों की शिक्षा में भी सकारात्मक सुधार हुआ है। साथ ही, 2023 से 2025 के बीच स्ट्रीट वेंडर्स के बीच डिजिटल भुगतान के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
यह जानकारी आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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