हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ा पर्व : डॉ. सरिता भारद्वाज

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धर्म जागरण मातृ शक्ति जिला कार्यकर्ता डॉ. सरिता भारद्वाज ने प्रदेशवासियों को दी हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक एवं प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार के अवसर पर धर्म जागरण मातृ शक्ति जिला कार्यकर्ता बिलासपुर, छत्तीसगढ़ डॉ. सरिता भारद्वाज ने प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और प्रकृति के प्रति लोगों के गहरे जुड़ाव का प्रतीक है।

डॉ. सरिता भारद्वाज ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की मिट्टी, कृषि, गांवों की परंपराओं और लोकजीवन से बनी है। हरेली तिहार इसी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व किसानों के जीवन में विशेष महत्व रखता है। हरेली के अवसर पर किसान कृषि उपकरणों की पूजा-अर्चना कर अच्छी फसल, बेहतर उत्पादन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

उन्होंने कहा कि हरेली केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का अवसर भी है। हरियाली अमावस्या के अवसर पर अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने से पर्यावरण को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

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लोकपरंपराओं और संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश

डॉ. भारद्वाज ने कहा कि आधुनिक समय में तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच अपनी लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हरेली जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को पारंपरिक पर्वों के महत्व से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकपरंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंच सकें।

उन्होंने प्रदेशवासियों से हरेली तिहार को पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्व की खुशियों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए प्रत्येक परिवार को पौधरोपण का संकल्प लेना चाहिए।

हरियाली से समृद्धि और खुशहाली का संदेश

डॉ. सरिता भारद्वाज ने कहा कि हरेली तिहार हमें प्रकृति, कृषि और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। हरियाली केवल पर्यावरण के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन और समृद्ध समाज की आधारशिला भी है। उन्होंने प्रदेश के किसानों की मेहनत, कृषि संस्कृति और प्रकृति संरक्षण के प्रयासों को नमन करते हुए सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उन्होंने कहा कि हरेली की हरियाली छत्तीसगढ़ के गांव-गांव और शहर-शहर में खुशहाली लेकर आए। किसानों को अच्छी फसल मिले, परिवारों में सुख-शांति बनी रहे और प्रदेश निरंतर विकास एवं समृद्धि की दिशा में आगे बढ़े, यही हरेली तिहार के अवसर पर उनकी मंगलकामना है।

डॉ. सरिता भारद्वाज ने पुनः प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी से प्रकृति संरक्षण, पौधरोपण और अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति को सहेजने का संकल्प लेने की अपील की।

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