पचपेड़ी में धूमधाम से हुआ भोजली विसर्जन, झांझ-मांदर की थाप और कीर्तन से गूंजा गांव
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
पूर्व जिला पंचायत सदस्य किरण यादव एवं सेवा सहकारी समिति प्रबंधक संतोष यादव की पहल पर आयोजित हुआ भोजली विसर्जन कार्यक्रम
बिलासपुर/मस्तूरी। ग्राम पंचायत पचपेड़ी में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व भोजली के अवसर पर भोजली विसर्जन कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य किरण यादव एवं सेवा सहकारी समिति प्रबंधक संतोष यादव के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। भोजली विसर्जन के दौरान पूरा गांव पारंपरिक गीत-संगीत और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

भोजली विसर्जन के लिए ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में झांझ, मांदर और नगाड़ों की थाप के साथ कीर्तन मंडलियां शामिल हुईं। ग्रामीणों ने भोजली गीत एवं भक्ति गीत गाते हुए उत्साहपूर्वक शोभायात्रा में भाग लिया। महिलाओं की विशेष सहभागिता रही और उन्होंने पारंपरिक तरीके से भोजली माता की पूजा-अर्चना कर पर्व की रस्में पूरी कीं।


पारंपरिक गीत-संगीत से भक्तिमय हुआ माहौल
भोजली विसर्जन के दौरान गांव की गलियों में पारंपरिक लोकगीतों और कीर्तन की गूंज सुनाई देती रही। मांदर और झांझ की थाप के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। महिलाओं और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से भोजली गीत गाकर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी भोजली उत्सव में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों के बीच आयोजित शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना
शोभायात्रा के बाद श्रद्धालुओं ने भोजली का पारंपरिक विधि-विधान से विसर्जन किया। इस दौरान क्षेत्र और गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की गई। ग्रामीणों ने भोजली माता से सभी परिवारों में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि एवं लोक संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पारंपरिक त्योहार है। इस पर्व के माध्यम से प्रकृति, कृषि और सामुदायिक एकता के प्रति सम्मान की भावना भी प्रकट होती है। पचपेड़ी में आयोजित भोजली विसर्जन कार्यक्रम ने इसी पारंपरिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
संस्कृति और परंपरा को सहेजने का प्रयास
पूर्व जिला पंचायत सदस्य किरण यादव ने कहा कि भोजली छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोकगीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
सेवा सहकारी समिति प्रबंधक संतोष यादव ने भी भोजली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामूहिक रूप से मनाए जाने वाले ऐसे पारंपरिक आयोजन गांव में आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, पुरुष, युवा एवं श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा। भोजली विसर्जन के साथ पचपेड़ी में पारंपरिक पर्व का समापन हुआ और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

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